जोजरी नदी प्रदूषण मामले में राजस्थान सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, फैसला सुरक्षित
नई दिल्ली, 17 नवंबर।
जोजरी नदी प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कड़ी टिप्पणियां की हैं।
नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर Supreme Court ने गंभीर चिंता जताते हुए राजस्थान को Pathetic Failure कहा है.
स्वप्रेणा प्रसंज्ञान से दायर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार प्रदूषण पर रोक लगाने और जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट और रिकॉर्ड पेश किया।
Supreme Court ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए फैसला 21 नवंबर के लिए सुरक्षित रखते हुए कहा कि वह NGT के आदेश से भी आगे जाकर कड़े निर्देश दे सकती है।
जमीनी हकीकत भयावह
Supreme Court ने जोजरी, बांडी और लूणी नदी में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण के मामले में विफल रहा है.
Supreme Court ने कहा कि जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र में करीब 20 लाख लोग औद्योगिक प्रदूषण की मार झेल रहे हैं, और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है-
कोर्ट ने कहा कि वर्षों की सुनवाई के बाद भी हालात बद से बदतर हो गए हैं।
कोर्ट ने कहा:
“जमीनी हकीकत इतनी भयावह है कि हमें NGT के आदेश से भी आगे बढ़कर कुछ करना होगा… यह बहुत अलार्मिंग है।”
अदालत ने संकेत दिया कि वह पर्यावरण रक्षा के लिए अब और सख्त, समयबद्ध और बाध्यकारी विस्तृत आदेश जारी कर सकती है।
सरकार की दलील
सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने Supreme Court में RIICO और नगरपालिका निकायों पर लगे 2 करोड़ रुपये के जुर्माने पर रोक लगाने का अनुरोध किया।
जिस पर Supreme Court ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि CETPs को बाईपास करते हुए गंदा पानी सीधे नदियों में डाला जा रहा है, तो ऐसे में किस आधार पर दंड माफ करें?
अदालत ने कहा कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में CETP (कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को बाईपास कर कच्चा रसायनिक कचरा सीधे नदियों में बहाया जा रहा है।
इसके जवाब में सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि राज्य अब NGT के सभी सकारात्मक आदेशों का ईमानदारी से पालन करेगा।
21 नवंबर को फैसला
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार कई दशक पुराने इस संकट को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के साथ पूर्ण सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के रुख पर कहा कि अदालत केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ज़मीन पर सुधार देखना चाहती है।
सभी पक्षों की सुनवाई के बाद Supreme Court ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। संभवत: सुप्रीम कोर्ट आगामी 21 नवंबर को विस्तृत आदेश सुना सकता है।