राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन में अध्यक्ष पद को लेकर घमासान!
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद को लेकर जोधपुर के अधिवक्ता समुदाय में एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
वर्तमान अध्यक्ष रणजीत जोशी के इस्तीफे के बाद जहां नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति बनी है, वहीं दूसरी ओर उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
अब 24 सितंबर को बुलाई गई एसोसिएशन की कार्यकारिणी की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं।
इस बैठक में अध्यक्ष पद की रिक्तता, इस्तीफे और नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना है।
19 सितंबर को इस्तीफा, उपाध्यक्ष ने संभाला कार्यभार
रणजीत जोशी ने 19 सितंबर 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। इस्तिफा बंद लिफाफे में उपाध्यक्ष को सौपा गया था.
इस्तीफे के साथ ही उन्होंने एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बुद्धाराम को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में कार्यभार भी सौंप दिया।
इसके बाद से बुद्धाराम को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालने को लेकर अधिवक्ताओं की ओर से स्वागत और बधाइयों का दौर भी शुरू हो गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
क्या सीधे होगा नए अध्यक्ष का चुनाव?
एसोसिएशन के संविधान के अनुसार यदि अध्यक्ष या महासचिव का पद रिक्त होता है और कार्यकाल में एक वर्ष से अधिक समय शेष रहता है तो उस पद पर चुनाव कराया जा सकता है।
दिसंबर 2025 में वर्तमान कार्यकारिणी के चुनाव हुए थे और उसका कार्यकाल 27 दिसंबर 2027 तक है। ऐसे में अध्यक्ष पद रिक्त होने की स्थिति में नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर रास्ता खुलता दिखाई देता है।
लेकिन वर्तमान स्थिति में सवाल सिर्फ चुनाव कराने का नहीं है।
सवाल यह भी है कि क्या इस्तीफा अंतिम रूप से स्वीकार हो चुका है? क्या कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में बुद्धाराम को ही जिम्मेदारी जारी रखी जाएगी? और यदि चुनाव होता है तो उसकी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी?

गुगली पर गुगली
रणजीत जोशी के इस्तीफे से ज्यादा उनके बिछाए राजनीति के कदमों से अध्यक्ष पद के चुनाव को और पेचीदा कर दिया है।
इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने अपने इस्तिफे में यह बात लिखा जाना कि उनका इस्तिफा कार्यकारिणी द्वारा स्वीकार किया जाए.
इस एक लाइन ने महासचिव और पदाधिकारियों के निर्णय लेने की बजाए संपूर्ण कार्यकारिणी पर मामला आ गया.
यानी रणजीत जोशी ने संपूर्ण कार्यकारिणी से अपने इस्तीफे पर विचार करने को कहा है, ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस्तीफा किस तरह स्वीकार होगा और उसके बाद चुनाव की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी।
दूसरी तरफ रणजीत जोशी ने जिस दिन इस्तिफा दिया उसी दिन कानूनी जंग भी छेड़ दी और कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जोशी के समर्थक माने जाने वाले बुद्धाराम को कार्यभार भी ग्रहण करवाया.
शाम को इस्तीफा… सुबह ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके थे रणजीत जोशी
पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि रणजीत जोशी ने 19 सितंबर की शाम अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, लेकिन इससे पहले उसी दिन सुबह करीब 10 बजे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुके थे।
याचिका में राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य पद के साथ दूसरे पद पर बने रहने से जुड़े नियम को चुनौती दी गई है। इसी कानूनी कदम के चलते अब अध्यक्ष पद से उनके इस्तीफे और आगे की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
यानी एक तरफ अध्यक्ष पद से इस्तीफा और दूसरी तरफ उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती—इन दोनों घटनाक्रमों ने एसोसिएशन के भीतर स्थिति को पेचीदा बना दिया है।

इस्तिफा, लेकिन स्वीकार कैसे होगा…
एसोसिएशन की कार्यकारिणी के करीब 50 से ज्यादा सदस्य हैं और उनमें से भी अधिकांश रणजीत जोशी समर्थक हैं.
कार्यकारिणी के सदस्यों के एक तिहाई सदस्य भी अगर बैठक में शामिल होते हैं बैठक मानी जाती हैं. बैठक में आने वाले सदस्यों में से भी तीन चौथाई सदस्य जो भी फैसला करते हैं वो फैसला मान्य माना जाता हैं.
ऐसे में इस बात की ज्यादा संभावनाए हैं कि फिलहाल रणजीत जोशी को मुश्किल खड़ी नही होगी. अगर एसोसिएशन से इस्तिफा स्वीकार नहीं किया जाता हैं तो क्या वे बीसीआर के सदस्य बने रहेंगे या नहीं.
इसके साथ ही क्या वे बीसीआर में किसी पद पर चुनाव लड़ पायेंगे.

