जोधपुर। जिला कोर्टों में इमारत, बिजली, सुरक्षा या दूसरी जरूरी सुविधाओं से जुड़ी कोई समस्या सामने आएगी, तो अब उसके समाधान के लिए तय प्रक्रिया और समय-सीमा होगी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला अदालतों के कामकाज से जुड़ी ऐसी समस्याओं के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP जारी की है।
इसके तहत बार एसोसिएशन, वकीलों और दूसरे संबंधित लोगों की ओर से आने वाली शिकायतों और पत्रों पर कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया तय कर दी गई है।
समस्या मिलने के बाद रिपोर्ट कब बनेगी, जिला जज कब अपनी रिपोर्ट देंगे और मामला कब गार्जियन जज या चीफ जस्टिस तक पहुंचेगा, इसे भी SOP में स्पष्ट किया गया है।
नई व्यवस्था का मकसद यह है कि जिला अदालतों से जुड़ी जरूरी समस्याएं सिर्फ शिकायत बनकर न रह जाएं, बल्कि उनका समय पर समाधान भी हो।
कोर्ट की बिल्डिंग से लेकर बिजली-पानी तक की समस्याएं शामिल
नई SOP का दायरा सिर्फ कोर्ट की इमारत की मरम्मत तक सीमित नहीं है। इसमें कोर्ट परिसर, कोर्ट रूम, जजों के चैंबर, बार रूम और पक्षकारों के लिए जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम शामिल किए गए हैं।
कोर्ट बिल्डिंग के निर्माण, मरम्मत, रिनोवेशन और विस्तार के साथ बिजली व्यवस्था, पावर बैकअप, पेयजल, साफ-सफाई, पार्किंग और सुरक्षा जैसे मुद्दे भी इसके दायरे में रहेंगे।
इसके अलावा फायर सेफ्टी और दिव्यांगजनों के लिए कोर्ट परिसर में आने-जाने की सुविधा से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। कोर्ट के कामकाज को प्रभावित करने वाली प्रशासनिक और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल से जुड़ी समस्याओं पर भी इसी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होगी।
शिकायत मिलने के 3 दिन में तैयार होगी रिपोर्ट
SOP में शिकायत या पत्र मिलने के बाद शुरुआती कार्रवाई के लिए भी समय तय किया गया है।
किसी मामले में रिप्रेजेंटेशन मिलने के बाद रजिस्ट्री को 3 कार्य दिवस के अंदर ऑफिस रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके साथ संबंधित जिला एवं सेशन जज को भी मामले की प्रति भेजकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी जाएगी।
जिला जज को भी 3 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट रजिस्ट्री को भेजनी होगी। इसमें समस्या की वास्तविक स्थिति, उससे कोर्ट के कामकाज पर पड़ने वाला असर, तुरंत किए जा सकने वाले उपाय और आगे के लिए छोटे और लंबे समय के समाधान से जुड़ी सिफारिशें शामिल होंगी।
गार्जियन जज देखेंगे मामले की स्थिति
जिला जज की रिपोर्ट मिलने के बाद रजिस्ट्री पूरा मामला संबंधित जिले के गार्जियन जज के सामने रखेगी। गार्जियन जज मामले की स्थिति और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे।
अगर समस्या ऐसी है, जिसमें बड़े स्तर पर नीतिगत फैसले या अधिक बजट की जरूरत है, तो गार्जियन जज अपनी सिफारिशों के साथ फाइल चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे।
इस व्यवस्था के जरिए जिला अदालतों से जुड़ी समस्याओं को उचित स्तर तक पहुंचाने और उनके समाधान की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने का प्रावधान किया गया है।
नए कोर्ट भवन के उद्घाटन से पहले करनी होगी जांच
नई SOP में नए बने या बड़े स्तर पर मरम्मत किए गए कोर्ट भवनों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
नई बनी या बड़े स्तर पर रिनोवेशन की गई कोर्ट बिल्डिंग का उद्घाटन, संचालन या हैंडओवर तभी किया जाएगा, जब संबंधित गार्जियन जज उसकी पूरी तैयारियों और काम करने की स्थिति का खुद भौतिक सत्यापन कर लें।
अगर निरीक्षण के दौरान कोई कमी सामने आती है, तो उसे दूर किए बिना बिल्डिंग के उद्घाटन की सिफारिश नहीं की जाएगी।
यानी सिर्फ निर्माण पूरा हो जाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बिल्डिंग कोर्ट के रूप में इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार है।
गंभीर मामलों में 24 घंटे के भीतर होगी कार्रवाई
नई SOP में गंभीर और आपातकालीन समस्याओं के लिए अलग व्यवस्था की गई है।
अगर किसी शिकायत में कोर्ट बिल्डिंग में ढांचागत खतरा, आग या बिजली का गंभीर जोखिम, सुरक्षा में सेंध या कोर्ट की सेवाएं ठप होने जैसी स्थिति सामने आती है, तो ऐसे मामलों में सामान्य समय-सीमा का इंतजार नहीं किया जाएगा।
ऐसे मामले को 24 घंटे के अंदर गार्जियन जज और चीफ जस्टिस के संज्ञान में लाया जाएगा। वहीं, जिला जज को भी प्राथमिकता के आधार पर तुरंत आपातकालीन रिपोर्ट भेजनी होगी।
इस तरह नई SOP में जिला अदालतों की सुविधाओं और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर शिकायत से लेकर रिपोर्टिंग और आगे के निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया तय की गई है।
