जयपुर, 29 अक्टूबर 2025
जयपुर महानगर द्वितीय की एक जिला अदालत ने फर्जी तरीके से दूसरे के नाम पर कृषिभूमि का बेचान करने की धोखाधड़ी कर 86 लाख रुपये की ठगी करने के आरोपी की दूसरी जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है।
एडीजे कोर्ट संख्या 7 के जज प्रदीप कुमार द्वितीय की अदालत ने करीब 6 करोड़ रुपये की भूमि को फर्जी तरीके से बेचने और धोखाधड़ी करने के मामले में यह आदेश दिया है।
आरोपी रामावतार शर्मा की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर अपराधों के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और प्रकरण की परिस्थितियों में ऐसा कोई नया परिवर्तन नहीं हुआ है, जिससे उसे राहत दी जा सके।
रामावतार शर्मा पर फर्जी दस्तावेजों, जाली पहचान पत्रों और नकली गवाहों के माध्यम से लाखों रुपये की ठगी का आरोप है।
अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने मिलकर एक कृषिभूमि की बिक्री के नाम पर परिवादी हेमंत कुमार जैन से करोड़ों रुपये हड़पे थे।
ये है पूरा मामला
मामले के परिवादी हेमंत कुमार जैन ने जयपुर की अदालत में एक परिवाद दायर कर बताया कि उसके परिचित भवानीशंकर शर्मा उर्फ भानू ने उसे ग्राम नरायणा, तहसील फुलेरा, जिला जयपुर में स्थित कृषिभूमि खरीदने के लिए प्रेरित किया।
भवानीशंकर ने रामावतार व अन्य के साथ उसे एक भूमि दिखाकर यह भरोसा दिलाया कि यह भूमि बाजार भाव से काफी कम कीमत में उपलब्ध करा सकता है।
परिवादी के विश्वास में आने के बाद 4 नवंबर 2023 को दो पृथक-पृथक ईकरारनामे (agreements) तैयार किए गए।
मोहनलाल ही रामावतार
पहला ईकरारनामा लगभग 5.39 करोड़ रुपये का और दूसरा 1.01 करोड़ रुपये का तैयार किया गया।
दोनों दस्तावेजों पर विक्रेता के रूप में मोहनलाल नामक व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्शाए गए, जबकि बाद में यह पाया गया कि वास्तव में वह व्यक्ति रामावतार शर्मा था, जो खुद को मोहनलाल बताकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सौदा कर रहा था।
परिवादी ने इस सौदे के तहत 86.70 लाख रुपये नकद और चेक द्वारा अभियुक्तों को सौंप दिए, जबकि शेष राशि बाद में भुगतान की जानी थी।
मामले की जांच में सामने आया कि मोहनलाल ही रामावतार है, और रामावतार ही मोहनलाल ..आरोपी रामावतार पुत्र कल्याण शर्मा ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर यह ठगी की है।
धोखाधड़ी का खुलासा
एग्रीमेंट में बड़ी राशि का भुगतान करने के कुछ माह बाद जब परिवादी ने भूमि के म्यूटेशन के लिए संपर्क किया, तो उसे संदेह हुआ।
परिवादी ने असली मोहनलाल से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की, तब यह स्पष्ट हुआ कि वास्तविक खातेदार कोई और है और उसके नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं।
ये सभी दस्तावेज मोहनलाल के नाम पर रामावतार ने तैयार किए थे और उन पर उसके ही हस्ताक्षर थे।
परिवादी के अनुसार, जब उसने रकम वापसी की मांग की, तो आरोपी भवानीशंकर, रामावतार व अन्य ने उसे आश्वासन दिया कि पूरी राशि मय ब्याज लौटा दी जाएगी।
इसके बाद 12 मई 2024 को 1.10 करोड़ रुपये का चेक जारी किया गया, जो बैंक में पेश करने पर 24 जून 2024 को “पर्याप्त राशि न होने” (insufficient funds) के कारण बाउंस हो गया।
इसके बाद परिवादी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने मामला धारा 156(3) दं.प्र.सं. के तहत अनुसंधान हेतु थाना सदर, जयपुर को भेजकर मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
सदर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस ने इस प्रकरण में धारा 384, 406, 416, 419, 420, 467, 468, 471, 506 और 120-बी भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी रामावतार ने अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और गवाहों के हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर ठगी की योजना बनाई थी।
पुलिस ने रामावतार को 3 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार किया और अब उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।
बचाव पक्ष की दलील
आरोपी रामावतार की ओर से अदालत को कहा गया कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उसका इस सौदे से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, इसलिए अब कोई और बरामदगी शेष नहीं है।
दलील दी गई कि अभियुक्त लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में है, और जब तक ट्रायल पूरा होगा, तब तक काफी समय लग सकता है।
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत “नियम” होनी चाहिए और जेल “अपवाद”।
सरकार का विरोध
मामले में आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अपर लोक अभियोजक ने कहा कि चार्जशीट पेश हो जाने मात्र से अपराध की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं आता।
अभियोजन ने कहा कि मामले के सभी साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि आरोपी ने जानबूझकर फर्जी पहचान बनाकर परिवादी को ठगा है।
अभियोजन ने कहा कि चूंकि यह अपराध समाज में संपत्ति के अधिकारों को लेकर असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर रहे हैं, इसलिए अदालत को इस चरण में जमानत नहीं देनी चाहिए।
कोर्ट का आदेश
जिला अदालत के जज प्रदीप कुमार ने दलीलों और दस्तावेजों पर बहस सुनने के बाद कहा कि आरोपी रामावतार सहित अन्य अभियुक्तों ने फर्जी मोहनलाल बनकर 86.70 लाख रुपये की ठगी की है।
अदालत ने टिप्पणी की कि भूमि खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे समाज में संपत्ति को लेकर विश्वास और सुरक्षा की भावना पर असर पड़ रहा है।
अदालत ने कहा कि इसी मामले में अन्य अभियुक्त—शंकरलाल, पूजा, विक्रम सिंह और भवानीशंकर उर्फ भानू—की जमानत अर्जी पहले ही खारिज की जा चुकी है।
एडीजे कोर्ट ने कहा, “प्रकरण की परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थी/अभियुक्त को जमानत का लाभ प्रदान करने से इंकार किया जाता है।”
अतः अदालत ने रामावतार पुत्र कल्याण शर्मा (आयु 47 वर्ष), निवासी रामसर की ढाणी, थाना तूंगा, जयपुर की ओर से प्रस्तुत द्वितीय जमानत प्रार्थना पत्र को अस्वीकार कर खारिज कर दिया।