दोपहर 2:30 बजे से होने वाले उपाध्यक्ष चुनाव में मतदान की मिली अनुमति; हाईकोर्ट ने कहा-चुनाव में शामिल होने के बाद जांच में दें सहयोग, 30 सितंबर को जांच अधिकारी के सामने होना होगा पेश
जोधपुर। फतेहनगर-सनवाड़ नगरपालिका में उपाध्यक्ष पद के चुनाव से पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने गिरफ्तार किए गए नवनिर्वाचित वार्ड सदस्य राजेश चपलोत को मंगलवार दोपहर यानी आज 2 बजे से पहले तत्काल रिहा करने के आदेश दिया हैं, ताकि वे आज ही होने वाले उपाध्यक्ष पद के चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
जस्टिस सुनील बेनीवाल ने एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव में मतदान के लिए की गई रिहाई का लंबित जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वार्ड सदस्य को चुनाव में भाग लेने के बाद जांच में शामिल होना होगा।
राजेश चपलोत ने अधिवक्ता मोहम्मद अमान और अनुष्क जैन के जरिए हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए याचिका दायर कि थी. वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली ने मामले में चपलोत की ओर से पैरवी करते हुए दलीले दी.
2:30 से 5 बजे तक होना हैं उपाध्यक्ष का चुनाव
फतेहनगर-सनवाड़ नगरपालिका में उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव मंगलवार को दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित था।
इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने गिरफ्तार वार्ड सदस्य की चुनाव में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्हें दोपहर 2 बजे से पहले रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट के आदेश के बाद राजेश चपलोत को चुनाव में शामिल होकर मतदान करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद उन्हें जांच प्रक्रिया में शामिल होना होगा।
14 सितंबर को वार्ड नंबर 3 से जीते थे चुनाव
याचिकाकर्ता राजेश चपलोत 14 सितंबर को फतेहनगर-सनवाड़ नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 से वार्ड सदस्य निर्वाचित हुए थे।
इसके बाद उन्होंने 21 सितंबर को नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में भी मतदान किया था।
अध्यक्ष पद के चुनाव में मतदान के बाद उन्हें एक एफआईआर के संबंध में गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके बाद उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख करते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की।
घटना 14 सितंबर की, FIR पांच दिन बाद दर्ज होने पर कोर्ट का ध्यान
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि जिस घटना के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई, वह कथित तौर पर 14 सितंबर को हुई थी, जबकि एफआईआर 19 सितंबर को दर्ज की गई। यानी एफआईआर दर्ज होने में पांच दिन से अधिक की देरी हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि विवाद मुख्य रूप से राजस्व भूमि से संबंधित है और संबंधित भूमि को लेकर कार्यवाही पहले से ही राजस्व अधिकारियों के समक्ष लंबित है।
राज्य सरकार ने गिरफ्तारी के बाद नियमित जमानत लेने की दलील दी
राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। राज्य की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, इसलिए अब उन्हें नियमित जमानत के लिए संबंधित अदालत का रुख करना चाहिए।
राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि एफआईआर में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया अपराध का खुलासा करते हैं और इसलिए एफआईआर को इस स्तर पर रद्द करने का आधार नहीं बनता।
लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में मतदान के लिए रिहाई
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उपाध्यक्ष पद के चुनाव के निर्धारित समय को ध्यान में रखा। चूंकि चुनाव उसी दिन दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक होना था, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चुनाव में भाग लेने और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर देने के लिए तत्काल रिहाई का निर्देश दिया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि राजेश चपलोत को दोपहर 2 बजे से पहले रिहा किया जाए, ताकि वे समय पर नगरपालिका पहुंचकर उपाध्यक्ष पद के चुनाव में मतदान कर सकें।
चुनाव के बाद जांच में शामिल होना होगा
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव के लिए दी गई रिहाई का एफआईआर की जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करना होगा और 30 सितंबर 2026 को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में शामिल होना होगा।
कोर्ट ने जांच अधिकारी को आवश्यक जांच करने और मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने के निर्देश भी दिए हैं।
6 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मामले को आगे की सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है। इस दौरान जांच की स्थिति और जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस तरह फतेहनगर-सनवाड़ नगरपालिका के उपाध्यक्ष पद के चुनाव से ठीक पहले हाईकोर्ट के आदेश से गिरफ्तार वार्ड सदस्य को मतदान में शामिल होने का अवसर मिला है, जबकि एफआईआर की जांच और अन्य कानूनी कार्यवाही अपने स्तर पर जारी रहेगी।