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राज्य के नागरिकों से नहीं छीना जा सकता केवल तकनीकी आधारों पर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ- Rajasthan Highcourt

Technical Lapses Cannot Deny Welfare Benefits: Rajasthan High Court on Inter-Caste Marriage Scheme

अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना पर राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, ऑफलाइन आवेदन न लेने पर जताई नाराजगी

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और सामाजिक दृष्टि से दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल तकनीकी आधारों पर नागरिकों से छीना नहीं जा सकता।

अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही डॉ. सावित्रीबाई बेन अंबेडकर अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत लाभ पाने से वंचित एक दंपती को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन को संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का आदेश दिया हैं.

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से आनलाइन या आफलाइन आवेदन स्वीकार कर दो माह में लाभ देने के आदेश दिए हैं.

राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ जोधपुर के जस्टिस सुनील बेनीवाल ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रशासनिक सुविधा के लिए होती है, न कि नागरिकों के अधिकारों में बाधा डालने के लिए।

कोर्ट ने माना कि यदि किसी लाभार्थी के पास समय पर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न हों और उसने समय-सीमा के भीतर ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत किया हो, तो उसे केवल तकनीकी कारणों से योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता सरवजीत कौर और बलवीर सिंह, जिला हनुमानगढ़ निवासी हैं।

दोनों ने 28 दिसंबर 2022 को अंतरजातीय विवाह किया था। विवाह के बाद उन्होंने नियमानुसार विवाह प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया, जो उन्हें 21 नवंबर 2023 को प्राप्त हुआ।

याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य राज्य सरकार की डॉ. सावित्रीबाई बेन अंबेडकर अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का लाभ प्राप्त करना था।

योजना के प्रावधानों के अनुसार विवाह की तिथि से एक वर्ष के भीतर आवेदन करना आवश्यक है। इस आधार पर अंतिम तिथि 28 दिसंबर 2023 बनती थी।

जन आधार कार्ड बना बाधा

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि योजना के तहत आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किया जाता है और इसके लिए जन आधार कार्ड अनिवार्य है।

विवाह प्रमाण पत्र उन्हें बहुत देर से, यानी नवंबर 2023 में मिला, जिससे जन आधार कार्ड बनवाने के लिए उनके पास पर्याप्त समय नहीं बचा।

ऐसी स्थिति में, समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले, उन्होंने 26 दिसंबर 2023 को संबंधित विभाग में ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत किया।

हालांकि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों ने यह कहते हुए आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि योजना के अंतर्गत केवल ऑनलाइन आवेदन ही मान्य हैं।

कल्याणकारी योजनाओं में संवेदनशीलता जरूरी

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दुर्गेश खत्री ने पैरवी करते हुए अदालत से कहा कि याचिकाकर्ताओं ने विवाह की तिथि से एक वर्ष के भीतर आवेदन प्रस्तुत किया है.

अधिवक्ता ने कहा कि जन आधार कार्ड न होना जानबूझकर की गई चूक नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य बाधा थी

योजना का उद्देश्य अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना है, न कि तकनीकी औपचारिकताओं में उलझाकर लाभार्थियों को बाहर करना

उन्होंने तर्क दिया कि ऑनलाइन प्रक्रिया सुविधा का साधन है, लक्ष्य नहीं, और यदि वही प्रक्रिया बाधा बन जाए, तो प्रशासन को वैकल्पिक रास्ता अपनाना चाहिए।

राज्य सरकार की दलील, नीतिगत मामला

याचिका के जवाब में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि योजना में आवेदन की स्पष्ट प्रक्रिया तय है और आनलाइन आवेदन एक वर्ष की समय-सीमा में अनिवार्य है

सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन आवेदन नहीं किया, इसलिए वे योजना के लाभ के पात्र नहीं हैं

राज्य सरकार ने इसे नीति से जुड़ा मामला बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप न करने का आग्रह किया।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस सुनील बेनीवाल ने राज्य सरकार की दलीले खारिज करते हुए कहा कि—

“यह योजना एक कल्याणकारी और सामाजिक सुधार से जुड़ी योजना है। ऐसी योजनाओं की व्याख्या संकीर्ण तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उनके उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—

जन आधार कार्ड की अनुपलब्धता लाभ से वंचित करने का आधार नहीं बन सकती

जब यह तथ्य निर्विवाद है कि विवाह समय पर हुआ और आवेदन भी समय-सीमा के भीतर प्रस्तुत किया गया, तो केवल माध्यम (ऑनलाइन/ऑफलाइन) के आधार पर लाभ रोकना उचित नहीं है

हाईकोर्ट का आदेश

बहस सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता तीन दिन के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित नया ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करें.

याचिकाकर्ता का ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद विभाग 10 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेगा.

यदि किसी कारण से ऑनलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता है, तो याचिकाकर्ताओं को सात दिन के भीतर ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए

ऑफलाइन आवेदन मिलने पर विभाग 10 दिनों के भीतर उस पर निर्णय करे

यदि याचिकाकर्ता योजना की सभी शर्तें पूरी करते हैं, तो दो माह के भीतर उन्हें योजना का लाभ प्रदान किया जाए

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