जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की पहली महिला सीनियर एडवोकेट गायत्री राठौड़ को अब राजस्थान बार काउंसिल में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने सोमवार को दो महिला अधिवक्ताओं को राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य के रूप में मनोनीत किया है।
गायत्री राठौड़ के अनुभव और उनकी वरिष्ठता को लेकर मुख्य न्यायाधीश ने उन्हे ये अहम जिम्मेदारी दी हैं.
गायत्री राठौड़ के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वे राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में पहली महिला सीनियर एडवोकेट हैं।
अब राजस्थान बार काउंसिल में सदस्य के रूप में मनोनयन के साथ उनके न्यायिक एवं अधिवक्ता क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को एक नई जिम्मेदारी मिली है।
राजस्थान की पहली महिला सीनियर एडवोकेट
देश की आजादी से लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के बाद से महिला अधिवक्ताओं ने न्यायिक क्षेत्र में लगातार अपनी पहचान बनाई है, लेकिन सीनियर एडवोकेट के रूप में नामांकन का इतिहास देखें तो गायत्री राठौड़ राजस्थान हाईकोर्ट की अब तक की पहली और एकमात्र महिला सीनियर एडवोकेट हैं।
जनवरी 2022 में राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा 26 अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किए जाने की सूची जारी की गई थी। इस सूची में केवल एक महिला अधिवक्ता का नाम था—गायत्री राठौड़।
इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में पहली महिला सीनियर एडवोकेट के रूप में अपनी जगह बनाई।
डॉक्टर बनने का सपना, लेकिन कानून को बनाया करियर
गायत्री राठौड़ का संबंध नागौर जिले के कड़लू के एक जागीरदार परिवार से है। उनका ननिहाल जयपुर के निकट खोचपुरी में है। उनके नाना और दादा दोनों जमींदार रहे हैं। परिवार की प्रेरणा और समर्थन से उन्होंने कानून के क्षेत्र में कदम रखा।
हालांकि, कानून उनका पहला सपना नहीं था।
वे डॉक्टर बनना चाहती थीं और पीएमटी परीक्षा में भी शामिल हुईं, लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने कानून को अपना करियर बनाया।
आगे चलकर इसी क्षेत्र में उनकी मेहनत और लंबे पेशेवर अनुभव ने उन्हें राजस्थान की पहली महिला सीनियर एडवोकेट के मुकाम तक पहुंचाया।
राजस्थान यूनिवर्सिटी के पहले पांच वर्षीय लॉ बैच का हिस्सा
गायत्री राठौड़ ने अजमेर के सोफिया स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद जयपुर के सेंट एंजेला सोफिया से सीनियर स्तर की शिक्षा पूरी की और महारानी कॉलेज, जयपुर से आगे की पढ़ाई की।
राजस्थान विश्वविद्यालय में वर्ष 1984 में पांच वर्षीय लॉ पाठ्यक्रम शुरू हुआ। गायत्री राठौड़ इस पाठ्यक्रम के 1989 के पहले बैच की लॉ ग्रेजुएट हैं।
1990 में शुरू किया वकालत का सफर
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद गायत्री राठौड़ ने जाने-माने अधिवक्ता पारस कुवाड़ के कार्यालय से अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की।
वर्ष 1990 में उन्होंने राजस्थान बार काउंसिल, जोधपुर में अपना पंजीकरण कराया। इसके बाद उन्होंने जयपुर जिला न्यायालय और राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में प्रैक्टिस शुरू की।
लगातार करीब तीन दशक से अधिक समय तक वकालत करने के बाद जनवरी 2022 में राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट नामित किया।
अब राजस्थान बार काउंसिल में नई जिम्मेदारी
अब मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल द्वारा गायत्री राठौड़ को राजस्थान बार काउंसिल में सदस्य के रूप में मनोनीत किए जाने के बाद उनके पेशेवर सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट की पहली महिला सीनियर एडवोकेट से लेकर अब राजस्थान बार काउंसिल की सदस्य के रूप में मनोनयन तक का उनका सफर प्रदेश की महिला अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण पेशेवर उपलब्धि है।