जयपुर। इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल ब्रांड क्रोमा (Croma) को खराब एयर कंडीशनर की आपूर्ति और उपभोक्ता की शिकायत का संतोषजनक समाधान नहीं करने के मामले में जयपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से बड़ा झटका लगा है।
आयोग ने उपभोक्ता शालिनी सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए क्रोमा को खराब AC वापस लेने और उसकी खरीद राशि ₹28,491 पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही सेवा में कमी, लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार के कारण हुई मानसिक परेशानी तथा परिवाद व्यय के लिए ₹11,000 का जुर्माना लगाया हैं.
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जयपुर तृतीय के अध्यक्ष देवेंद्र मोहन माथुर और सदस्य पवन कुमार भारद्वाज ने परिवाद पेश होने के तीन माह के भीतर गुरूवार 15 अक्टूबर को फैसला सुनाया हैं.
परिवाद 7 जुलाई 2026 को प्रस्तुत किया गया था। इस तरह करीब तीन महीने में मामले का फैसला हुआ।
पहले दिन से ही ठीक से कूलिंग नहीं कर रहा था AC
अधिवक्ता उदित किरोड़ी के अनुसार, शालिनी सिंह ने 17 अप्रैल 2026 को क्रोमा से 1.5 टन का इन्वर्टर AC खरीदा था।
इसकी कीमत ₹28,490.50 थी। AC का इंस्टॉलेशन 20 अप्रैल 2026 को उनके निवास पर किया गया, लेकिन शिकायत के अनुसार स्थापना के पहले दिन से ही AC पर्याप्त कूलिंग नहीं कर रहा था।
परिवादिया ने कई बार कंपनी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
आयोग के समक्ष यह भी बताया गया कि तकनीकी जांच में गैस लीकेज की समस्या सामने आई थी। इसके बावजूद उपभोक्ता की परेशानी दूर नहीं हो सकी।
वारंटी में भी विजिटिंग, सर्विस और गैस रिफिलिंग चार्ज मांगने का आरोप
परिवादिया का आरोप था कि AC वारंटी अवधि में होने के बावजूद उनसे विजिटिंग चार्ज, सर्विस चार्ज और गैस रिफिलिंग चार्ज की मांग की गई।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति की हाल ही में हार्ट सर्जरी हुई थी और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्हें नियंत्रित एवं ठंडे वातावरण में रहने की आवश्यकता थी।
खराब AC के कारण परिवार को गंभीर असुविधा और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
शालिनी सिंह ने 14 मई 2026 को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन उनके अनुसार समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
क्रोमा ने क्या दलील दी?
कंपनी ने अपने जवाब में आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि तकनीकी जांच में गैस लीकेज सामने आने के बाद गैस भरने की पेशकश की गई थी।
कंपनी के अनुसार, लगातार लीकेज की समस्या बनी रहने पर उत्पाद बदलने का आश्वासन भी दिया गया था।
कंपनी ने यह भी दावा किया कि 24 जून 2026 को बातचीत के बाद परिवादिया ने AC बदलने के प्रस्ताव को स्वीकार किया था।
क्रोमा ने आयोग से परिवाद खारिज करने का आग्रह किया।
हालांकि, आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद उपभोक्ता को राहत देने का निर्णय किया।
आयोग ने ब्याज सहित पूरी खरीद राशि लौटाने का दिया आदेश
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि परिवादिया ने वर्तमान परिस्थितियों में खराब AC बदलने के बजाय उसकी कीमत वापस पाने की मांग की है।
आयोग ने इस आधार पर ₹28,490.50 की खरीद राशि को पूर्णांक में ₹28,491 मानते हुए 17 अप्रैल 2026 से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।
आदेश के अनुसार, कंपनी को खराब AC वापस लेना होगा और परिवादिया को उसकी खरीद राशि लौटानी होगी।
इसके अतिरिक्त, सेवा में कमी, लापरवाही एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के कारण हुई मानसिक परेशानी तथा परिवाद व्यय के लिए ₹11,000 का भुगतान भी करना होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित राशि का भुगतान आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर करना होगा। ऐसा नहीं करने पर देय संपूर्ण राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
उपभोक्ता शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और खराब उत्पाद मिलने पर प्रभावी राहत के मामले में आयोग का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण हैं.
मामले में आयोग ने केवल उत्पाद की कीमत लौटाने तक राहत सीमित नहीं रखी, बल्कि ब्याज और मानसिक परेशानी एवं परिवाद व्यय के लिए अतिरिक्त मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।