नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान के वरिष्ठ जिला जज दिनेश कुमार गुप्ता ने सेवानिवृत्ति से महज चार दिन पहले अपनी न्यायिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में आ रही मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपनी शिकायतें राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने की सलाह दी।
देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।
न स्टेनोग्राफर, न कार्यालय की सुविधा
याचिका में जिला जज दिनेश कुमार गुप्ता ने श्रम अदालत में सुविधाओं की कमी को लेकर कई गंभीर शिकायतें उठाईं।
उन्होंने बताया कि अदालत में स्टेनोग्राफर तक उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण न्यायिक आदेशों और फैसलों को तैयार करने में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुविधाओं के अभाव में उन्हें देर रात तक अदालत में बैठकर आदेश और फैसले तैयार करने पड़ रहे हैं।
जिला जज दिनेश गुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिनेश गुप्ता राज्य के वरिष्ठतम जिला न्यायाधीश हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यायिक कार्य के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके पास स्टेनोग्राफर तक उपलब्ध नहीं है और उचित कार्यालय की सुविधा भी नहीं है।
इसके कारण उन्हें स्वयं फैसले लिखने पड़ रहे हैं और वे देर रात तक न्यायिक कार्य करने के लिए मजबूर हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि जिला जज रात करीब दो बजे तक फैसले लिख रहे हैं।
CJI ने कहा-मुख्य न्यायाधीश के सामने रखें अपनी शिकायत
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट में हाल ही में नए मुख्य न्यायाधीश ने कार्यभार संभाला है।
ऐसे में जिला जज अपनी सभी शिकायतों को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखें।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आदेश में दर्ज की जाए।
इसके बाद उन्होंने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगते हुए अपनी सभी शिकायतों को उचित प्राधिकारी के समक्ष रखने और उन पर शीघ्र विचार किए जाने की स्वतंत्रता मांगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया और याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए जिला जज को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए उचित प्राधिकारी के समक्ष जाने की छूट दी।
मामला पहले के सुप्रीम कोर्ट आदेश से भी जुड़ा
दिनेश कुमार गुप्ता का यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के खिलाफ दायर अवमानना याचिका से जुड़ा था।
इससे पहले भी उन्होंने अपनी पोस्टिंग, पद एवं वेतन-भत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि गुप्ता का मूल दर्जा प्रधान जिला न्यायाधीश का बना रहेगा और श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए भी उन्हें प्रधान जिला न्यायाधीश के अनुरूप वेतन-भत्ते मिलेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि उन्हें किसी कनिष्ठ अधिकारी या जिला न्यायाधीश के अधीन रिपोर्ट नहीं करना होगा और उनका प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित सत्र प्रभाग के प्रशासनिक/पोर्टफोलियो न्यायाधीश के अधीन रहेगा।
सेवानिवृत्ति से ठीक पहले फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
दिनेश गुप्ता की सेवानिवृत्ति में महज चार दिन शेष रहते मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना न्यायिक प्रशासन से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बन गया है।
अब उनकी ओर से उठाई गई सुविधाओं संबंधी शिकायतों को राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा।