कोर्ट स्टे के बावजूद CO का ट्रांसफर करने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को लगाई कड़ी फटकार, डीजीपी को याचिकाकर्ता CO भूराराम खिलेरी की पुर्नबहाली के दिए आदेश
जोधपुर, 25 नवंबर
कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य के पुलिस विभाग द्वारा CO का Transfer करने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए CO की पुनर्बहाली का आदेश दिया है।
जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए दिए फैसले में कहा है कि प्रशासनिक मनमानी और न्यायिक आदेशों की अवहेलना किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एकलपीठ ने अपने आदेश में पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को “न्यायिक आदेशों के प्रति असम्मान और प्रशासनिक अव्यवस्था का उदाहरण” बताया।
यह मामला CO भूराराम खिलेरी से जुड़ा है, जो 14 अक्टूबर 2024 को बीकानेर महिला अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ से Transfer होकर भोपालगढ़ में पदस्थापित हुए थे।
कोर्ट कर सकता हैं हस्तक्षेप…
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि Transfer मूल रूप से एक प्रशासनिक कार्य है, जो सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रशासनिक आवश्यकता और विषय विशेषज्ञता के आधार पर तय होता है, और सामान्यतः कोर्ट ऐसे निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करता। किन्तु विधि का शासन और प्रशासनिक उचितता की आवश्यकताएँ सर्वोपरि हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि Transfer से जुड़ी न्यायिक समीक्षा का दायरा संकीर्ण अवश्य है, परंतु स्पष्ट रूप से परिभाषित भी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अबानी कांत रे बनाम राज्य ओडिशा, 1995 Supp (4) SCC 169 जैसे अनेक निर्णयों में माना है कि ट्रांसफर सेवा की सामान्य प्रक्रिया है और आम तौर पर न्यायिक जांच से मुक्त रहता है, जब तक यह सिद्ध न हो जाए कि आदेश दुर्भावना से प्रेरित है या फिर बाहरी तथा अप्रासंगिक कारकों से प्रभावित हो।
कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है अगर…
हाईकोर्ट ने कहा कि जब ट्रांसफर वैधानिक या प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करता है, या स्पष्ट मनमानी या गैरकानूनी प्रतीत होता है तो कोर्ट हस्तक्षेप करता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट प्रशासनिक बुद्धिमत्ता पर सवाल खड़ा करने के लिए हस्तक्षेप नहीं करता, बल्कि शक्ति के दुरुपयोग को रोकने, निष्पक्षता, वैधानिकता और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करता है।
कोर्ट के आदेश की अवहेलना में ट्रांसफर
कोर्ट ने कहा कि इस विषय से जुड़ा न्यायशास्त्र यह भी मानता है कि न्यायिक समीक्षा तब अनिवार्य हो जाती है जब ट्रांसफर आदेश कोर्ट के बाध्यकारी आदेश की अवहेलना में पारित किया गया हो या प्रासंगिक तथ्यों पर विचार किए बिना जारी किया गया हो, या दुरुपयोग (colourable exercise of power) का उदाहरण हो।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में भी ट्रांसफर का प्रशासनिक आदेश प्रशासनिक व्यवस्था में नहीं, बल्कि इस तथ्य में है कि पुलिस विभाग ने कोर्ट के 29 अक्टूबर 2024 के प्रभावी आदेश की अवहेलना करते हुए बिना विधिसंगत विचार के नए आदेश जारी कर दिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रशासनिक आचरण न केवल मनमानी को दर्शाते हैं, बल्कि फील्ड अधिकारियों के कार्य-निष्पादन में अनिश्चितता और अस्थिरता भी पैदा करते हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस या सार्वजनिक व्यवस्था जैसे संवेदनशील विभागों में ट्रांसफर और पदस्थापन से संबंधित आदेश जल्दबाजी या असावधानी में जारी नहीं किए जा सकते।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे आदेश जारी करने वाले अधिकारी को विचारपूर्वक, संवेदनशीलता के साथ और विधि के पूर्ण अनुपालन में कार्य करना चाहिए, जबकि वर्तमान मामले में इसका उल्टा परिलक्षित होता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस विभाग के आदेश कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं हैं और इन्हें याचिकाकर्ता के संदर्भ में निरस्त किया जाना आवश्यक है।
