जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मुकेश राज पुरोहित ने अपनी विद्वता, कानूनी दक्षता और लंबे न्यायिक अनुभव के बल पर न्यायपालिका में एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
12 मई 1974 को जन्मे जस्टिस पुरोहित मूलतः राजस्थान के जोधपुर से संबंध रखते हैं और उन्होंने विज्ञान एवं विधि विषय में शिक्षा प्राप्त करते हुए B.Sc. और LL.B. की डिग्री हासिल की।
लगभग दो दशकों से अधिक समय तक सक्रिय अधिवक्ता के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ एवं अधीनस्थ न्यायालयों में विभिन्न प्रकार के मामलों की प्रभावशाली पैरवी की।

वर्ष 1999 से शुरू हुए उनके विधिक सफर में सिविल, संवैधानिक, सेवा एवं आपराधिक मामलों का व्यापक अनुभव शामिल रहा है।
उनकी कानूनी समझ और प्रभावशाली कार्यशैली के चलते उन्हें केंद्र सरकार की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रतिनिधित्व किया।
जस्टिस पुरोहित ने अपने कार्यकाल में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट (IA&AD), जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सहित कई प्रमुख संस्थाओं की ओर से अदालत में पक्ष रखा।
उनकी गहरी कानूनी समझ, संतुलित दृष्टिकोण और संवैधानिक विषयों पर पकड़ को देखते हुए उन्हें 28 मार्च 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।
कानून के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव और विविध विषयों पर कार्य न्यायपालिका को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
जस्टिस मुकेश राज पुरोहित का अब तक का सफर युवा अधिवक्ताओं और विधि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।