जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने अदालत की कार्यवाही की मोबाइल से रिकॉर्डिंग किए जाने के मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की अदालत ने कोर्ट रूम में बिना अनुमति रिकॉर्डिंग करने को न्यायालय की अवमानना बताते हुए याचिकाकर्ता और उसके ड्राईवर के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
न्याय प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप
मामला एस.बी. क्रिमिनल मिसलेनियस पिटीशन संख्या 2479/2022 सहित अन्य संबंधित याचिकाओं की सुनवाई से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की नजर एक व्यक्ति पर पड़ी, जो खड़े होकर अपने मोबाइल फोन से कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहा था।
पकड़े जाने पर उसने रिकॉर्डिंग डिलीट करने का प्रयास भी किया।
पूछताछ में उसने अपना नाम अनिल सुमन बताया और कहा कि वह याचिकाकर्ता कमल राठौड़ का ड्राइवर है तथा उनके मामले की कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहा था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह कृत्य न्याय प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप है और प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना का मामला बनता है।
अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2020 के नियम 3(vi) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति द्वारा कोर्ट कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित “अरुंधति रॉय बनाम इन रे” फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और जनता का विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
यदि ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई तो न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
पुलिस को कानूनी कार्रवाई के निर्देश
अदालत ने याचिकाकर्ता कमल राठौड़ और ड्राइवर अनिल सुमन दोनों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
साथ ही रजिस्ट्रार (न्यायिक) को अनिल सुमन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने, उसका मोबाइल फोन जब्त कर सुरक्षित रखने और अशोक नगर थाना पुलिस को आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि मामले को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए, ताकि इन याचिकाओं को वर्तमान पीठ के अलावा किसी अन्य उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके।