जयपुर, 24 नवंबर
Rajasthan Highcourt ने ग्राम पंचायत भींचरी के सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ जारी रिकवरी नोटिस को रद्द करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है।
Highcourt ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी व्यक्ति के खिलाफ सुनवाई किए बिना प्रतिकूल फैसला नहीं दे सकती।
जस्टिस संजीत पुरोहित ने सीकर के हरसा बाड़ा की तत्कालीन सरपंच अरुणा देवी और ग्राम विकास अधिकारी बनवारी लाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील पेश करते हुए कहा कि जांच उस समय की गई जब सरपंच का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और ग्राम विकास अधिकारी भी सेवानिवृत्त हो चुके थे।
ऐसे में बिना सुनवाई कार्रवाई करना न्याय सिद्धांतों के विरुद्ध है।
पद से हटने के बाद जांच
मामला 17 जुलाई 2023 के रिकवरी नोटिस से जुड़ा था, जो तत्कालीन सरपंच अरुणा देवी और ग्राम विकास अधिकारी बनवारी लाल को वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर जारी किए गए थे।
ये नोटिस एक विभागीय जांच रिपोर्ट पर आधारित थे, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनौती देते हुए कहा कि पूरी जांच उनके पीछे से की गई और उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
सरकार ने नहीं किया खंडन
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश किया गया कि जांच विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर की गई थी, लेकिन सुनवाई के अवसर न देने के आरोप का खंडन नहीं किया गया।
कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि जांच कार्य एकतरफा (ex-parte) तरीके से की गई और याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
पक्ष रखने का अधिकार
Highcourt ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार किसी भी प्रतिकूल आदेश से पहले आरोपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा:
“बिना सुनवाई प्रतिकूल आदेश देना न्याय सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।”
हाईकोर्ट ने रोक लगाई
बिना सुनवाई के आधार पर जारी किए गए नोटिस को गलत बताते हुए हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2023 को जारी दोनों रिकवरी नोटिस और संबंधित जांच रिपोर्ट को निरस्त कर दिया और अधिकारियों को इन नोटिसों के आधार पर किसी भी प्रकार की वसूली करने से रोक दिया।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन चाहे तो नियमों के अनुसार नई जांच शुरू कर सकता है, बशर्ते कि याचिकाकर्ताओं को पूरा सुनवाई अवसर दिया जाए।