जयपुर। नगरपालिका चुनाव में नामांकन खारिज होने के बाद उसे सीधे राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे मामले में कानून ने अलग रास्ता तय कर रखा है और नामांकन को लेकर विवाद उठाने के लिए चुनाव याचिका दायर करनी होगी।
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने सवाई माधोपुर के वजीरपुर नगरपालिका चुनाव से जुड़े मामले में यह अहम बात कही है।
इसी के साथ जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने मुकेश कुमार बैरवा की रिट याचिका खारिज कर दी। मुकेश कुमार वार्ड नंबर 14 से पार्षद का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन खारिज कर दिया था। उन्होंने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा पेश हुए, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर के साथ अधिवक्ता आशुतोष उदावत ने पैरवी की।
वार्ड 14 से चुनाव लड़ना चाहते थे मुकेश कुमार
दरअसल मुकेश कुमार बैरवा वजीरपुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 14 से पार्षद का चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने नामांकन फॉर्म जमा किया था, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन खारिज कर दिया।
इसके बाद 1 सितंबर 2026 को पात्र उम्मीदवारों की जारी सूची को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। उनकी मांग थी कि नामांकन खारिज करने की कार्रवाई को रद्द किया जाए और उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए।
नामांकन फॉर्म में स्टे को लेकर पूछा गया था सवाल
सुनवाई के दौरान मुकेश कुमार की ओर से बताया गया कि नामांकन फॉर्म में यह जानकारी मांगी गई थी कि किसी कोर्ट ने उनके पक्ष में कोई स्टे या अंतरिम आदेश दिया है या नहीं।
मुकेश कुमार ने फॉर्म में इसका जवाब ‘नहीं’ दिया था। उनका कहना था कि उनके खिलाफ IPC की धारा 308 के तहत एक आपराधिक केस चल रहा है, लेकिन उस केस में उनके पक्ष में कोई स्टे नहीं है। इसलिए सिर्फ इस वजह से उनका नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि उसी आपराधिक केस में सह-आरोपी एक दूसरे व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है और उसका नामांकन खारिज नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता के मुताबिक नामांकन खारिज होने के बाद चुनाव में सिर्फ एक उम्मीदवार ही बचा है।
हाईकोर्ट ने कहा- नामांकन का विवाद चुनाव याचिका में उठाएं
हाईकोर्ट ने मामले में नामांकन खारिज करने के कारणों की सही या गलत होने की जांच करने के बजाय पहले यह देखा कि क्या ऐसी याचिका सीधे हाईकोर्ट में सुनवाई योग्य है।
हाईकोर्ट ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 31 का हवाला दिया। इस धारा के तहत किसी उम्मीदवार का नामांकन गलत तरीके से खारिज होना चुनाव को चुनौती देने का एक आधार है। लेकिन इसके लिए कानून में इलेक्शन पिटीशन का रास्ता दिया गया है।
‘चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद हाईकोर्ट की दखल की सीमा है’
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एन.पी. पुन्नूस्वामी बनाम रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि चुनाव सिर्फ अंतिम नतीजे का नाम नहीं है, बल्कि नामांकन स्वीकार या खारिज होना भी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि नामांकन को गलत तरीके से खारिज किए जाने की शिकायत को कानून में दिए गए चुनावी रास्ते से ही उठाया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट अपनी रिट शक्ति के जरिए यह जांच नहीं कर सकता कि नामांकन खारिज करने का आधार मामूली था या गंभीर।
रिट याचिका खारिज, इलेक्शन पिटीशन का रास्ता खुला
हाईकोर्ट ने कहा कि मुकेश कुमार की याचिका में उठाया गया विवाद चुनाव याचिका के जरिए उठाया जा सकता है। इसलिए रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया। साथ ही स्टे एप्लीकेशन और दूसरी लंबित अर्जियां भी खारिज कर दी गईं।
यानी कोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया कि मुकेश कुमार का नामांकन सही तरीके से खारिज हुआ था या गलत।
हाईकोर्ट ने सिर्फ यह स्पष्ट किया कि नामांकन खारिज होने के विवाद की जांच के लिए हाईकोर्ट की रिट याचिका का रास्ता नहीं, बल्कि कानून में दी गई इलेक्शन पिटीशन का रास्ता अपनाना होगा।