बीजेपी नेता की गिरफ्तारी से शुरू हुआ मामला
विभाग द्वारा सबसे पहले 7 अक्टूबर 2024 को बीकानेर से भोपालगढ़ CO के पद पर ट्रांसफर किया गया, जहाँ याचिकाकर्ता ने 14 अक्टूबर 2024 को कार्यभार ग्रहण किया।
कार्यभार ग्रहण करने के तीन दिन बाद 17 अक्टूबर 2024 को कुछ ग्रामीणों ने एक शिकायत प्रस्तुत की, जिसमें भाजपा नेता हेमंत शर्मा पर सोशल मीडिया पर जातिसूचक टिप्पणी पोस्ट करने और अशांति फैलाने की आशंका जताई गई।
जांच में पाया गया कि हेमंत शर्मा, जो एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, ने आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी और पुलिस को धमकी भी दी थी।
इस पर BNSS, 2023 की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई और शांति बनाए रखने हेतु भाजपा नेता को हिरासत में लिया गया।
17 अक्टूबर 2024 को सोशल मीडिया पोस्ट में कथित जातिसूचक टिप्पणी के मामले में भोपालगढ़ CO भूराराम खिलेरी के निर्देश पर भाजपा नेता को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के चार दिन बाद 21 अक्टूबर को पुलिस मुख्यालय ने खिलेरी को APO पर रखते हुए तुरंत जयपुर पुलिस मुख्यालय में रिपोर्ट देने का आदेश दिया।
इस आदेश के तहत 24 अक्टूबर 2024 को उन्हें भोपालगढ़ से कार्यमुक्त कर दिया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके विरुद्ध कोई शिकायत, विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित नहीं थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह आदेश किसी भी वैध और ठोस आधार से रहित था और केवल उन्हें भोपालगढ़ से हटाने के उद्देश्य से दंडात्मक कार्रवाई के रूप में जारी किया गया, जो राजस्थान सिविल सेवा नियम, 1951 के नियम 25-A के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक
CO भूराराम खिलेरी ने कार्यमुक्त करने के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी।
29 अक्टूबर 2024 को याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने विभाग के APO और relieving के दोनों आदेशों पर रोक लगा दी और कहा कि खिलेरी को तत्काल प्रभाव से भोपालगढ़ में कार्यभार ग्रहण करना होगा।
हाईकोर्ट का आदेश दरकिनार
फैसले के बावजूद पुलिस विभाग ने ऐसा नहीं किया।
इसके बजाय खिलेरी को जयपुर में ही रोके रखा गया और उन्हें पुष्कर मेले की ड्यूटी लगा दी गई – यह सीधे तौर पर अदालत के आदेश का उल्लंघन था।
हैरानी की बात तब सामने आई जब स्टे आदेश के बावजूद 1 नवंबर 2024 को CO भूराराम खिलेरी का एक नया ट्रांसफर आदेश जारी करते हुए उन्हें भोपालगढ़ से बांसवाड़ा भेज दिया गया।
भोपालगढ़ से ट्रांसफर कैसे?
हाईकोर्ट ने पूछा कि जब खिलेरी पहले ही जयपुर APO किए जा चुके थे तो भोपालगढ़ से ट्रांसफर का आदेश जारी करने का कोई तार्किक या प्रशासनिक औचित्य कैसे हो सकता है?
हाईकोर्ट ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह आदेश “बिना परिस्थिति समझे, बिना सोच-विचार के जारी किया गया।”
बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने विभाग के इस आदेश पर भी 6 नवंबर को रोक लगा दी।
पुलिस ने स्वेच्छा से नहीं किया सुधार
हाईकोर्ट ने कहा कि बार-बार आदेश के बावजूद विभाग ने स्वेच्छा से सुधार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि सुधारात्मक कार्रवाई केवल न्यायालय के दबाव के बाद ही की गई।
सरकार नहीं दे पाई स्पष्ट जवाब
सुनवाई में अतिरिक्त महाधिवक्ता ने विस्तृत जवाब देने के लिए समय माँगा, लेकिन समय मिलने के बावजूद सरकार स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई।
हाईकोर्ट का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग के 21 अक्टूबर, 24 अक्टूबर और 1 नवंबर 2024 के तीनों आदेश रद्द कर दिए।
हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया कि CO भूराराम खिलेरी को उनके मूल पद सर्कल ऑफिसर, भोपालगढ़ पर पुनः बहाल किया जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान CO भोपालगढ़, नेमीचंद, के लिए नया आदेश जारी किया जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता हो तो भविष्य में नया ट्रांसफर आदेश जारी किया जा सकता है, लेकिन यह नियम और प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए।