जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक मामलों की फाइलों के रखरखाव में आ रही दिक्कतों के चलते अपने ही पुराने आदेश का एक हिस्सा वापस ले लिया है।
5 अगस्त 2026 को दिए गए निर्देश में सभी अर्जियों को अलग फोल्डर में रखकर मुख्य केस की फाइल के साथ अलग से जोड़ने को कहा गया था।
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से इस निर्देश को वापस लेने के लिए अर्जी दायर की गई थी। प्रशासन ने बताया कि अलग फोल्डर में अर्जियां रखने से न्यायिक फाइलों के रखरखाव में दिक्कतें आ रही थीं।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने हाईकोर्ट प्रशासन की रिट विविध अर्जी स्वीकार करते हुए 5 अगस्त के आदेश का पहला पैराग्राफ वापस ले लिया।
यह मामला मूल रिट याचिका ‘नाथा राम बनाम राजस्थान सरकार‘ से जुड़ा है, जिसका पहले ही निस्तारण हो चुका था। हाईकोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि राज्य सरकार को पुराने आदेश से कोई आपत्ति नहीं थी।
हाईकोर्ट की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. सचिन आचार्य के साथ अधिवक्ता चयण बोथरा ने पक्ष रखा।
नाथा राम केस में क्या दिया गया था आदेश?
हाईकोर्ट की एक बेंच ने 5 अगस्त 2026 को निर्देश दिया था कि कोर्ट में दायर सभी अर्जियों को अलग फोल्डर में रखा जाए।
इस फोल्डर को संबंधित मुख्य केस की फाइल के साथ अलग से जोड़ा जाना था। यानी मुख्य मामले से जुड़ी अर्जियों को मूल फाइल में रखने के बजाय एक अलग फोल्डर में व्यवस्थित करने की व्यवस्था बनाई गई थी।
हाईकोर्ट प्रशासन ने की आदेश वापस लेने की मांग
बाद में राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से ही इस आदेश के पहले पैराग्राफ को वापस लेने के लिए आवेदन दायर किया गया। हाईकोर्ट प्रशासन ने इस व्यवस्था को जारी रखने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को आदेश वापस लेने की वजह बताया।
अलग फोल्डर बनाने से क्या-क्या परेशानी हो रही थी?
हाईकोर्ट की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट डॉ. सचिन आचार्य ने कोर्ट को बताया कि सभी अर्जियों को अलग-अलग फोल्डर में रखने से न्यायिक फाइलों का रखरखाव मुश्किल हो रहा था।
इससे दस्तावेजों को बार-बार संभालने, उनकी जांच करने, संकलन करने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में दोहराव हो रहा था। इस व्यवस्था से फाइलों के रखरखाव में अतिरिक्त प्रशासनिक काम बढ़ रहा था।
हाईकोर्ट की ओर से यह भी बताया गया कि मूल रिट याचिका ‘नाथा राम बनाम राजस्थान सरकार’ का निस्तारण पहले ही हो चुका है। राज्य सरकार भी इस आदेश से प्रभावित पक्ष नहीं थी और उसे पुराने निर्देश पर कोई आपत्ति नहीं थी।
ऐसे में हाईकोर्ट प्रशासन ने अर्जियों को अलग फोल्डर में रखने का निर्देश वापस लेने की मांग की।
हाईकोर्ट ने 1952 के नियमों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायिक फाइलों का रखरखाव और उन्हें व्यवस्थित करने की प्रक्रिया High Court of Judicature for Rajasthan Rules, 1952 के तहत संचालित होती है।
हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि 5 अगस्त का आदेश हाईकोर्ट प्रशासन को सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित किया गया था।
इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने पुराने आदेश के पहले पैराग्राफ को वापस लेना उचित माना। इसी पैराग्राफ में सभी अर्जियों को अलग फोल्डर में रखने और उसे मुख्य केस की फाइल से अलग जोड़ने का निर्देश दिया गया था।
हाईकोर्ट ने वापस लिया आदेश का पहला पैराग्राफ
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने हाईकोर्ट प्रशासन की अर्जी स्वीकार कर 5 अगस्त 2026 के आदेश का पैराग्राफ नंबर 1 वापस ले लिया। इसके साथ ही रिट विविध अर्जी का निस्तारण कर दिया गया।
यह आदेश न्यायिक फाइलों के रखरखाव और कोर्ट की प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा है। इसमें मूल रिट याचिका नाथा राम बनाम राजस्थान सरकार के विवाद पर कोई नया फैसला नहीं दिया गया है। इस आदेश का मुख्य मुद्दा अर्जियों को अलग फोल्डर में रखने की व्यवस्था और उससे जुड़ी प्रशासनिक कठिनाइयां थीं।