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National Workshop on New Criminal Laws: अंतरराष्ट्रीय कानून और क्रिमिनल लॉ में नई पहचान डॉ.अश्वथी मधुकुमार का कार्यशाला में होगा विशेष सत्र

जयपुर, 2 अक्टूबर

नए अपराधिक कानूनों पर आगामी 11 अक्टूबर को जयपुर में आयोजित होने वाली “नेशनल वर्कशॉप ऑन न्यू क्रिमिनल लॉज़” के वक्ता के रूप में एक ओर विधि​ विशेषज्ञ का नाम जुड़ा हैं.

मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. आर. वेंकटा राव के साथ ही इस कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय कानून और क्रिमिनल लॉ के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाने वाली बेंगुलूरू की डॉ.अश्वथी मधुकुमार भी विशेष सत्र को संबोधित करेगी.

बेंगलुरू की डीम्ड युनिवर्सिटी CHRIST में असिसटेंट प्रोफेसर डॉ. अश्वथी मधुकुमार को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, शरणार्थी कानून और क्रिमिनल लॉ के लिए विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता हैं.

उन्होने लॉ क्षेत्र में B.B.A, LL.B (Hons.), LL.M (Criminal Law) और Ph.D की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं. और UGC-NET भी उत्तीर्ण किया है.

डॉ. अश्वथी मधुकुमार देश के कई ख्यातनाम लॉ कॉलेज और युनिवर्सिटी में पढ़ा चुकी हैं. उन्होने SRM University, IIULER Goa और CHRIST University में कानून के अलग अलग विषय पढ़ाए हैं.

उनके शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं, जिसमें नए अपराध कानून, यूटनासिया और महिला अधिकार जैसे विषय शामिल हैं.

डॉ. आर. वेंकटा राव होंगे मुख्य वक्ता

गौरतलब हैं ​कि लीगल एजुकेशन संस्थान के तत्वावधान में 11 अक्टूबर को जयपुर में आयोजित होने वाली “नेशनल वर्कशॉप ऑन न्यू क्रिमिनल लॉज़” के मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. आर. वेंकटा राव होंंगे.

डॉ राव इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च गोवा के संस्थापक कुलपति हैं. यह विश्वविद्यालय बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट (पर्ल फर्स्ट) द्वारा 2022 में स्थापित किया गया था.

डॉ. राव पूर्व में NLSIU बेंगलुरु के कुलपति रह चुके हैं और उन्हें 45 वर्षों का शिक्षण एवं अनुसंधान का अनुभव है

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य देश में नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, व्याख्या और व्यवहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करना है.

साथ ही पुराने और नए विधानों के बीच के अंतर्संबंधों, न्यायिक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और व्यावसायिक अधिवक्ताओं के लिए यह कार्यशाला अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी.

कार्यशाला में लॉ स्टूडेंट, हाल ही ग्रेज्यूएट हुए लॉ स्टूडेंट, न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे लॉ स्टूडेंट, अधिवक्ता, कानूनी पेशेवर,शिक्षाविद् एवं प्रोफेसरगण, कानूनी शोधार्थी एवं रिसर्च स्कॉलर्स इसमें शामिल हो सकते हैं.

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