जयपुर, 18 सितंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनिल कुमार उपमन का नाम विधिक जगत में गहन संवैधानिक समझ, समाजसेवा और न्यायिक दायित्वों के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता है।
16 जनवरी 2023 को राजस्थान हाईकोर्ट में जज नियुक्त होने के बाद से वे न्यायपालिका में अपनी गहरी छाप छोड़ रहे हैं।
18 सितंबर 1971 को जन्मे जस्टिस अनिल उपमन ने बी.एससी. और एलएलबी करने के बाद 20 नवंबर 1994 को राजस्थान बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में रजिस्टर्ड कराया।
शुरुआती दौर में वर्ष 1995 में उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय सज्जन राज सुराना के चैंबर से अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू की। चार साल बाद 1999 में उन्होंने स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस शुरू की। अपने अथक प्रयासों और नैतिक मूल्यों के साथ आपराधिक, दीवानी, श्रम, वैवाहिक और संवैधानिक मामलों में शीघ्र ही विशेषज्ञता हासिल की।
27 वर्षों के करियर में उन्होंने हाईकोर्ट जयपुर बेंच में करीब 10,000 से अधिक मामलों में पक्षकारों की पैरवी की।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष
जस्टिस उपमन उन अधिवक्ताओं में शामिल हैं जो हाईकोर्ट जज बनने से पहले बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी रहे। वर्ष 2018-19 में वे राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कई गरीब और वंचित वर्ग के जरूरतमंद लोगों को प्रो बोनो स्कीम के तहत नि:शुल्क कानूनी सहायता दी। उनके कार्यकाल के दौरान केरल बाढ़ राहत के लिए ₹2,31,000 की राशि एकत्र कर तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सौंपी गई। इसी दौरान पुलवामा शहीदों की स्मृति में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें रिकॉर्ड 111 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया।
ऐतिहासिक मुकदमे और पहल
अधिवक्ता रहते हुए उन्होंने श्रमिकों के हित में औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 17B को लेकर एक ऐतिहासिक मुकदमा लड़ा। कानूनी जटिलताओं को देखते हुए यह मामला बड़ी पीठ को सौंपा गया और अंततः श्रमिकों के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय आया।
उनके कार्यकाल में राजस्थान हाईकोर्ट और विधानसभा परिसर के पास सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाने की मांग भी उठी, जो बाद में कोर्ट आदेश के जरिए लागू हुई।
पुलिस ज्यादती से जुड़े मामलों में भी उन्होंने लगातार पैरवी की। ऐसे कई मामलों की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई।
बार और बेंच के रिश्ते
जज बनने के बाद भी जस्टिस उपमन की बार से सक्रिय भागीदारी बनी रही है। राजधानी जयपुर सहित कई जिलों में आयोजित बार एसोसिएशन के कार्यक्रमों में वे नियमित रूप से शिरकत करते हैं। यह उनकी अधिवक्ताओं और न्यायपालिका के बीच मजबूत छवि को दर्शाता है।
वे कई बार अपने संबोधन में कह चुके हैं कि न्याय केवल विधिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक उसकी पहुंच सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
जजों की संख्या बढ़ाने का आह्वान
जस्टिस उपमन राजस्थान हाईकोर्ट के उन जजों में शामिल हैं जिन्होंने केन्द्रीय कानून मंत्री की मौजूदगी में ही राजस्थान में जजों की संख्या बढ़ाने की वकालत की। जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि प्रदेश को वर्तमान में कम से कम 70 जजों की जरूरत है।