Rajasthan High court ने कहा अवैध खनन जारी रहने पर संबंधित क्षेत्र के इंजीनियर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी
जोधपुर, 3 दिसंबर
प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे अवैध खनन पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरे प्रदेश में जारी सभी शॉर्ट टर्म माइनिंग परमिट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने यह आदेश आम जनता ग्राम आमला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
अवैध खनन को लेकर गंभीर शिकायतें
आम जनता ग्राम आमला की ओर से अधिवक्ता G.R. Punia और Sanjay Rewar ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार द्वारा जारी शॉर्ट टर्म परमिटों की अवधि समाप्त होने के बाद भी कई कंपनियां अवैध रूप से खनन कर रही हैं।
अधिवक्ताओं ने कहा कि खनन विभाग इन गतिविधियों पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं रख पा रहा, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में अवैध खनन बड़े पैमाने पर फैल गया है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि अवैध खनन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान, कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव, और राज्य के राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल महावीर बिश्नोई ने नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने हेतु समय मांगा।
गंभीर प्रशासनिक लापरवाही
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में शॉर्ट टर्म परमिट जारी करने की प्रक्रिया ही संदिग्ध प्रतीत होती है।
कोर्ट ने कहा कि अधिकांश मामलों में परमिट खत्म होने के बाद भी कंपनियां लगातार खनन जारी रखती रहीं और विभागीय स्तर पर निगरानी बेहद कमजोर रही।
High court ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए पूरे प्रदेश में सभी शॉर्ट टर्म माइनिंग परमिट निलंबित करने के आदेश दिए।
High court ने कहा कि अगले आदेश तक किसी भी शॉर्ट टर्म परमिट के आधार पर प्रदेश में खनन नहीं होगा।
अवैध खनन पकड़े जाने पर तत्काल कार्रवाई
High court ने आदेश दिया है कि जहां भी अवैध खनन पाया जाएगा, संबंधित पुलिस अधिकारी तुरंत खदान को सील करेंगे। खनन विभाग खदानों का नियंत्रण तुरंत अपने हाथ में लेकर अवैध खनन को पूरी तरह रोकेगा।
जिस क्षेत्र में अवैध खनन जारी मिला, वहां संबंधित इंजीनियर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
High court ने आदेश दिया है कि सभी माइनिंग इंजीनियरों को यह बताना होगा कि पिछले एक वर्ष में कितने शॉर्ट टर्म परमिट जारी किए, और उनकी अवधि समाप्त होने के बाद क्या कंपनियों ने अवैध खनन जारी रखा।