टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया तो 48 घंटे में जारी हो गया कांस्टेबल का नियुक्ति आदेश, राजस्थान हाईकोर्ट में अवमानना कार्यवाही बंद

Rajasthan High Court Summons Niwai Municipal Chairman and EO, Orders Personal Appearance on October 26

168.8 सेंटीमीटर लंबाई होने के बावजूद समीक्षा मेडिकल बोर्ड के गठन में हुई थी देरी; जस्टिस अशोक कुमार जैन ने 13 अक्टूबर को अधिकारियों के रवैये को बताया था लापरवाह और अवज्ञापूर्ण, 15 अक्टूबर को नियुक्ति आदेश और वरिष्ठता की जानकारी पेश

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती के बाद कांस्टेबल भर्ती से जुड़े एक मामले में अभ्यर्थी सौरव को बड़ी राहत मिली है।

हाईकोर्ट की सख्ती और अधिकारियों को अंतिम मौका देते हुए अदालत द्वारा दिए गए 48 घंटे के भीतर ही याचिकाकर्ता की नियुक्ति के आदेश जारी हो गए।

गौरतलब है कि जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता सौरव की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार 13 अक्टूबर को अधिकारियों को अंतिम मौका दिया था।

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति और अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया था।

अदालत ने अधिकारियों के रवैये को लापरवाह और अवज्ञापूर्ण बताते हुए उन्हें 15 अक्टूबर तक याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने अथवा अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे।

कोर्ट की सख्ती के बाद गुरुवार 15 अक्टूबर को याचिकाकर्ता को न केवल समीक्षा मेडिकल बोर्ड द्वारा शारीरिक पात्रता के लिए योग्य घोषित किया गया, बल्कि राज्य सरकार ने उसके नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिए और अभ्यर्थी को उसकी मेरिट के अनुसार वरिष्ठता भी प्रदान की गई।

गुरुवार को जब अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई तो सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता भुवनेश शर्मा ने आदेश की पालना की जानकारी देते हुए नियुक्ति आदेश की जानकारी दी।

नियुक्ति आदेश व अन्य दस्तावेज रिकॉर्ड पर आने के बाद जस्टिस अशोक कुमार जैन ने अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी और अधिकारियों को जारी नोटिस डिस्चार्ज कर दिए।

मेडिकल रिपोर्ट में लंबाई 168.8 सेंटीमीटर, फिर भी समीक्षा बोर्ड के गठन में हुई देरी

याचिकाकर्ता सौरव ने कांस्टेबल भर्ती में शारीरिक पात्रता से जुड़े विवाद को लेकर पहले राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सौरव की याचिका पर हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 को आदेश दिया था, जिसके बाद अभ्यर्थी ने 29 दिसंबर 2025 को जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से अपनी जांच कराई थी।

मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उसकी लंबाई 168.8 सेंटीमीटर दर्ज की गई थी, जो शारीरिक पात्रता परीक्षा के लिए निर्धारित न्यूनतम मानक से अधिक बताई गई।

इसके बाद अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। इसके बावजूद समीक्षा मेडिकल बोर्ड का गठन 12 अक्टूबर 2026 को ही किया गया।

समीक्षा मेडिकल बोर्ड के गठन में हुई देरी के कारण अभ्यर्थी को अपने पक्ष में पहले से पारित न्यायिक आदेश की पालना के लिए अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

13 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर जताई थी नाराजगी

जस्टिस अशोक कुमार जैन ने 13 अक्टूबर 2026 को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि 28 सितंबर 2026 को समन्वय पीठ द्वारा दिए गए आदेशों के बावजूद संबंधित अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे और पालना रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई थी।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पालना रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय चाहिए, क्योंकि खंडपीठ स्पेशल अपील रिट को 25 अगस्त 2026 को खारिज कर चुकी थी।

हालांकि, अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि प्रतिवादी संख्या 2, 3 और 5 की अनुपस्थिति उनके लापरवाह और अवज्ञापूर्ण रवैये को दर्शाती है।

इसके बावजूद अदालत ने संबंधित अधिकारियों को अंतिम अवसर देते हुए 15 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

दो दिन बाद नियुक्ति आदेश के साथ अदालत पहुंचा विभाग

15 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि समीक्षा मेडिकल बोर्ड का गठन कर अभ्यर्थी की जांच कराई गई।

बोर्ड ने उसे कांस्टेबल पद पर नियुक्ति के लिए पात्र पाया। इसके बाद 15 अक्टूबर को ही नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया।

धौलपुर के पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा उठाई गई आपत्तियों का बोर्ड की कार्यवाही में समाधान कर दिया गया है और अभ्यर्थी को उसकी मेरिट के अनुसार उचित वरिष्ठता दी गई है।

इस प्रकार, 13 अक्टूबर को अंतिम अवसर दिए जाने के बाद 15 अक्टूबर की सुनवाई में नियुक्ति आदेश और अनुपालन की जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दी गई।

वरिष्ठता मिलेगी, लेकिन वास्तविक सेवा लाभ ड्यूटी ज्वाइन करने से

सुनवाई के दौरान वरिष्ठता और सेवा लाभों के संबंध में भी राज्य सरकार का पक्ष अदालत के सामने रखा गया।

पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान के अनुसार, अभ्यर्थी को उसके तत्काल कनिष्ठ अभ्यर्थी को वास्तविक लाभ मिलने की तारीख से काल्पनिक सेवा लाभ (Notional Benefits) मिलेंगे, जबकि वास्तविक सेवा लाभ (Actual Benefits) उसे ड्यूटी ज्वाइन करने की तारीख से प्राप्त होंगे।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

15 अक्टूबर के आदेश में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दी गई अनुपालन संबंधी जानकारी को रिकॉर्ड पर लिया।

अतिरिक्त महाधिवक्ता भुवनेश शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को शीघ्र न्याय दिलाने के प्रयास किए गए हैं और हाईकोर्ट के आदेश की अक्षरशः तथा उसकी भावना के अनुरूप पालना की गई है।

अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता भुवनेश शर्मा द्वारा दी गई सहायता की सराहना की।

इसके बाद जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कहा कि सरकार की पालना रिपोर्ट को देखते हुए अवमानना की कार्यवाही बंद की जाती है और नोटिस डिस्चार्ज किए जाते हैं।

सबसे अधिक लोकप्रिय