जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मुआवजा दावे से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि एक ही घटना के लिए पीड़ित पक्ष दो अलग-अलग कानूनों के तहत मुआवजा नहीं ले सकता।
अगर किसी एक कानून के तहत मुआवजे का दावा कर अवॉर्ड मिल चुका है, तो उसी हादसे के लिए दूसरे कानून के तहत दोबारा मुआवजा नहीं मांगा जा सकता।
हाईकोर्ट ने इसी आधार पर द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील मंजूर करते हुए वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत दिए गए दूसरे मुआवजा अवॉर्ड को रद्द कर दिया।
मामला भोलाराम उर्फ ओमप्रकाश की मौत से जुड़ा है। उनके परिवार ने पहले मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत मुआवजे का दावा किया और उसमें अवॉर्ड भी मिल गया। इसके बाद उसी हादसे के लिए वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट, 1923 के तहत दूसरा दावा किया गया।
जस्टिस संदीप शाह ने कहा कि मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 167 के तहत अगर एक ही मौत या चोट के लिए दोनों कानूनों के तहत मुआवजे का दावा किया जा सकता है, तो पीड़ित पक्ष को किसी एक कानून को चुनना होगा। दोनों के तहत मुआवजा नहीं लिया जा सकता।
परिवार ने पहले मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत लिया था मुआवजा
यह मामला भोलाराम उर्फ ओमप्रकाश की मौत से जुड़ा था। मौत के बाद उनके परिवार ने मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत मुआवजे का दावा किया था। इस दावे पर उन्हें अवॉर्ड भी मिल चुका था।
इसके बाद परिवार की ओर से उसी घटना के लिए वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट, 1923 के तहत भी मुआवजे का दावा किया गया। इस दावे पर भी मुआवजा दिए जाने का अवॉर्ड पारित हुआ।
द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने इसी दूसरे अवॉर्ड को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कंपनी की ओर से कहा गया कि परिवार पहले ही मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत मुआवजा हासिल कर चुका था। इसलिए उसी हादसे के लिए दूसरी बार मुआवजे का दावा नहीं किया जा सकता।
कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
इंश्योरेंस कंपनी की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि इस मामले का विवाद पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट के यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम चनानी उर्फ सैनी मामले में तय हो चुका है।
कंपनी ने कहा कि एक ही घटना के लिए मोटर व्हीकल्स एक्ट और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट दोनों के तहत मुआवजा नहीं लिया जा सकता। दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष इस बात से इनकार नहीं कर सका कि परिवार को पहले मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत मुआवजा मिल चुका था।
धारा 167 में एक ही रास्ता चुनने का नियम
हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 167 इस स्थिति में साफ नियम देती है। अगर किसी व्यक्ति की मौत या चोट से एक ही घटना के लिए मोटर व्हीकल्स एक्ट और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट दोनों के तहत मुआवजे का दावा बनता है, तो संबंधित व्यक्ति इनमें से किसी एक कानून के तहत मुआवजा मांग सकता है, दोनों के तहत नहीं।
यानी पीड़ित पक्ष के सामने अगर दो कानूनी रास्ते हैं, तो उसे उनमें से ही एक चुनना होगा। एक रास्ता चुनकर उस पर मुआवजा हासिल करने के बाद उसी हादसे के लिए दूसरे रास्ते से दोबारा मुआवजा नहीं मांगा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम मस्तान फैसले का भी हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर एक ही मामले में मुआवजे के लिए दो कानूनी रास्ते हैं, तो पीड़ित पक्ष को इनमें से किसी एक को चुनना होगा। दोनों के तहत मुआवजा नहीं लिया जा सकता।
इसे डॉक्ट्रिन ऑफ इलेक्शन यानी उपलब्ध कानूनी रास्तों में से किसी एक को चुनने का सिद्धांत कहा जाता है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम बिदामी फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें यही बात कही गई थी।
‘पहले रास्ता चुन लिया तो दूसरा दावा नहीं चलेगा‘
हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक के परिवार ने पहले ही मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत मुआवजे का दावा किया और मुआवजा हासिल कर लिया था। यानी उन्होंने मुआवजे के लिए एक कानूनी रास्ता चुन लिया था।
ऐसे में उसी हादसे के लिए बाद में वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत किया गया दूसरा दावा चलने योग्य नहीं था। कोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 167 में दोनों कानूनों के तहत मुआवजा लेने पर रोक है।
हाईकोर्ट ने दूसरा मुआवजा अवॉर्ड रद्द किया
जस्टिस संदीप शाह ने इसी आधार पर वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत दिए गए मुआवजे के अवॉर्ड को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील मंजूर कर ली।
यानी एक ही हादसे के लिए मुआवजे के दो कानूनी रास्ते होने का मतलब यह नहीं है कि दोनों से मुआवजा लिया जा सकता है। पीड़ित पक्ष को इनमें से एक रास्ता चुनना होगा। एक बार मुआवजा लेने के बाद उसी हादसे के लिए दूसरे कानून के तहत दोबारा दावा नहीं किया जा सकता।