जयपुर/जोधपुर। राजस्थान बार काउंसिल के सदस्यों के लिए 22 अप्रैल को संपन्न हुए चुनाव अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गए हैं।
चुनाव प्रक्रिया में कथित अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं को लेकर अधिवक्ताओं एवं प्रत्याशियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
पुनर्मतदान से पहले अब इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
अशोक यादव, अधिवक्ता
निराशा और असंतोष
करीब छह माह से चुनाव की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों को अब एक बार फिर से चुनावी मैदान में उतरने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
इससे उनमें निराशा और असंतोष दोनों ही स्पष्ट रूप से झलक रहे हैं।
कई प्रत्याशियों का कहना है कि इतनी लंबी तैयारी और संसाधनों के बाद दोबारा चुनाव कराना उनके लिए आर्थिक और मानसिक दोनों दृष्टि से भारी पड़ रहा है।
प्रत्याशी प्रहलाद शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी चुनाव प्रक्रिया में एक विशेष प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने मांग की कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
प्रहलाद शर्मा,प्रत्याशी
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण-ACJ
इसी बीच शुक्रवार को जयपुर में एक मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए इसे “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया।
सुनवाई के दौरान चुनाव प्रत्याशी प्रहलाद शर्मा पैरवी के लिए उपस्थित थे, तभी न्यायालय में 22 अप्रैल के घटनाक्रम का उल्लेख हुआ।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव प्रक्रिया में इस प्रकार की अव्यवस्थाएं न्यायिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए चिंता का विषय हैं।
उन्होंने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अप्रत्यक्ष रूप से निष्पक्षता और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
नए मतपत्र छापने की मांग
बार काउंसिल चुनाव के वरिष्ठ और अनुभवी प्रत्याशी संतोष कुमार जैन ने अपने लंबे पेशेवर जीवन में इस चुनाव को “सबसे खराब अनुभव” करार दिया।
अधिवक्ता संतोष कुमार जैन, जो राजस्थान बार काउंसिल के सबसे वरिष्ठ सदस्य के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
उनका पंजीयन 11 सितंबर 1972 का है, यानी लगभग 54 साल का अनुभव। वे इस चुनाव में अनुभव और परंपरा का चेहरा बनकर उभरे हैं। इस प्रकार वे लगभग 54 वर्षों के अनुभव के साथ चुनावी मैदान में उतरने वाले सबसे वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने करियर में इस प्रकार की अव्यवस्थित और विवादित चुनाव प्रक्रिया कभी नहीं देखी। उनके अनुसार, यह स्थिति न केवल निराशाजनक है बल्कि बार काउंसिल की गरिमा के भी विपरीत है।
क्या बूथ कैप्चरिंग हुई
जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ है कि बूथ कैप्चरिंग हुई थी।
हालांकि, राजस्थान बार काउंसिल चुनाव (22 अप्रैल) को लेकर कई गंभीर आरोप जरूर सामने आए हैं—जिनमें अव्यवस्थाएं, पक्षपात और प्रक्रिया में गड़बड़ियों की बातें शामिल हैं।
कुछ प्रत्याशियों, प्रमिला शर्मा ने यह आरोप लगाया है कि किसी विशेष उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
प्रत्याशी प्रमिला शर्मा ने भी पूरे घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने चुनाव टीम के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर एक बड़ा सवाल बन जाएगा।
प्रमिला शर्मा,प्रत्याशी
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल
जयपुर हाईकोर्ट परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक आयोजन में यदि पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे न्यायिक तंत्र की साख को प्रभावित करता है।
यह नाराजगी अब केवल अव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रत्याशियों और अधिवक्ताओं ने इस मामले में सख्त कार्रवाई और विस्तृत जांच की मांग शुरू कर दी है।
कुछ अधिवक्ताओं ने तो इस संबंध में पुलिस में शिकायत तक दर्ज करवाई है, जिससे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब सभी की निगाहें आगामी पुनर्मतदान और संभावित जांच पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाती है।
