जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्जी आधार कार्ड तैयार करने में मदद करने और सरकारी नेटवर्क का दुरुपयोग करने के आरोपों का सामना कर रहे दो सरकारी कर्मचारियों की दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
जस्टिस अशोक कुमार जैन ने मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखते हुए राहत देने से इनकार किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि आधार देशभर में पहचान का अहम माध्यम है और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन फर्जी पहचान बनाने के लिए इसका दुरुपयोग वित्तीय लाभ के साथ राष्ट्रीय हित के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों से तकनीक के दुरुपयोग को रोकने और अपराध के प्रति सतर्क रहने की अपेक्षा होती है। ऐसे में उनकी भूमिका और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।
आधार एनरोलमेंट सेंटर की शर्तों के उल्लंघन का था आरोप
मामला आधार कार्ड के एनरोलमेंट और अपडेट सेंटर के संचालन से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी विभाग में प्रोग्रामर और असिस्टेंट प्रोग्रामर के पद पर काम करने वाले अधिकारियों ने ऐसे व्यक्ति की मदद की, जो UIDAI यानी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की निर्धारित शर्तों के मुताबिक सेंटर नहीं चला रहा था।
आरोपियों पर आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने की प्रक्रिया में हेरफेर करने और फर्जी आधार कार्ड तैयार करने में मदद करने का आरोप है।
आशंका जताई गई कि ऐसे कार्ड का इस्तेमाल गलत कामों और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में किया जा सकता था। हालांकि, ये आरोप हैं और कोर्ट ने इस स्तर पर आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया है।
आरोपियों ने सरकारी इंटरनेट नेटवर्क का पासवर्ड किया था शेयर
पहली जमानत याचिका खारिज करते समय पारित आदेश में कहा गया था कि आरोपियों ने अनधिकृत आधार सेंटर चलाने वाले व्यक्ति को सरकारी इंटरनेट नेटवर्क का पासवर्ड दिया था। यह नेटवर्क राजस्थान स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (Raj-SWAN) के नाम से जाना जाता है।
आरोप है कि पासवर्ड शेयर करने से अनधिकृत व्यक्ति को सरकारी नेटवर्क तक पहुंच मिली और आधार कार्ड बनाने या अपडेट करने की व्यवस्था की सुरक्षा प्रभावित हुई। आरोप है कि अधिकारियों ने इसके बदले पैसे भी लिए।
हाईकोर्ट ने आधार व्यवस्था के दुरुपयोग को माना गंभीर मामला
हाईकोर्ट ने कहा कि आधार देशभर में पहचान का अहम माध्यम बन चुका है। इसका इस्तेमाल सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए भी किया जाता है।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि कुछ लोगों ने इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर आर्थिक या दूसरे फायदे के लिए फर्जी पहचान तैयार की है। ऐसे में आधार परियोजना की विश्वसनीयता और डेटा की सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है।
सीमावर्ती राज्य होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल-हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान पाकिस्तान से सटा सीमावर्ती राज्य है। ऐसे इलाकों में आधार डेटा के नए रजिस्ट्रेशन और अपडेट में गड़बड़ी राष्ट्रीय हित के खिलाफ गतिविधियों का कारण बन सकती है।
हाईकोर्ट की चिंता थी कि फर्जी पहचान का इस्तेमाल केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से हाईकोर्ट ने आधार डेटा में कथित हेरफेर को गंभीरता से लिया।
कुछ ‘काली भेड़ों’ के कारण आधार का दुरुपयोग- हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि आधार परियोजना देशभर में पहचान का अहम माध्यम बन चुकी है और इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।
लेकिन कुछ ‘काली भेड़ों’ के कारण इस व्यवस्था का दुरुपयोग हुआ है। कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग आर्थिक या दूसरे फायदे के लिए फर्जी पहचान तैयार कर रहे हैं। ऐसे में आधार डेटा की विश्वसनीयता और सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है।
‘सरकारी कर्मचारियों से सतर्क रहने की अपेक्षा होती है’
जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कहा कि आरोपी सरकारी कर्मचारी हैं और उनकी कथित भूमिका को देखते हुए उन्हें राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी पद पर काम करने वाले कर्मचारियों से तकनीकी सुविधाओं के सुरक्षित इस्तेमाल और संभावित अपराधों को रोकने में जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सरकारी संसाधनों और नेटवर्क का इस्तेमाल अनधिकृत गतिविधियों में मदद के लिए किया जाता है, तो ऐसे आचरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने दूसरी जमानत याचिकाएं भी खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता, आधार व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं और आरोपियों की कथित भूमिका पर विचार करने के बाद उनकी दूसरी जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
हाईकोर्ट ने माना कि इस स्तर पर आरोपियों को जमानत देने का आधार नहीं है। हालांकि, जमानत याचिकाएं खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपियों को दोषी ठहरा दिया गया है।
मामले में आरोपों का अंतिम फैसला मुकदमे की सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर होगा।