जयपुर। जयपुर के नूरानी मस्जिद और मदरसा के कथित विध्वंस को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) सहित संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।
राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ ने जेडीए सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
जेडीए की कार्रवाई को मनमाना और अवैध बताया
वक्फ बोर्ड की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में नूरानी मस्जिद और मदरसा को जेडीए द्वारा गिराए जाने की कार्रवाई को मनमाना और अवैध घोषित करने की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कथित विध्वंस से पहले वक्फ बोर्ड को उचित पूर्व सूचना नहीं दी गई और सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कार्रवाई में विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तथा यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के विपरीत है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ‘In Re: Directions in the matter of demolition of structures’ फैसले का हवाला दिया गया हैं.
प्लॉट नंबर 63 स्थित नूरानी मस्जिद-मदरसा का मामला
याचिका के अनुसार, विवादित संपत्ति जयपुर के अशोक विहार, नंदपुरी, मालवीय नगर स्थित प्लॉट नंबर 63 पर है और इसे नूरानी मस्जिद एवं मदरसा के नाम से जाना जाता है।
वक्फ बोर्ड ने याचिका में दावा किया है कि यह संपत्ति वर्ष 1988 में पंजीकृत वक्फ विलेख के जरिए वक्फ संपत्ति बनी और बाद में राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के रजिस्टर में भी दर्ज की गई।
याचिका में आगे कहा गया है कि उक्त संपत्ति को राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के रजिस्टर में क्रम संख्या 625 पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था।
याचिकाकर्ता का दावा है कि वर्ष 1981 से वहां धार्मिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं।
8 जून 2026 को तोड़ी गयी मस्जिद
वक्फ बोर्ड की याचिका में आरोप लगाया गया है कि 8 जून 2026 की सुबह जयपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई में नूरानी मस्जिद और मदरसा को ध्वस्त कर दिया गया।
याचिका के अनुसार, बोर्ड को कार्रवाई से पहले कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ था।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जेडीए की ओर से 5 जून 2026 की तारीख वाला एक कथित नोटिस सामने आया, जिसमें 7 जून को उपस्थित होने के लिए कहा गया था।
बोर्ड का दावा है कि यह नोटिस उसे विधिवत प्राप्त नहीं हुआ और इसमें संपत्ति का प्लॉट या संपत्ति नंबर भी स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था।
ये सभी तथ्य फिलहाल याचिका में लगाए गए दावे हैं और हाईकोर्ट ने इन पर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2024 INSC 866 के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी निर्माण को ध्वस्त करने से पहले पूर्व नोटिस, जवाब देने का अवसर, व्यक्तिगत सुनवाई और अंतिम आदेश जैसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, विध्वंस से पहले प्रभावित व्यक्ति को नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए तथा अंतिम आदेश के बाद भी न्यायिक या अपीलीय चुनौती के लिए समय उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
राजस्थान हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने याचिका में की गई दलीलों पर विचार करते हुए जेडीए और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है, जिसका जवाब आठ सप्ताह के भीतर मांगा गया है।
हाईकोर्ट ने नोटिस की प्रक्रिया के लिए आवश्यक प्रतियां एक सप्ताह के भीतर दाखिल करने का आदेश दिया है।
आदेश में साधारण डाक और पंजीकृत डाक के माध्यम से नोटिस भेजने तथा ‘दस्ती’ सेवा की अनुमति भी दी गई है। मामले को आठ सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।
फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश केवल नोटिस जारी करने तक सीमित है।
मामले में जेडीए का जवाब आने और आगे की सुनवाई के बाद ही विवादित विध्वंस कार्रवाई की वैधता पर अदालत की ओर से आगे कोई आदेश या निष्कर्ष सामने आएगा।