जोधपुर/जयपुर, 5 दिसंबर 2025
प्रदेश का बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। एकल पट्टा भ्रष्टाचार मामले में आज राजस्थान हाईकोर्ट में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।
भजनलाल सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसले से पूरी तरह अलग रुख अपनाते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि 2021 में आरोपियों के खिलाफ अभियोजन वापस लेने का निर्णय गलत था, जनहित में नहीं था, और बिना स्वतंत्र विचार के लिया गया।
राजस्थान हाईकोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बड़ा खुलासा करते हुए माना कि वर्ष 2021 में आरोपियों के खिलाफ अभियोजन वापसी की अर्जी तथ्यों का समुचित मूल्यांकन किए बिना ही दायर की गई थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की विशेष पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोधपुर से इस मामले में सुनवाई की।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख 7 जनवरी 2026 तय की है।
राज्य सरकार का बदला रुख
सुनवाई में राज्य की ओर से उपस्थित ASG एस. वी. राजू और AAG शिवमंगल शर्मा ने कहा कि “मुकदमा वापस लेना सार्वजनिक हित में नहीं था” और
“अब राज्य सरकार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ाना चाहती है।”
राज्य सरकार ने कहा कि 2021 में दायर आवेदन आधे सच और गलत तथ्यों की समझ पर आधारित था और इससे न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता को नुकसान होता।
सरकार ने कहा कि—
“यह गंभीर भ्रष्टाचार का मामला है। इससे जुड़े साक्ष्य ट्रायल की मांग करते हैं। अभियोजन वापस लेना न्याय व्यवस्था का अपमान होता।”
सरकार ने अदालत से कहा कि
जी. एस. संधू, निष्काम दिवाकर और ओंकार माल सैनी के खिलाफ ट्रायल आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि उपलब्ध साक्ष्य गंभीर हैं और पारदर्शी न्याय प्रक्रिया एक पूर्ण सुनवाई की मांग करती है।
यह अर्जी 19 जनवरी 2021 को ट्रायल कोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 26 नवंबर 2021 को खारिज कर दिया था।
इस आदेश को चैलेंज करते हुए पूर्व IAS अधिकारी जी. एस. संधू, निष्काम दिवाकर और ओंकार माल सैनी ने हाईकोर्ट में रिवीजन याचिकाएँ दायर की थीं।
हाईकोर्ट को बताया गया कि राज्य की अपनी रिविजन को मई 2025 में वापस ले लिया गया था।
अर्जी वापस लेना चाहती है…
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अब वह उस अर्जी को वापस लेना चाहती है और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाना आवश्यक है।
इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपना नया प्रार्थना पत्र रजिस्ट्री में दर्ज कराए और उसकी प्रति आरोपी पक्ष को उपलब्ध कराए।
7 जनवरी को होगा तय
हाईकोर्ट ने आरोपी पक्ष को जवाब दाखिल करने का समय दिया है।
अब 7 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट यह तय करेगा कि क्या रिवीजन याचिकाएँ आगे सुनवाई योग्य हैं, और क्या आरोपियों के खिलाफ ट्रायल पूरी तरह जारी रहेगा।