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डिफॉल्ट के बाद गिरवी संपत्ति पर दोबारा कब्जा नहीं चलेगा, राजस्थान हाईकोर्ट ने फाइनेंस कंपनी को राहत दी; भीलवाड़ा SP को 4 हफ्ते में प्रॉपर्टी वापस दिलाने के आदेश

Rajasthan HC Directs Bhilwara Police to Restore Possession of Mortgaged Property to Housing Finance Company

जोधपुर। बैंक से कर्ज लेकर गिरवी रखी गई संपत्ति पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जा लेने के बाद यदि कर्जदार दोबारा ताला तोड़कर उस पर कब्जा कर ले और पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करे, तो यह कानून के शासन की अनदेखी है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने भीलवाड़ा के ऐसे ही मामले में हाउसिंग फाइनेंस कंपनी को गिरवी संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस नूपुर भाटी ने भीलवाड़ा SP और बनेड़ा थाना प्रभारी को कंपनी को गिरवी संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने के लिए कानून के मुताबिक तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया सर्टिफाइड कॉपी मिलने की तारीख से 4 हफ्ते में पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि फाइनेंस कंपनी ने SARFAESI Act कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति का कब्जा ले लिया था, तब कर्जदारों की ओर से दोबारा जबरन कब्जा करना और बिना कर्ज चुकाए संपत्ति का इस्तेमाल करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मामले में हाउसिंग फाइनेंस कंपनी की ओर से अधिवक्ता अक्षय खंडेलवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए, जबकि उनके साथ अधिवक्ता राजदीप सिंह चौहान ने पैरवी की।

4 लाख रुपये के लोन के लिए प्रॉपर्टी रखी थी गिरवी

मामला भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा इलाके का है। उम्मीद हाउसिंग फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड ने तीन लोगों को ₹4 लाख का लोन दिया था। इस लोन के बदले ग्राम भगवानपुरा की एक प्रॉपर्टी को कंपनी के पास गिरवी रखा गया था।

कंपनी के मुताबिक कर्जदारों ने लोन की किस्तें नहीं चुकाईं। इसके बाद लोन अकाउंट अनियमित हो गया और 3 जनवरी 2025 को NPA घोषित कर दिया गया।

कंपनी ने पहले 8 जनवरी 2025 को SARFAESI Act की धारा 13(2) के तहत कर्जदार और सह-कर्जदारों को डिमांड नोटिस भी जारी किया था।

कर्ज नहीं चुकाया तो SARFAESI Act के तहत कार्रवाई हुई

डिमांड नोटिस के बावजूद कर्जदारों ने बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद कंपनी ने SARFAESI Act की धारा 13(4) के तहत आगे की कार्रवाई शुरू की और गिरवी प्रॉपर्टी का फिजिकल कब्जा लेने के लिए धारा 14 के तहत मजिस्ट्रेट की मदद मांगी।

इस मामले में चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट, भीलवाड़ा ने 13 अक्टूबर 2025 को पुलिस मदद उपलब्ध कराने का आदेश दिया था, ताकि कंपनी गिरवी प्रॉपर्टी का कब्जा ले सके।

20 मई को कंपनी ने लिया कब्जा, फिर तोड़ दिया गया ताला

मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद कंपनी ने 20 मई 2026 को प्रॉपर्टी का फिजिकल कब्जा ले लिया। कंपनी ने वहां ताला लगाया और अपने कब्जे की जानकारी देने वाला बैनर भी लगाया।

लेकिन कंपनी का आरोप है कि इसके बाद कर्जदारों और कुछ अन्य लोगों ने मिलकर प्रॉपर्टी का ताला तोड़ दिया और दोबारा उस पर कब्जा कर लिया। कंपनी ने इस मामले की शिकायत 30 मई 2026 को बनेड़ा थाना और भीलवाड़ा SP को दी।

शिकायत के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की

सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कहा गया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और संपत्ति का कब्जा लेने के बावजूद उसे दोबारा कब्जा नहीं मिल पा रहा है।

कंपनी का कहना था कि उसने पुलिस और SP के सामने शिकायत देकर गिरवी प्रॉपर्टी का कब्जा वापस दिलाने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद कंपनी ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। कंपनी ने कोर्ट से मांग की कि पुलिस अधिकारियों को उसकी शिकायत पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करने और गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी का कब्जा वापस दिलाने का निर्देश दिया जाए।

हाईकोर्ट ने कहा- कानूनी प्रक्रिया से लिया था कब्जा

जस्टिस नूपुर भाटी ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। कोर्ट ने पाया कि कर्जदारों ने लोन लिया था और इसके बदले अपनी प्रॉपर्टी गिरवी रखी थी। लोन नहीं चुकाने के बाद SARFAESI Act के तहत कार्रवाई शुरू हुई और कंपनी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रॉपर्टी का कब्जा लिया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी के कब्जा लेने के बाद प्रतिवादियों ने कथित तौर पर ताला तोड़कर फिर से प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया। इसके बाद कंपनी ने पुलिस और SP से शिकायत कर कब्जा वापस दिलाने की मांग की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

4 सप्ताह में कब्जा वापस दिलाने के निर्देश

इन परिस्थितियों को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनी की रिट याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने भीलवाड़ा SP और बनेड़ा थाना प्रभारी को गिरवी प्रॉपर्टी का कब्जा कंपनी को वापस दिलाने के लिए कानून के मुताबिक तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह कार्रवाई सर्टिफाइड कॉपी मिलने की तारीख से 4 हफ्ते के भीतर पूरी की जाए। इसके साथ ही स्टे एप्लीकेशन और बाकी लंबित अर्जियों का भी निपटारा कर दिया गया।

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