जयपुर, 30 अक्टूबर
राजस्थान सरकार ने प्रदेश में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए ‘राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलिजन एक्ट, 2025’ को लागू कर दिया है.
गृह विभाग ने इस कानून को लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
अब प्रदेश में बहला-फुसलाकर, धोखे से या लोभ-लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामले नए कानून के तहत दर्ज होंगे.
इन मामलों में जमानत नहीं मिलेगी और अलग-अलग श्रेणियों में कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।
लव जिहाद पर 20 साल की सजा
नए कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति प्रेम विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो यह अपराध ‘लव जिहाद’ की श्रेणी में माना जाएगा.
ऐसे मामलों में 20 साल तक की सजा और भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा.
कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की गई शादी को कोर्ट से रद्द (शून्य) करवाया जा सकेगा.
बिना अनुमति धर्म परिवर्तन नहीं संभव
नए कानून के तहत अब कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो उसे प्रशासन की अनुमति लेना अनिवार्य होगा.
धर्म परिवर्तन से कम से कम 90 दिन पहले संबंधित व्यक्ति को कलेक्टर या एडीएम को सूचना देनी होगी.
धर्म परिवर्तन कराने वाले धर्माचार्य या संस्था को भी दो महीने पहले मजिस्ट्रेट को नोटिस देना होगा.
इसके बाद प्रशासन सूचना को नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करेगा और 60 दिनों तक आपत्तियाँ आमंत्रित करेगा.
किसी भी आपत्ति पर सुनवाई और निपटारे के बाद ही धर्म परिवर्तन को मंजूरी दी जाएगी.
सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भवन होंगे ध्वस्त
कानून में पहली बार यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई संस्था या संगठन सामूहिक धर्म परिवर्तन कराता है तो उस पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
ऐसी संस्थाओं के भवनों को सील या ध्वस्त किया जा सकेगा, बशर्ते कि भवन अवैध रूप से निर्मित या नियमों का उल्लंघन करने वाला पाया जाए.
स्थानीय निकाय और प्रशासन जांच के बाद ही ऐसी कार्रवाई कर सकेंगे. अगर किसी परिसर में सामूहिक धर्म परिवर्तन कराया गया है, तो उस संपत्ति को जब्त किया जाएगा।
‘घर वापसी’ धर्म परिवर्तन नहीं
कानून में स्पष्ट किया गया है कि ‘घर वापसी’, यानी अपने मूल पैतृक धर्म में वापसी, को धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा.
इसके अलावा, जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में आजीवन कारावास (life imprisonment) तक की सजा का प्रावधान रखा गया है.
कठोर दंड का प्रावधान
नए कानून में यह भी कहा गया है कि किसी भी धर्म परिवर्तन के मामले में जमानत नहीं दी जाएगी.
अलग-अलग श्रेणियों के अपराधों के लिए 3 साल से लेकर 20 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है. साथ ही, ऐसे मामलों की जांच राजपत्रित अधिकारी या उससे उच्च पदाधिकारी द्वारा ही की जाएगी.