जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए एक आपराधिक मामले में आरोपी के हक में आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष किसी मामले में CCTV फुटेज जैसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने जा रहा है और यह सामग्री चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश की गई है, तो उसकी कॉपी आरोपी को देना जरूरी है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने कहा कि CCTV फुटेज वाली DVD और पेन ड्राइव भी केस के जरूरी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हैं। इन्हें आरोपी को दिए बिना वह अपना बचाव ठीक से नहीं कर सकता और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित होगा।
इसी के साथ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी को CCTV रिकॉर्डिंग वाली DVD और पेन ड्राइव की कॉपी देने से इनकार किया गया था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दोनों की क्लोन कॉपी आरोपी को तुरंत देने के निर्देश दिए हैं।
चार्जशीट के साथ जमा हुई थी CCTV रिकॉर्डिंग
यह मामला करौली जिले के पाडली खुर्द निवासी अमर सिंह की याचिका से जुड़ा है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 323, 341, 336, 365, 308 और 506 के तहत आरोपों से संबंधित चार्जशीट दाखिल की गई थी।
चार्जशीट के साथ घटना की CCTV रिकॉर्डिंग वाली DVD और पेन ड्राइव भी पुलिस ने कोर्ट में जमा की थी। लेकिन जब आरोपी को चार्जशीट की कॉपी दी गई, तब ये दोनों इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उसे नहीं दिए गए।
आरोपी ने Section 207 के तहत मांगी थी कॉपी
CCTV रिकॉर्डिंग नहीं मिलने पर आरोपी ने Section 207 CrPC के तहत ट्रायल कोर्ट में आवेदन दिया। उसकी मांग थी कि चार्जशीट के साथ जमा CCTV फुटेज वाली DVD और पेन ड्राइव की कॉपी उसे दी जाए।
लेकिन ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि चार्जशीट की कॉपी लेते समय आरोपी ने CCTV रिकॉर्डिंग की मांग नहीं की थी।
इसके बाद अमर सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। उनका कहना था कि यह इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अभियोजन ने चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश किया है और मुकदमे में इस पर भरोसा किया जाना है। ऐसे में अपना बचाव ठीक से रखने के लिए उन्हें इसकी कॉपी मिलना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने कहा- हर जरूरी सबूत आरोपी को देना होगा
हाईकोर्ट ने Section 207 CrPC का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन की ओर से जिस दस्तावेज या सबूत पर भरोसा किया जा रहा है, उसे आरोपी को उपलब्ध कराना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को अपना बचाव ठीक तरीके से रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि अभियोजन उसके खिलाफ किस इलेक्ट्रॉनिक सबूत पर भरोसा कर रहा है। जब तक यह सामग्री उसे नहीं मिलेगी, वह अपना बचाव प्रभावी तरीके से नहीं कर पाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पी. गोपालकृष्णन बनाम केरल सरकार, हरदीप सिंह बनाम पंजाब सरकार, तरुण त्यागी बनाम CBI और सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मनु शर्मा बनाम दिल्ली सरकार के फैसलों का भी जिक्र किया।
हाईकोर्ट ने इन फैसलों के आधार पर कहा कि धारा 207 के तहत आरोपी को जरूरी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत उपलब्ध कराना निष्पक्ष सुनवाई का हिस्सा है। यह आरोपी के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकार से भी जुड़ा है।
आरोपी को CCTV की क्लोन कॉपी देने का आदेश
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश किया गया इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी दस्तावेज की श्रेणी में आता है। अगर अभियोजन उस रिकॉर्ड को आरोपी के खिलाफ इस्तेमाल करने वाला है, तो सामान्य स्थिति में उसकी क्लोन कॉपी आरोपी को देनी होगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि DVD या पेन ड्राइव में मौजूद रिकॉर्ड की क्लोन कॉपी देकर आरोपी को उसकी सामग्री देखने और अपने बचाव की तैयारी करने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए।
गोपनीयता का मामला हो तो कोर्ट लगा सकता है शर्त
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में शिकायतकर्ता, गवाह, पीड़ित या पीड़िता की निजता या पहचान से जुड़ा सवाल हो, तो कोर्ट परिस्थितियों के अनुसार अलग व्यवस्था कर सकता है।
ऐसे मामलों में आरोपी, उसके वकील या विशेषज्ञ को रिकॉर्ड की कॉपी देने के बजाय केवल उसे देखने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट दोनों पक्षों के हितों को संतुलित करने के लिए जरूरी निर्देश भी जारी कर सकता है।
लेकिन इस मामले में ऐसी कोई गोपनीयता से जुड़ी स्थिति सामने नहीं थी। CCTV फुटेज अभियोजन ने चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश की थी और इसी रिकॉर्ड पर मुकदमे में भरोसा किया जाना था। इसलिए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को DVD और पेन ड्राइव की क्लोन कॉपी आरोपी को देने के निर्देश दिए।
‘निष्पक्ष सुनवाई आरोपी का मौलिक अधिकार’
हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई आरोपी के लिए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। इसलिए अभियोजन जिस इलेक्ट्रॉनिक सबूत पर भरोसा कर रहा है, उसे आरोपी को उपलब्ध कराना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 207 के तहत ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि आरोपी को जरूरी दस्तावेज और सबूत उपलब्ध करा दिए गए हैं।
ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द, तत्काल देनी होगी फुटेज की कॉपी
सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने ट्रायल कोर्ट का 31 जुलाई 2023 का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सबूत उपलब्ध कराना अभियोजन और ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि चार्जशीट के साथ जमा की गई CCTV फुटेज वाली DVD और पेन ड्राइव की क्लोन कॉपी तुरंत आरोपी को दी जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सबूत समय पर उपलब्ध कराना सिर्फ कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं है, बल्कि आरोपी को अपना बचाव ठीक से रखने का मौका देने के लिए भी जरूरी है।