24 सितंबर की आरक्षण लॉटरी को कोर्ट ने माना नियमों के विपरीत; संविधान के अनुच्छेद 243D, पंचायती राज अधिनियम और चुनाव नियमों के तहत आरक्षण के रोटेशन का पालन जरूरी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर जिले की पंचायत समिति उच्चैन की ग्राम पंचायत बरिघा में सरपंच पद के लिए 24 सितंबर 2026 को हुई आरक्षण लॉटरी को रद्द कर दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि संबंधित आरक्षण प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी।
जस्टिस आनंद शर्मा ने रविंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इसी मुद्दे से संबंधित करौली जिले की दो अन्य याचिकाओं के साथ मामले का निस्तारण किया।
एक ही श्रेणी में दोबारा आरक्षण को लेकर उठे सवाल
बरिघा ग्राम पंचायत निवासी याचिकाकर्ता रविंद्र सिंह की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने तर्क दिया गया कि सरपंच पद को दोबारा अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
अधिवक्ता तनवीर अहमद ने दलील दी कि लगातार उसी श्रेणी में आरक्षण किए जाने से संविधान के अनुच्छेद 243D, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 15 और राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 7 में निर्धारित आरक्षण के रोटेशन का उल्लंघन होता है।
राज्य का तर्क-नई पंचायत समिति बनने से आरक्षण चक्र नए सिरे से शुरू हो
मामले में राज्य सरकार की ओर से यह तर्क रखा गया कि पंचायत समिति उच्चैन का गठन नया हुआ है। इसलिए नई पंचायत समिति के गठन के साथ आरक्षण का चक्र भी नए सिरे से शुरू माना जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने राज्य के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने माना कि यह दृष्टिकोण नियम 7 के प्रावधानों के साथ-साथ सरकार की ओर से जारी स्वयं के परिपत्रों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
‘आरक्षण का निर्धारित चक्र पूरा हुए बिना दोहराव नहीं’
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरक्षण की निर्धारित रोटेशन प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। किसी एक ही श्रेणी के लिए निर्धारित चक्र पूरा हुए बिना उसी श्रेणी में दोबारा आरक्षण किए जाने से आरक्षण की पूरी कार्यवाही प्रभावित होती है।
कोर्ट के अनुसार, आरक्षण की प्रक्रिया को निर्धारित वैधानिक प्रावधानों और लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
पंचायत चुनाव की अधिसूचना के बीच कोर्ट का बड़ा निर्देश
गौरतलब हैं कि पंचायती राज चुनावों की अधिसूचना जारी हो चुकी हैं लेकिन इसससे ठीक पहले आए इस मामले में हाईकोर्ट ने मामले में समयबद्ध निर्देश जारी किए हैं।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्णय की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के सात दिन के भीतर आरक्षण की प्रक्रिया को राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 7 और लागू सरकारी परिपत्रों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार दोबारा पूरा किया जाए।
इसके तहत ग्राम पंचायत बरिघा के सरपंच पद के लिए नए सिरे से आरक्षण लॉटरी आयोजित की जाएगी।
इस फैसले के बाद बरिघा ग्राम पंचायत में सरपंच पद के आरक्षण को लेकर 24 सितंबर को हुई पुरानी लॉटरी प्रभावी नहीं रहेगी और संबंधित अधिकारियों को नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया फिर से करनी होगी।