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हनुमानगढ़ विधायक गणेश राज बंसल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक, जांच में शामिल होना होगा

Rajasthan High Court Grants Major Relief to Hanumangarh MLA Ganesh Raj Bansal, Protects Him From Arrest
10 महीने पुरानी कथित धमकी के मामले में हाईकोर्ट ने कहा : 60 वर्षीय मौजूदा विधायक को जांच में शामिल होने का आदेश देते हुए गिरफ्तारी से सरंक्षण देना उचित

जोधपुर। हनुमानगढ़ विधायक गणेश राज बंसल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

हाईकोर्ट ने विधायक के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 669/2026 के मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए विधायक की गिरफतारी पर रोक लगा दी हैं.

हाईकोर्ट ने विधायक को जांच में शामिल होने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के अगले आदेश के बिना उन्हें इस एफआईआर के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी।

जस्टिस आशुतोष कुमार की एकलपीठ ने विधायक गणेशराज बंसल की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 60 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक हैं और हनुमानगढ़ जिले के वर्तमान विधायक हैं।

ऐसे में एक 60 वर्षीय मौजूदा विधायक को जांच में शामिल होने का आदेश देते हुए गिरफ्तारी से सरंक्षण देना उचित हैं.

हालांकि, हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द नहीं किया है।

क्या है पूरा मामला?

गणेश राज बंसल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी।

हाल ही निकाय चुनावों के दौरान यह एफआईआर हनुमानगढ़ जंक्शन पुलिस थाने में दर्ज कि गयी थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351(3), 61(2) और 111(2)(b) के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं।

शिकायतकर्ता ऋछपाल सिंह खड़रा की ओर से आरोप लगाया गया कि 3 जनवरी 2026 को हनी बॉक्सर नामक व्यक्ति ने उन्हें फोन कर जान से मारने की धमकी दी थी।

आरोप के अनुसार, यह धमकी विधायक गणेश राज बंसल की ओर से दी गई थी।

विधायक की ओर से हाईकोर्ट में इन आरोपों के आधार पर दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई।

धमकी के 10 माह बाद मुकदमा

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मुकेश माहेश्वरी और अधिवक्ता कुणाल उपाध्याय ने पैरवी की।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जिस कथित धमकी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया हैं वह 3 जनवरी 2026 को दिए जाने का आरोप है, जबकि संबंधित एफआईआर 7 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई।

इस प्रकार शिकायत दर्ज होने में लगभग नौ महीने का अंतर था, जिसे याचिकाकर्ता पक्ष ने करीब 10 महीने की देरी बताया।

विधायक की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि एफआईआर में स्वयं गणेश राज बंसल द्वारा शिकायतकर्ता को सीधे धमकी देने का आरोप नहीं है।

याचिकाकर्ता पक्ष ने दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इसी पृष्ठभूमि में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

पहले भी दर्ज FIR का दिया गया हवाला

विधायक की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायतकर्ता की ओर से पहले भी कई एफआईआर दर्ज कराई गई थीं।

याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, एफआईआर संख्या 624/2026 और 625/2026 को राजस्थान हाईकोर्ट की दूसरी पीठ ने 23 सितंबर 2026 को निरस्त कर दिया था। इन मामलों में गणेश राज बंसल भी आरोपी थे।

इसके अतिरिक्त, एफआईआर संख्या 641/2026 को चुनौती देने वाली याचिका में भी विधायक को गिरफ्तारी से संरक्षण मिलने की बात अदालत के समक्ष रखी गई।

इन तथ्यों के आधार पर याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया कि मौजूदा एफआईआर भी लंबे समय से चले आ रहे विवाद का हिस्सा है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार और शिकायतकर्ता ने किया विरोध

विधायक की याचिका का राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से विरोध किया गया।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी तथा शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सरस्वत ने पैरवी की।

विरोध करते हुए कहा गया कि विधायक के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं और शिकायतकर्ता का बयान अभी दर्ज किया जाना बाकी है। ऐसे में याचिकाकर्ता को इस स्तर पर राहत नहीं दी जानी चाहिए।

शिकायतकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के M/s Neeharika Infrastructure Pvt. Ltd. v. State of Maharashtra & Ors. मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। इसके अलावा, विधायक के खिलाफ आरोपों से संबंधित समाचार पत्रों की कतरनें अदालत के समक्ष रखी गईं।

गिरफतारी पर रोक

दोनों पक्षों बहस और दलीलें सुनने बाद जस्टिस आशुतोष कुमार की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की 60 वर्ष की आयु तथा वर्तमान विधायक होने के तथ्य को देखते हुए, उन्हें जांच में शामिल होने के आदेश देते हुए गिरफतारी पर रोक लगा दी हैं.

आठ सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले को आठ सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इस दौरान विधायक को जांच में शामिल होना होगा और उनके खिलाफ गिरफ्तारी संबंधी संरक्षण अदालत के अगले आदेश के अधीन रहेगा।

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