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181 पदों पर 2700 ने दी परीक्षा, केवल 4 हुए पास, APO भर्ती पर उठे सवाल, हाईकोर्ट में याचिका दायर

2696 अभ्यर्थी नही कर पाए APO मुख्य परीक्षा में न्यूनतम अर्हता प्राप्त, प्रत्येक प्रश्नपत्र में जरूरी था न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना

जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा हाल ही में आयेाजित कि गयी सहायक अभियोजन अधिकारी (Assistant Prosecution Officer – APO) भर्ती परीक्षा 2024 को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

181 पदों की भर्ती में मुख्य परीक्षा के चौकाने वाले परिणाम में परीक्षा देने वाले 2700 अभ्यर्थियो में से मात्र 4 अभ्यर्थी ही पास हो पाए है।.

10 दिसंबर 2025 को घोषित किए गए परिणाम ने विशेषज्ञों के साथ ही परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थियों को भी स्तब्ध कर दिया हैं, क्योंकि 181 पदों के मुकाबले केवल चार अभ्यर्थियों को ही सफल घोषित किया गया.

इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों में से मात्र चार का सफल होना न केवल अविश्वसनीय है, बल्कि यह पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

181 पदों पर भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया दो चरणों में होनी थी—प्रारंभिक परीक्षा और उसके बाद मुख्य परीक्षा.

प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने के बाद लगभग 2700 अभ्यर्थियों ने 1 जून 2025 को मुख्य परीक्षा में भाग लिया था, जिसका परिणाम एक सप्ताह पूर्व 10 दिसंबर को जारी किया गया.

सबसे खास बात ये हैं कि इस परीक्षा में वे अभ्यर्थी भी फेल हो गए हैं जो जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा 2025 जैसी अधिक कठिन परीक्षा में 40 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए.

इस भर्ती के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा में दो प्रश्नपत्र थे पहला, विधि (Law) का 300 अंकों का प्रश्नपत्र और दूसरा भाषा हिंदी एवं अंग्रेज़ी का 100 अंकों का प्रश्नपत्र.

विज्ञापन के अनुसार प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य था, जबकि भाषा प्रश्नपत्र का स्तर वरिष्ठ माध्यमिक (Senior Secondary) रखा गया था।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अनुसार 2700 में से 2996 अभ्यर्थियों ने इसी न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की शर्त को पुरा नहीं कर पाए हैं.

परीक्षा निरस्त करने की मांग

मुख्य परीक्षा परिणाम को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है.

सैकड़ो अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद के जरिए दायर कि गयी याचिका में में परीक्षा परिणाम को मनमाना, अव्यावहारिक और संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है

याचिकाकर्ताओं में कहा गया हैं कि कई अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा 2025 जैसी कहीं अधिक कठिन परीक्षा में 40 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, लेकिन APO मुख्य परीक्षा में वे न्यूनतम अर्हता अंक तक नहीं ला पाए.

इससे मूल्यांकन में त्रुटिपूर्ण मॉडल उत्तर, अत्यधिक कठोर अंकन, या बिना मॉडरेशन के यांत्रिक जांच की आशंका जताई गई है।

समानता और निष्पक्ष चयन के अधिकार का उल्लंघन

याचिका में आरोप लगाया गया कि आरपीएससी ने न तो मूल्यांकन की कोई पारदर्शी नीति सार्वजनिक की और न ही इतने कम सफल अभ्यर्थियों के पीछे कोई ठोस कारण बताया.

इससे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और निष्पक्ष चयन के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। साथ ही, 177 पदों का रिक्त रह जाना सार्वजनिक हित के भी विरुद्ध बताया गया है.

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है कि विवादित परिणाम को निरस्त किया जाए, मूल्यांकन प्रक्रिया को अवैध घोषित किया जाए और उत्तर पुस्तिकाओं का नया, निष्पक्ष और पारदर्शी पुनर्मूल्यांकन कराया जाए.

याचिका में अंतरिम राहत के रूप में परिणाम पर रोक और प्रत्येक याचिकाकर्ता के लिए एक पद रिक्त रखने का भी अनुरोध किया गया है.

मामला फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर पीठ के समक्ष विचाराधीन है और इस प्रकरण को राज्य की महत्वपूर्ण भर्तियों से जुड़े एक नजीरात्मक मामले के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाली सृष्टि सिंघल, हिना जैन, नीतिका सिंह, आलोक गोदारा, ऋतिका पारीक, विकास बसवाना, आस्था यादव, प्रियंका फौजदार, प्रवीन जहानारा, दीपक कुमार वर्मा, हरमन सिंह बाजवा, कृतिका शर्मा, दिलीप कुमार मीणा, सौरव कटारिया, अंजू, विजय कुमार मीणा, अमित मीणा, रोशन मीणा, वैभव पांडेय ​सहित कई अभ्यर्थियों न याचिकाए दायर की हैं.

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