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पशुधन सहायक भर्ती में श्याम यूनिवर्सिटी का डिप्लोमा मान्य, हाईकोर्ट का चयन बोर्ड को आदेश; अभ्यर्थी को मिलेगी नियुक्ति, कहा- 2022 की नीति पुराने बैच पर लागू नहीं

Livestock Assistant Recruitment: Rajasthan High Court Upholds Shyam University Diploma, Orders Appointment of Candidate

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पशुधन सहायक भर्ती-2022 में कट-ऑफ से ज्यादा अंक हासिल करने के बावजूद अंतिम चयन सूची से बाहर किए गए अभ्यर्थी को बड़ी राहत दी है।

अभ्यर्थी अंकेश कुमार मीणा ने श्याम यूनिवर्सिटी, दौसा से पशुपालन में डिप्लोमा किया था, जिसे मान्यता नहीं होने का हवाला देकर उन्हें चयन सूची में शामिल नहीं किया गया था।

हाईकोर्ट ने उनके डिप्लोमा को वैध मानते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) को उनका नाम अंतिम चयन सूची में शामिल करने और नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस गणेश राम मीणा ने अंकेश कुमार मीणा की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि श्याम यूनिवर्सिटी को अपने कानून के तहत पशुपालन विषय में पढ़ाई कराने का अधिकार है।

अभ्यर्थी ने 2019-21 सत्र में डिप्लोमा पूरा किया था, जबकि राज्य सरकार ने पशुपालन डिप्लोमा कोर्स चलाने के लिए संस्थानों को अनुमति देने की नीति 2022 में बनाई थी। ऐसे में यह नीति याचिकाकर्ता के मामले में लागू नहीं होगी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंकेश को उस अभ्यर्थी की नियुक्ति की तारीख से नियुक्ति का लाभ मिलेगा, जिसकी मेरिट उनसे कम थी। उन्हें सीनियरिटी, वेतन निर्धारण और अन्य परिणामी लाभ भी दिए जाएंगे, लेकिन बीच की अवधि का वास्तविक वेतन नहीं मिलेगा।

अंकेश की ओर से सीनियर एडवोकेट महेंद्र शाह ने पैरवी की। उनकी सहायता अधिवक्ता अक्षत गुप्ता, श्रेयांश धरिवाल, प्रज्ञा सेठ, नवल बंसल, पल्लव पंचोली और कमलेश शर्मा ने की।

कट-ऑफ से ज्यादा अंक, फिर भी चयन सूची से बाहर हुआ

याचिकाकर्ता अंकेश कुमार मीणा ने पशुधन सहायक भर्ती के लिए 11 मार्च 2022 को जारी विज्ञापन के तहत आवेदन किया था।

उन्होंने अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में आवेदन किया और 75.1012 अंक हासिल किए। इस श्रेणी में चयन के लिए कट-ऑफ 73.412 अंक थी। यानी उनके अंक कट-ऑफ से अधिक थे।

इसके बावजूद 7 जुलाई 2022 को जारी मेरिट सूची और 7 सितंबर 2022 को जारी अंतिम चयन सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। इसकी वजह उनका श्याम यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा करना बताया गया।

चयन बोर्ड ने श्याम यूनिवर्सिटी के डिप्लोमा को भर्ती के लिए अमान्य माना

विभाग और चयन बोर्ड ने अंकेश के डिप्लोमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्याम यूनिवर्सिटी ने पशुपालन में डिप्लोमा कोर्स चलाने के लिए राज्य सरकार से जरूरी मंजूरी नहीं ली थी। इसलिए इस डिप्लोमा को पशुधन सहायक भर्ती के लिए मान्य योग्यता नहीं माना जा सकता।

अंकेश ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि श्याम यूनिवर्सिटी राज्य विधानसभा के बनाए कानून के तहत स्थापित है और कानून में उसे पशुपालन विषय की पढ़ाई कराने का अधिकार दिया गया है।

