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जयपुर में वंडरलैंड पार्क के पास खुले कचरा डिपो पर NGT सख्त : राज्य सरकार, जिला कलेक्टर और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से मांगी रिपोर्ट

NGT Takes Strict Action on Open Garbage Depot Near Wonderland Park Jaipur; Govt, Collector & PCB Asked to Submit Report

भोपाल/जयपुर, 11 नवम्बर 2025

राजधानी जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में वंडरलैंड पार्क के पास करीब 15,000 वर्गमीटर क्षेत्र में बनाए गए ओपन गार्बेज डिपो (खुले कचरा भंडारण स्थल) पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है।

NGT की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने इस मामले को पर्यावरण के लिए बड़ा नुकसान मानते हुए राज्य सरकार, जयपुर जिला कलेक्टर और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

NGT के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह आदेश जयपुर निवासी सचिन ढाका व अन्य की ओर से दायर याचिका पर दिए हैं।

ट्रांसफर केंद्र बनाया गया

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सरा एस. शर्मा और शुभम सोनी ने पैरवी करते हुए NGT को बताया कि जयपुर नगर निगम ने मानसरोवर क्षेत्र के वंडरलैंड पार्क के पास लगभग 15,000 वर्गमीटर क्षेत्र में एक बड़ा खुला कचरा भंडारण केंद्र (Garbage Depot) बना रखा है।

यहां आधे जयपुर का कचरा लाकर जमा किया जाता है, जिसे बाद में ट्रकों के माध्यम से शहर के बाहरी इलाके स्थित लैंडफिल साइट पर ले जाया जाता है।

याचिका में कहा गया कि यह स्थान नगर निगम द्वारा “ट्रांसफर प्वाइंट” घोषित कर दिया गया है, जबकि यह घनी आबादी वाली रेजिडेंशियल कॉलोनी, पेयजल टैंकों और द्रव्यवती नदी के बिल्कुल पास स्थित है।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र की विशेष भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां पर कचरा एकत्र करने की अनुमति एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से भी ली जानी चाहिए थी, क्योंकि यह जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक स्थित है, लेकिन ऐसी कोई स्वीकृति नहीं ली गई।

संक्रमण और प्रदूषण का खतरा

याचिका में दावा किया गया कि यह ओपन गार्बेज डिपो पब्लिक पार्क और पानी की टंकी के पास होने के कारण संक्रमण और दुर्गंध का केंद्र बन चुका है.

आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को दमा, एलर्जी और श्वसन संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में कहा गया कि कभी-कभी नगर निगम के कर्मचारी या निजी सफाई ठेकेदार यहां कचरे को जला देते हैं, जिससे गंभीर वायु प्रदूषण होता है.

इसके साथ ही, इस स्थान पर अवैध अतिक्रमण भी हो रहा है और भूमि का उपयोग सार्वजनिक उद्देश्य के विपरीत किया जा रहा है.

NGT ने जताई चिंता, कमेटी गठित

NGT ने माना कि यह मामला न केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का उल्लंघन है, बल्कि यह नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है.

NGT ने इस मामले की संपूर्ण वास्तविक स्थिति जानने के लिए एक संयुक्त समिति (Joint Committee) गठित करने का आदेश दिया है.

Joint Committee में शहरी विकास एवं आवासन विभाग (UDH) के प्रधान सचिव का प्रतिनिधि, जयपुर जिला कलेक्टर का प्रतिनिधि, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) के सदस्य सचिव शामिल होंगे.

यह समिति मौके पर जाकर निरीक्षण (Site Visit) करेगी और यह देखेगी कि कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया कैसे हो रही है, क्या पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा रहा है, और आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कितना बढ़ा है।

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समन्वय और लॉजिस्टिक सहयोग के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। समिति को छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट NGT को ईमेल के जरिए भेजने के आदेश दिए गए हैं।

अगली सुनवाई 12 जनवरी 2026 को

NGT ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने और छह सप्ताह में विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

NGT ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 जनवरी 2026 तय की है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट में उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित विभागों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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