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शराब की बोतलों पर सचित्र कैंसर चेतावनी अनिवार्य करने की मांग, राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर किया जवाब तलब

Rajasthan High Court Seeks Response from Centre and State on Pictorial Cancer Warnings on Alcohol Bottles

जयपुर। शराब की बोतलों और पैकेजिंग पर सचित्र (पिक्टोरियल) स्वास्थ्य चेतावनी अनिवार्य करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने सख्त रुख अपनाया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।

हाईकोर्ट ने भारत सरकार के सचिव, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, अध्यक्ष, FSSAI बोर्ड, मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार, प्रमुख सचिव एवं आयुक्त, आबकारी विभाग, राजस्थान को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे जनस्वास्थ्य, उपभोक्ता अधिकार और संवैधानिक संरक्षण से जुड़ा हुआ है।

याचिका का आधार

याचिकाकर्ता अवनीन्द्र मिश्रा की ओर से अधिवक्ता गीतेश जोशी ने याचिका दायर कर अदालत को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 16(5) तथा Food Safety and Standards (Alcoholic Beverages) Regulations, 2018 के नियम 5.12 को लागू करने की मांग की है।

अधिवक्ता ने कहा कि 27 अप्रैल 2018 को FSSAI द्वारा जारी अधिसूचना के तहत शराब के लेबल पर वैधानिक चेतावनी का प्रावधान किया गया, लेकिन स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा में चेतावनी और सचित्र कैंसर-सम्बंधित चेतावनी का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया कि नियमों में प्रयुक्त शब्द ‘may’ के कारण अनुपालन ढीला पड़ा है, इसलिए अदालत से ‘shall’ शब्द का प्रयोग कर इसे अनिवार्य करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि नियमों का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।

AIIMS वैज्ञानिक अध्ययन और जनस्वास्थ्य का मुद्दा

याचिका में AIIMS, नई दिल्ली के वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट्स द्वारा वर्ष 2025 में प्रकाशित अध्ययन का संदर्भ दिया गया है, जिसमें शराब सेवन को कई प्रकार के कैंसर—जैसे कोलन/रेक्टम, लिवर, ब्रेस्ट, इसोफेगस, लैरिंक्स, फैरिंक्स और ओरल कैविटी—से जोड़ा गया है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब तंबाकू उत्पादों पर बड़े और स्पष्ट पिक्टोरियल चेतावनी अनिवार्य हैं, तो शराब जैसे मादक पेय पदार्थों पर ऐसा न होना असंगत और भेदभावपूर्ण है।

अदालत में दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गीतेश जोशी ने अदालत को बताया कि केवल अंग्रेज़ी में सीमित चेतावनी देना अपूर्ण क्रियान्वयन है, क्योंकि बड़ी आबादी स्थानीय भाषा समझती है।

उन्होंने जोर दिया कि स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा में सचित्र चेतावनी उपभोक्ता को खरीद से पहले जोखिम समझने में मदद करेगी और सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगी।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता जसवंत परसोइया और वागीश शर्मा भी उपस्थित रहे।

याचिका में अनुरोध

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि शराब की बोतलों/पैकेजिंग पर कैंसर-सम्बंधित सचित्र चेतावनी और स्थानीय भाषा में स्वास्थ्य चेतावनी अनिवार्य की जाए।

शराब बिक्री स्थलों पर दुकानों के भीतर/बाहर पिक्टोरियल चेतावनी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं।

नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु स्पष्ट नियम बनाए जाएं। अंतरिम राहत के रूप में, याचिका के निर्णय तक बिना चेतावनी वाली शराब की बिक्री पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।

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