लीगल सर्विस डे पर सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन, देशभर के न्यायाधीश रहे मौजूद
नई दिल्ली, 9 नवंबर
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस पर आज देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में “कानूनी सहायता तंत्र को सशक्त बनाना” (Strengthening Legal Aid Delivery Mechanism) विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ।
सम्मेलन में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, देशभर के हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीश और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairpersons) मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए समारोह को संबोधित किया।
समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मेलन “न्याय के लोकतंत्रीकरण” की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने कहा —
“जब न्याय सभी के लिए सुलभ हो, समय पर मिले और हर व्यक्ति तक उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना पहुँचे — तभी यह सही मायने में सामाजिक न्याय कहलाता है।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य स्तर पर कार्यरत विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSAs) न्यायपालिका और आम नागरिक के बीच एक सशक्त सेतु की भूमिका निभा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में लोक अदालतों और मुकदमे-पूर्व सुलह के माध्यम से लाखों मामलों का शीघ्र और सुलभ समाधान हुआ है।
उन्होंने बताया कि Legal Aid Defence Counsel System (LADCS) के तहत केवल तीन वर्षों में लगभग 8 लाख आपराधिक मामलों का निस्तारण किया गया है।
उन्होंने कहा — “Ease of Doing Business” और “Ease of Living” तभी संभव है जब देश में “Ease of Justice” भी सुनिश्चित हो।
कानूनी सहायता किसी दान का कार्य नहीं – CJI
राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा कि न्याय तक पहुंच केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता किसी दान का कार्य नहीं, बल्कि शासन का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो देश के हर नागरिक तक कानून की पहुंच सुनिश्चित करता है।
जस्टिस गवई ने कहा — “हमारी प्रगति केवल नीतियों से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव से मापी जाती है।” उन्होंने सुझाव दिया कि NALSA और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर सामाजिक ऑडिट कराना चाहिए ताकि कानूनी योजनाओं का प्रभाव जमीन पर आंका जा सके।
उन्होंने पैरालीगल वॉलंटियर्स और पैनल वकीलों के समय पर भुगतान और प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की।
जस्टिस गवई ने कहा — “कानूनी सहायता आंदोलन हमारे संविधान की आत्मा का जीवंत प्रतीक है; हमें इसे और मजबूत व समावेशी बनाना होगा।”

5 सत्र आयोजित किए गए
सम्मेलन के दौरान पूरे दिन में कुल पाँच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, सत्रों में कानूनी सहायता की सुलभता, न्याय तक पहुँच की पहल तथा संस्थागत सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इनमें Legal Aid Defence Counsel System (LADCS), Panel Lawyers, Para Legal Volunteers (PLVs), Permanent Lok Adalats (PLAs) और Legal Services Institutions के Financial Management पर गहन चर्चा हुई।
अंतिम सत्र को नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस सूर्यकांत ने संबोधित किया.

समापन सत्र में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नालसा अब हर नागरिक तक न्याय पहुँचाने के लिए डिजिटल और सामुदायिक दोनों माध्यमों का प्रयोग कर रहा है। इस अवसर पर LADCS Dashboard का भी शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम के अंत में जस्टिस विक्रम नाथ ने देशभर से आए प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापित किया.
इस सत्र के दौरान राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सदस्य सचिव डॉ. हरीओम शर्मा अत्री ने जस्टिस सूर्यकांत का स्वागत किया।
ACJ रहे मौजूद
लीगल सर्विस डे पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित हुई इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेस में राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा, राजस्थान हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के एक्जीक्यूटीव चैयरमेन जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस पी एस भाटी मौजूद रहें.
कॉन्फ्रेस में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ हरीओम शर्मा अत्री सहित रालसा की टीम भी मौजूद रही
राजस्थान की हुई तारीफ़
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस पर आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RLSA) की जमकर तारीफ़ की गई।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में रालसा को कई योजनाओं में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
खास तौर पर मीडिएशन (मध्यस्थता) को लेकर चलाए गए अभियान में राजस्थान अब तक देश में प्रथम स्थान पर है, जिसके लिए सम्मेलन में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सराहना की गई।

प्रचार-प्रसार और लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) में राजस्थान द्वारा अपनाया गया मॉडल भी देश में प्रथम स्थान पर रहा है।
इसके साथ ही राजस्थान स्थायी लोक अदालत के क्षेत्र में भी देश के शीर्ष चार राज्यों में शामिल रहा है।
इसके अलावा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर प्रदेश में लागू की गई कई राष्ट्रीय योजनाओं में राजस्थान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।