जोधपुर। किसी महिला को सिर्फ यह कहकर संपत्ति के केस से बाहर नहीं रखा जा सकता कि उसका तलाक हो चुका है। अगर तलाक का कोई सबूत नहीं है और महिला से शादी होने की बात स्वीकार की गई है, तो उसे केस में पक्षकार बनाकर उसका पक्ष सुनना होगा।
राजस्थान हाईकोर्ट ने संपत्ति के बंटवारे से जुड़े एक मामले में 69 वर्षीय महिला को पक्षकार बनाने का आदेश दिया है। साथ ही जस्टिस बिपिन गुप्ता ने जिला जज का वो आदेश रद्द कर दिया, जिसमें महिला की पक्षकार बनाए जाने की मांग खारिज कर दी गई थी।
मामला राधा शर्मा उर्फ अंजुबाला का है। उनका कहना था कि वह घनश्याम दास शर्मा की पत्नी थीं और उनकी संपत्ति के बंटवारे का केस 2018 से चल रहा है। राधा को इस केस में पक्षकार नहीं बनाया गया था।
दूसरे पक्ष ने दावा किया कि राधा का घनश्याम दास शर्मा से तलाक हो चुका था और उन्होंने दूसरी शादी कर ली थी। राधा ने इसका विरोध किया, जबकि तलाक के दावे का कोई सबूत पेश नहीं किया गया।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक हुआ था या नहीं, यह ट्रायल में सबूत के आधार पर तय होगा। फिलहाल राधा को केस में पक्षकार बनाकर उनका पक्ष सुनना जरूरी है।
महिला ने कहा- मैं घनश्याम दास की कानूनी पत्नी हूं
श्रीगंगानगर की जिला अदालत में घनश्याम दास शर्मा की संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा केस वर्ष 2018 से चल रहा है।
याचिकाकर्ता राधा शर्मा की ओर से कहा गया कि वह घनश्याम दास शर्मा की दूसरी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी थीं। उनका कहना था कि संपत्ति विवाद का केस उनकी पहली पत्नी की बेटी ने चौथी पत्नी और उसके बच्चों के खिलाफ दायर किया था।
राधा शर्मा ने जिला कोर्ट में आवेदन देकर कहा था कि संपत्ति के बंटवारे के केस में उनका भी सीधा हित जुड़ा है। इसलिए उन्हें भी मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए।
लेकिन जिला जज, श्रीगंगानगर ने 17 अगस्त 2026 को उनका आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
तलाक का दावा है तो सबूत भी देना होगा
राधा शर्मा की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि यह केस घनश्याम दास शर्मा की पहली पत्नी से हुई बेटी ने चौथी पत्नी और उसके बच्चों के खिलाफ दायर किया था।
केस में यह भी दावा किया गया था कि राधा शर्मा का घनश्याम दास शर्मा से तलाक हो चुका था और इसके बाद घनश्याम दास ने कमल शर्मा से शादी की।
राधा शर्मा ने कहा कि दूसरे पक्ष ने खुद उनके और घनश्याम दास शर्मा के बीच शादी होने की बात मानी है। ऐसे में शादी को अलग से साबित करने की जरूरत नहीं है।
राधा शर्मा ने तलाक होने से भी इनकार किया। उनका कहना था कि अगर दूसरे पक्ष का दावा है कि तलाक हुआ था, तो उसे इसका सबूत भी देना होगा।
दूसरे पक्ष ने भी पक्षकार बनाने पर आपत्ति नहीं की
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने भी स्वीकरा किया कि राधा शर्मा और घनश्याम दास शर्मा के बीच शादी हुई थी। हालांकि उन्होंने कहा कि तलाक होने का कोई सबूत फिलहाल रिकॉर्ड पर नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर राधा शर्मा को मुकदमे में पक्षकार बना दिया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, प्रतिवादियों ने कहा कि वे ट्रायल के दौरान तलाक होने का दावा साबित करने के लिए सबूत पेश करना चाहते हैं।
हाईकोर्ट ने महिला को केस में शामिल करने का आदेश दिया
जस्टिस बिपिन गुप्ता ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राधा शर्मा की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें केस में पक्षकार बनाना सही माना।
हाईकोर्ट ने जिला जज का 17 अगस्त 2026 का आदेश रद्द कर दिया और Order 1 Rule 10 के तहत राधा शर्मा की ओर से पक्षकार बनाने के लिए दिया गया आवेदन मंजूर कर लिया।
अब ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड में उनका नाम भी प्रतिवादी के तौर पर जोड़ा जाएगा। इसके लिए संशोधित पक्षकार सूची दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
तलाक का फैसला अभी नहीं हुआ
हाईकोर्ट ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पक्षकार बनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने तलाक के विवाद पर अंतिम फैसला दे दिया है।
हाईकोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया कि राधा शर्मा का तलाक हुआ था या नहीं। कोर्ट ने सिर्फ इतना तय किया है कि तलाक का दावा होने पर उसे सबूत के जरिए साबित करना होगा।
हाईकोर्ट ने दूसरे पक्ष को ट्रायल के दौरान तलाक से जुड़े सबूत पेश करने की छूट दी है। अगर कोई सबूत पेश किया जाता है, तो ट्रायल कोर्ट उस पर खुद फैसला करेगा।
हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसके आदेश में कही गई किसी बात का असर ट्रायल कोर्ट के फैसले पर नहीं पड़ेगा।
2018 से चल रहा संपत्ति का केस जल्द निपटाने का निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले की पुरानी स्थिति को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति से जुड़ा ये मुकदमा वर्ष 2018 से लंबित है। इसलिए ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई जल्द आगे बढ़ाने और अनावश्यक तारीखें नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि ट्रायल कोर्ट मामले का निपटारा संभव हो तो डेढ़ साल के भीतर करे।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से राधा शर्मा को संपत्ति के बंटवारे के केस में पक्षकार बनाकर उनका पक्ष सुना जाएगा। संपत्ति में उनका अधिकार कितना है और तलाक हुआ था या नहीं, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है।
इन दोनों सवालों पर ट्रायल कोर्ट सबूतों के आधार पर फैसला करेगा।