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राजस्थान हाई कोर्ट ने DGP को किया तलब, पॉक्सो मामलों की जांच पर उठाए सवाल

Rajasthan Cyber Crime Surge: 1.14 Lakh Cases in 10 Months, Youth Most Affected; High Court Issues Major Order

पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों में पुलिस निरीक्षक (Inspector) या उससे ऊपर के अधिकारी ही कर सकते हैं जांच

जयपुर, 25 नवंबर

राजस्थान हाई कोर्ट ने पॉक्सो से जुड़े संवेदनशील मामलों की जांच को लेकर राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को तलब किया है.

हाईकोर्ट ने आदेश दिया हैं कि वे 2 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में मौजूद रहें.

जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने आरोपी नितिन की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी से जुड़े मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, फिर भी जांच उच्च स्तर के अधिकारी को सौंपने के बजाय उप-निरीक्षक (SI) स्तर के अधिकारी को ही सौंपी गई, जिस पर अदालत ने गंभीर आपत्ति जताई.

अदालत ने जताई हैरानी

हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों में जांच अधिकारी का अनुभव और पद अत्यधिक महत्वपूर्ण है.

ऐसे मामलों में पुलिस निरीक्षक (Inspector) या उससे ऊपर के अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, ताकि निष्पक्ष और सक्षम जांच सुनिश्चित हो सके.

लेकिन इस मामले में वीडियो वायरल होने और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने के बावजूद जांच निचले स्तर के अधिकारी द्वारा की गई, जिस पर हाईकोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं.

DGP से मांगा स्पष्टीकरण

हाईकोर्ट ने आदेश दिया हैं कि राज्य के DGP इस स्थिति पर 2 दिसंबर तक अपना पक्ष प्रस्तुत करें और बताएं कि पॉक्सो जैसे अत्यंत संवेदनशील मामलों में जांच उचित स्तर के अधिकारियों को क्यों नहीं सौंपे जा रहे हैं.

जमानत पर सुनवाई

आरोपी नितिन की ओर से अधिवक्ता भरत यादव ने पक्ष रखा। जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य उजागर हुआ कि वीडियो वायरल है, परंतु जांच अपेक्षित रूप से वरिष्ठ स्तर पर नहीं की गई।

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