ऐसे ही नहीं 18 बार अध्यक्ष बने..
रणजीत जोशी ने एक ओर बेहद महीन कदम उठाते हुए इस्तिफा महासचिव को नहीं देकर सीधे उपाध्यक्ष को बंद लिफाफे में सौपा था.
जबकि जानकारी के अनुसार अध्यक्ष का इस्तिफा महासचिव को दिया जाता हैं और महासचिव धारा 14 ए के तहत कार्यकारिणी की बैठक बुलाता है।.
लेकिन इस मामले में कई कानूनी बिंदू शुरू से ही खड़े हो गए हैं जो आगे चलकर रणजीत जोशी के लिए अदालत में बड़ी दलील बन सकते हैं
आखिर क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
रणजीत जोशी ने राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य पद का चुनाव लड़ा था और वे निर्वाचित हुए। बार काउंसिल के 23 सदस्यों के निर्वाचन का गजट नोटिफिकेशन 4 सितंबर 2026 को जारी हुआ था।
निर्वाचन के गजट नोटिफिकेशन के 15 दिन के भीतर दूसरे पद से इस्तीफा देने की समयसीमा थी। 19 सितंबर इस 15 दिन की अवधि का अंतिम दिन था।
इसी के चलते रणजीत जोशी ने 19 सितंबर को एसोसिएशन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया।
हालांकि, इस्तीफा सौंपते समय उन्होंने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे पर पूरी कार्यकारिणी के समक्ष विचार किया जाए। यही बिंदु अब आगे की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण हो गया है।

एक तरफ चुनाव की तैयारी, दूसरी तरफ कानूनी लड़ाई
पूरे घटनाक्रम में अब दो प्रक्रियाएं समानांतर चलती दिखाई दे रही हैं।
एक ओर एसोसिएशन के महासचिव की ओर से 24 सितंबर को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चर्चा होगी।
दूसरी ओर रणजीत जोशी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के कारण दो पदों पर बने रहने के नियम और इस्तीफे से जुड़े कानूनी पहलू भी न्यायिक विचार के दायरे में आ गए हैं।
ऐसे में 24 सितंबर की बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

24 सितंबर को क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 24 सितंबर की बैठक में कार्यकारिणी क्या फैसला करती है।
क्या अध्यक्ष पद के लिए विधिवत नया चुनाव कराया जाएगा?
या फिर उपाध्यक्ष बुद्धाराम को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में ही जिम्मेदारी जारी रखने पर सहमति बनेगी?
एसोसिएशन से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखने वाले अधिवक्ताओं के बीच दोनों संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज है।
एक पक्ष अध्यक्ष पद पर नए सिरे से चुनाव कराकर नया अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के पक्ष में बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर रणजीत जोशी से जुड़े पक्ष की ओर से बुद्धाराम को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए रखने की स्थिति को जारी रखने की बात सामने आ रही है।
अब नजर 24 सितंबर की बैठक पर
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद को लेकर घटनाक्रम लगातार बदल रहा है। 19 सितंबर का इस्तीफा, उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका और अब 24 सितंबर की कार्यकारिणी बैठक—इन तीन घटनाओं ने पूरे मामले को महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब यह देखना अहम होगा कि 24 सितंबर को एसोसिएशन की कार्यकारिणी अध्यक्ष पद की रिक्तता और चुनाव को लेकर क्या निर्णय लेती है और सुप्रीम कोर्ट में लंबित कानूनी प्रक्रिया का इस पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या प्रभाव पड़ता है।
फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद को लेकर अगले कुछ दिन जोधपुर के अधिवक्ता समुदाय की नजरों में बेहद अहम रहने वाले हैं।