जयपुर, 29 नवंबर
जयपुर महानगर-प्रथम की ADJ Court संख्या 6 ने एक महत्वपूर्ण आदेश में लॉरेंस विश्नोई के भाई अनमोल विश्नोई से जुड़े गैंग को हथियार—पिस्टल सप्लाई करने के आरोपी कुनाल पाराशर उर्फ किट्टू की जमानत अर्जी को खारिज करने का आदेश दिया है।
कुनाल पाराशर पर आरोप है कि उसने गैंगस्टर हरी बॉक्सर और विदेश में सक्रिय गैंगस्टर अनमोल विश्नोई से जुड़कर प्रदेश के व्यापारियों और ज्वैलर्स को जान से मारने की धमकी दी और बड़ी फिरौती की मांग की है.
और इसके लिए गैंग के सदस्यों पिस्टल उपलब्ध कराई.
जज मुकेश परनामी ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया गंभीर आरोप प्रमाणित हैं और उसे इस स्तर पर राहत देना न्यायोचित नहीं होगा.
साइबर पुलिस ने किया था खुलासा
जयपुर की साइबर थाना पुलिस को जानकारी मिली थी कि लॉरेंस विश्नोई के भाई अनमोल विश्नोई की गैंग से जुड़े राजस्थान और पंजाब के गैंगस्टर मिलकर बड़े कारोबारियों से करोड़ों रुपये की फिरौती मांग रहे हैं.
मुखबिर की सूचना पर बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए साइबर पुलिस ने दो संदिग्ध—नेत्रपाल सिंह और मान बॉक्सर उर्फ मान प्रजापति—को हिरासत में लिया था।
साइबर पुलिस ने जब इन दोनों संदिग्धों की जांच की तो पाया कि वे हरी बॉक्सर के साथ व्हाट्सऐप और फेसबुक मैसेंजर पर लगातार चैटिंग कर रहे थे।
पुलिस को हरी बॉक्सर और अनमोल विश्नोई गैंग से जुड़े होने के संकेत मिले, और आगे की जांच में आरोपी कुनाल पाराशर का नाम भी सामने आया।
गैंग को दी पिस्टल
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी कुनाल को 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया.
पुलिस के अनुसार उसने हरी बॉक्सर के कहने पर सचिन बडौदिया को पिस्टल उपलब्ध कराई, जो अनमोल बिश्नोई गैंग के लिए काम कर रहा था.
पुलिस के अनुसार पिस्टल भरतपुर से 36,000 रुपये में खरीदकर लाई गई थी, जिसे आगे सचिन बडौदिया को दिया गया।
अनमोल विश्नोई गैंग के साथ मिलकर आपराधिक गिरोह में सक्रिय भूमिका होने के आधार पर पुलिस ने आईटी एक्ट, बीएनएस और आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया।
बचाव में दलील
आरोपी की ओर से अधिवक्ता नीतू साहनी ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और उसे केवल सह-आरोपी सचिन की सूचना के आधार पर फंसाया गया है।
अधिवक्ता ने कहा कि जिस साइबर अपराध की बात कही जा रही है, वह घटना ही नहीं हुई। साथ ही सह-आरोपी कर्मवीर शर्मा उर्फ सोनू को राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है, इसलिए समानता के आधार पर कुनाल पाराशर को भी राहत मिलनी चाहिए।
सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से एपीपी दिवाकर रावल ने कहा कि सह-आरोपी का मामला अलग है। कर्मवीर शर्मा पर सिर्फ एक कोरियर भेजने का आरोप था, जबकि कुनाल ने अवैध हथियार खरीदकर उपलब्ध कराया, जो संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाला कृत्य है।
सरकार ने कहा कि ऐसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए आरोपी को जमानत पर रिहा करना जनहित के विरुद्ध होगा।
अनमोल विश्नोई गैंग को दी पिस्टल
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जयपुर महानगर-प्रथम एडीजे कोर्ट संख्या 6 के जज मुकेश परनामी ने कहा कि आरोपी के लगातार आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के संकेत हैं और हथियार उपलब्ध कराना उसकी सक्रिय भूमिका दर्शाता है।
कोर्ट ने कहा कि साइबर थाना, जयपुर में दर्ज एफआईआर संख्या 115/2025 में संगठित अपराध, धमकी, अवैध हथियार उपलब्ध कराने और हरी बॉक्सर–अनमोल विश्नोई गिरोह से जुड़े होने के गंभीर आरोप पाए गए हैं।
जांच में साबित हुआ कि आरोपी ने भरतपुर से 36,000 रुपये में अवैध पिस्टल खरीदकर सह-आरोपी को दी है।
अदालत ने कहा कि उसका मामला सह-अभियुक्त से अलग और अधिक गंभीर है।
जज मुकेश परनामी ने अपराध की प्रकृति, साक्ष्य और अपराध नेटवर्क में सक्रिय भूमिका को देखते हुए जमानत याचिका को खारिज करने का आदेश दिया है।