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हाईकोर्ट ने कहा मजिस्ट्रेट केजुअल तरीके से संज्ञान ले रहे, अकादमी उनके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाए, प्रशासनिक मामला मुख्य न्यायाधीश को रेफर।

Rajasthan High Court Quashes Jhunjhunu CJM’s Casual Cognizance Order in Cadila Pharma Case

झुंझुनू CJM का ‘नॉन-स्पीकिंग’ आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द, 4 सप्ताह में पुन: सुनवाई कर नया आदेश पारित करने के निर्देश।

जयपुर, 29 नवंबर

राजस्थान हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालतों में मजिस्ट्रेट द्वारा लिए जा रहे संज्ञान आदेशों में अपनाई जा रही प्रक्रिया और केजुअल तरीकों को लेकर चिंता जताते हुए महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि कई मामलों में संज्ञान आदेश बिना न्यायिक मस्तिष्क का उपयोग किए, सतही, औपचारिक और प्रोफॉर्मा तरीके से पारित किए जा रहे हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के विपरीत है।

जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने सीजेएम कोर्ट झुंझुनू द्वारा Cadila Pharmaceuticals Ltd. मामले में दिए गए प्रसंज्ञान आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनः मजिस्ट्रेट कोर्ट को भेज दिया है।

हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को आदेश दिया है कि वे केस में उपलब्ध सामग्री का परीक्षण कर, न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए 4 सप्ताह में नया, स्पष्ट और तर्कसंगत आदेश पास करें।

मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाए मामला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मामले को प्रशासनिक कार्यवाही के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष यह आदेश रखा जाए ताकि इस पर विचार किया जा सके कि क्या इस आदेश की प्रति राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों को उनके ई-मेल पते पर भेजी जाए, जिससे वे भविष्य में आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेते समय सावधानी बरतें।

प्रशिक्षण दिया जाए…

हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति राजस्थान न्यायिक अकादमी के निदेशक को भी भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में एक ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया जा सके जिसमें वे संज्ञान लेने से पूर्व अपने न्यायिक मस्तिष्क का उपयोग करें और भविष्य में इस तरह के आदेश पारित न करें।

ये है मामला

वर्ष 2012 में झुंझुनू जिले के ड्रग इंस्पेक्टर ने Cadila Pharmaceuticals की दवाओं के नमूने जांच हेतु लिए थे।

जांच के बाद प्रयोगशाला रिपोर्ट में नमूनों को मानक के अनुरूप नहीं पाया गया।

इसके बाद वर्ष 2015 में ड्रग कंट्रोल अधिकारी ने कंपनी, निदेशकों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्टॉकिस्टों के खिलाफ शिकायत दायर कर दी।

शिकायत के आधार पर झुंझुनू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने 22 मई 2015 को संज्ञान लेते हुए सभी के खिलाफ प्रक्रिया जारी कर दी।

याचिकाकर्ता Cadila Pharmaceuticals ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी कि संज्ञान आदेश नॉन-स्पीकिंग था और इसे बिना कारण बताए पारित किया गया।

याचिका में कहा गया कि Section 202 CrPC के अनुसार, यदि आरोपी अन्य राज्य में रहता है, तो मजिस्ट्रेट को अनिवार्य रूप से प्रारंभिक जांच करनी होती है, लेकिन इस मामले में संज्ञान लेने से पूर्व कोई जांच नहीं की गई और सीधे संज्ञान ले लिया गया।

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