ऐसे में उनके डिप्लोमा को अमान्य मानकर चयन सूची से बाहर करना सही नहीं है।

‘श्याम यूनिवर्सिटी के कानून में पशुपालन विषय शामिल है’

हाईकोर्ट ने श्याम यूनिवर्सिटी से जुड़े 2018 के कानून को देखा। कोर्ट ने पाया कि इस कानून की अनुसूची-II में पशुपालन विषय शामिल है। कानून की धारा 4 और 5 के तहत यूनिवर्सिटी को इस सूची में शामिल विषयों की पढ़ाई कराने और रिसर्च करने का अधिकार है।

हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 2019 में श्याम यूनिवर्सिटी को राजस्थान के कानून के तहत स्थापित निजी विश्वविद्यालय बताया था।

वहीं, राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग ने 8 जुलाई 2021 के पत्र में भी यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रमों और पशुपालन विषय में पढ़ाई कराने की क्षमता का जिक्र किया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि श्याम यूनिवर्सिटी राज्य के कानून के तहत बनी है और उसे पशुपालन विषय में पढ़ाई कराने का अधिकार है।

यह उन सामान्य संस्थानों से अलग है, जो सरकारी अनुमति लेकर डिप्लोमा कोर्स चलाते हैं। इसलिए ऐसे संस्थानों के लिए बनाई गई सरकारी अनुमति की शर्तें श्याम यूनिवर्सिटी पर लागू नहीं होंगी।

‘सरकार की 2022 की नीति पुराने बैच पर लागू नहीं होगी’

राज्य सरकार ने दलील दी कि पशुपालन में डिप्लोमा कोर्स चलाने के लिए संस्थानों को पहले से सरकारी मंजूरी लेनी जरूरी है। इसी आधार पर अंकेश के डिप्लोमा को मान्य नहीं माना गया।

हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि अंकेश ने 2019-21 सत्र में डिप्लोमा किया था, जबकि सरकार ने कोर्स चलाने के लिए मंजूरी से जुड़ी नीति 2022 में बनाई। ऐसे में बाद में बनी नीति को उनके डिप्लोमा पर लागू नहीं किया जा सकता।

इसलिए 2019-21 सत्र में यूनिवर्सिटी से प्राप्त अंकेश का डिप्लोमा पशुधन सहायक भर्ती के लिए मान्य है।

चयन सूची में नाम जोड़ने और नियुक्ति के आदेश

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने यह भी माना कि श्याम यूनिवर्सिटी 2018 के कानून के तहत स्थापित है और इस कानून में पशुपालन विषय शामिल है।

अंकेश कुमार मीणा के अंक ST वर्ग की कट-ऑफ से अधिक हैं और वह अन्य शर्तें पूरी करते हैं, इसलिए उन्हें चयन सूची से बाहर रखना उचित नहीं था।

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित विभागों और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को निर्देश दिया कि अंकेश का नाम अंतिम चयन सूची में शामिल किया जाए। अन्य जरूरी शर्तें पूरी होने पर उन्हें पशुधन सहायक पद पर नियुक्ति भी दी जाए।

हाईकोर्ट ने नियुक्ति से जुड़े लाभों पर भी निर्देश दिए। अंकेश को उस तारीख से नियुक्ति का लाभ मिलेगा, जिस दिन उनसे कम मेरिट वाले अभ्यर्थी को नियुक्त किया गया था। इसके आधार पर उन्हें सीनियोरिटी, वेतन निर्धारण और अन्य सांकेतिक लाभ भी दिए जाएंगे।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीच की अवधि का वास्तविक वेतन उन्हें नहीं मिलेगा। यानी नियुक्ति में देरी के कारण पिछली अवधि की सैलरी नहीं दी जाएगी, लेकिन उस अवधि को सीनियोरिटी और वेतन निर्धारण जैसे लाभों के लिए गिना जाएगा।

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