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थ्री डिजिट घोटाला: 500 करोड़ के वीआईपी नंबर घोटाले के आरोपी की जमानत खारिज

जयपुर, 20 सितंबर।

जयपुर परिवहन विभाग में 500 करोड़ के वीआईपी नंबर के घोटाले में आरोपी सुरेश कुमार तनेजा की जमानत अर्जी को जयपुर की अदालत ने खारिज कर दिया है।

अपर सेशन न्यायाधीश क्रम-5, जयपुर महानगर-प्रथम डॉ. मनोज जोशी ने आदेश पारित करते हुए कहा कि आरोपी पर परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने का आरोप है।

अदालत ने कहा कि आरोपी तनेजा ने बैकलॉग एंट्री, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और वाहन पंजीयन में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचाया।

मामले की गंभीरता और जांच लंबित होने के चलते अदालत ने उन्हें जमानत का लाभ देने से इनकार किया।

आरोपी सुरेश तनेजा इस समय न्यायिक अभिरक्षा में जेल में हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस स्तर पर जमानत उचित नहीं है।

60 वर्षीय आरोपी सुरेश कुमार तनेजा पर परिवहन विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचाने का आरोप है।

गांधीनगर पुलिस स्टेशन, जयपुर में दर्ज एफआईआर संख्या 96/2025 के अनुसार, तनेजा पर दलालों के साथ मिलकर वाहनों के फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने का आरोप है।

रामजीलाल की अग्रिम जमानत खारिज

अदालत ने इसके साथ ही दूसरे आरोपी रामजीलाल की भी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया हैं.

रामजीलाल ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया हैं.

अब पुलिस इस मामले में रामजीलाल को पूछताछ के लिए गिरफतार कर सकती हैं.

ये है मामला

परिवहन विभाग में बैकलॉग दिखाकर वाहनों की पंजीयन संख्या में भारी अनियमितता की गई थी।

आरोप है कि बिना वाहन मालिक की जानकारी, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर अपात्र वाहनों को फर्जी तरीके से वीआईपी पंजीयन नंबर आवंटित किए गए।

जांच में करीब 2000 वाहनों की फाइल खंगाली गई, जिनमें 1500 वाहनों की पंजीयन अवधि समाप्त होने के बाद भी रिकॉर्ड में 10 से 15 साल तक बढ़ा दी गई थी। वहीं, 500 वाहनों का कोई रिकॉर्ड ही दफ्तर में नहीं मिला।

जांच में पाया गया कि इस दौरान कूटरचित दस्तावेज़ तैयार किए गए, जिससे विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

इस संबंध में रमेश पांडे, जिला परिवहन अधिकारी की रिपोर्ट पर गांधीनगर पुलिस थाना, जयपुर में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें सुरेश तनेजा सहित कई कर्मचारियों और दलालों की संलिप्तता पाई गई।

अदालत में दोनों पक्षों के तर्क

सुरेश तनेजा की ओर से उनके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अभियुक्त को मामले में झूठा फंसाया गया है।

अधिवक्ता ने कहा कि तनेजा केवल ऑपरेटर थे और उन्होंने सिर्फ सॉफ्टवेयर में डेटा फीड किया था, जिसे बाद में डिलीट भी कर दिया गया।

अधिवक्ता का कहना था कि कोई वित्तीय नुकसान साबित नहीं हुआ है और अभियुक्त वरिष्ठ नागरिक हैं, जो बीमार हैं और लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में हैं।

वहीं, लोक अभियोजक ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने पद का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया है।

बैकलॉग एंट्री और पंजीयन की हेराफेरी से परिवहन विभाग को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है।

अदालत का निर्णय

अदालत ने केस डायरी और प्रस्तुत तथ्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और अभी जांच लंबित है।

आदेश में कहा गया कि तनेजा पर राजकार्य के दौरान कूटरचित दस्तावेज़ तैयार करने, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने और अवैध लाभ पहुँचाने का आरोप प्रमाणित होता है।

इस आधार पर अदालत ने माना कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत का लाभ देना न्यायोचित नहीं होगा।

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