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दिल्ली में प्रदर्शन से जाम और कारोबार ठप होने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब; सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू कराने के लिए दाखिल हुईं PIL

Delhi High Court Seeks Centre’s Response on Protests Disrupting Traffic and Business Activities

नई दिल्ली। विरोध-प्रदर्शनों के कारण ट्रैफिक जाम और कारोबार प्रभावित होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की डिवीजन बेंच ने इस मुद्दे पर दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र से अपना पक्ष रखने को कहा।

याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों को लागू करने की मांग की गई है, जिनका मकसद प्रदर्शन के दौरान आम लोगों की आवाजाही और व्यावसायिक गतिविधियों को प्रभावित होने से रोकना है।

हाईकोर्ट को बताया गया कि इसी तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं। इस पर बेंच ने कहा कि वह ऐसे मुद्दे पर सुनवाई नहीं करना चाहती, जिस पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही विचार कर रहा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को मामले में निर्देश लेकर अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रखने को कहा।

प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने की शिकायत की गई

मामलों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में 2 जनहित याचिकाएं (PIL) दाखिल की गई हैं।

इनमें से एक याचिका एक कारोबारी ने दायर की है, उनकी ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सचिन पुरी ने कहा कि प्रदर्शनों के कारण कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कोर्ट से अंतरिम निर्देश देने की मांग की, ताकि प्रदर्शन तय जगहों पर हों और कारोबारियों समेत पेशेवरों के कामकाज पर असर न पड़े।

दूसरी याचिका एडवोकेट ऋषभ सक्सेना ने दाखिल की है। इसमें प्रदर्शन को नियंत्रित करने और उनके दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लागू कराने की मांग

अधिवक्ता ऋषभ सक्सेना की याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ और अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त’ मामलों में दिए गए फैसलों को लागू कराने की मांग की गई है।

इसके साथ ही दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 10/2018 को लागू करने की भी मांग की गई है। इस आदेश में प्रदर्शनों को नियंत्रित करने और उनके आयोजन से जुड़ी शर्तों का प्रावधान है।

याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शनों के दौरान ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जाए। इसमें पहले से ट्रैफिक पर पड़ने वाले असर का आकलन, वैकल्पिक रूट की योजना, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और लोगों को समय पर सूचना देने जैसे कदम शामिल हों।

दो घंटे तक जाम में फंसने का भी दिया उदाहरण

याचिकाकर्ता ने 12 अक्टूबर की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मंडी हाउस राउंडअबाउट के पास एक जमावड़े के कारण वह करीब 2 घंटे तक जाम में फंसे रहे, जिससे उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई।

याचिका में मांग की गई है कि प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक संभालने के लिए पहले से योजना बनाई जाए। इसमें वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और लोगों को समय पर जानकारी देने जैसे कदम शामिल हों, ताकि प्रदर्शन के कारण आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।

केंद्र सरकार शुक्रवार को रखेगी अपना पक्ष

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाओं में मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों को लागू कराने की मांग की गई है। इसके बाद बेंच ने केंद्र सरकार के वकील को मामले में निर्देश लेकर अपना पक्ष रखने को कहा।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार अपना पक्ष और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखेगी। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

अब इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। उस दौरान केंद्र सरकार का पक्ष सामने आने के बाद कोर्ट आगे विचार करेगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने प्रदर्शन के लिए जगह तय करने या ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर कोई अंतिम निर्देश जारी नहीं किया है।


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