जोधपुर, 11 नवंबर
जोधपुर महानगर की NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) विशेष अदालत ने 13 साल पुराने स्मैक के अवैध कब्जे के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी प्रकाश पुत्र भूराराम विश्नोई को 5 वर्ष का कठोर कारावास और ₹50,000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
एनडीपीएस विशेष अदालत के न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने अभियोजन के साक्ष्यों और तर्कों को सही मानते हुए आरोपी प्रकाश विश्नोई को दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया।
पुलिस की गवाही विश्वसनीय
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस अधिकारियों की गवाही को केवल इस आधार पर अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता कि वे सरकारी कर्मचारी हैं, जब तक कि उनके खिलाफ कोई ठोस विरोधाभास न हो।
न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस की गवाही भी अन्य गवाहों के समान विश्वसनीय मानी जानी चाहिए, यदि वह भरोसेमंद और सुसंगत हो।
180 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार
मामला वर्ष 2012 का है, जब चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना प्रभारी अमित सिहाग ने चौपासनी पुलिया के पास से प्रकाश पुत्र भूराराम विश्नोई, निवासी गांव सदरी, लोहावट, को 180 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान (चार्जशीट) पेश किया।
अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 9 गवाहों, 27 दस्तावेजी साक्ष्यों और 3 जब्त आर्टिकल्स के आधार पर अपना पक्ष रखा।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें
राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे विशिष्ट लोक अभियोजक गोविंद जोशी ने अदालत से कहा कि अवैध मादक पदार्थों के अपराध समाज पर गहरा और खतरनाक प्रभाव डाल रहे हैं।
ऐसे मामलों में कठोर सजा देना समाज में निवारक प्रभाव डालने के लिए आवश्यक है।
वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है, क्योंकि पुलिस ने कोई स्वतंत्र गवाह (मौतबीर) शामिल नहीं किया।
साथ ही, आरोपी की उम्र के आधार पर सजा में नरमी बरतने का अनुरोध किया गया।
गंभीर प्रकृति का अपराध
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी प्रकाश के कब्जे से 180 ग्राम अवैध मादक पदार्थ स्मैक बरामद हुआ है।
यदि यह मादक पदार्थ मौके पर बरामद नहीं किया जाता, तो संभावना है कि वह या तो इसे युवाओं को बेच देता या स्वयं इसका सेवन करता।
अदालत ने कहा कि आरोपी का कृत्य अत्यंत गंभीर प्रकृति का है।
वर्तमान समय में अवैध मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त, परिवहन और कब्जे के अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है।
ऐसी स्थिति में यदि आरोपी के प्रति नरमी बरती गई, तो दंड के भय का अभाव समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
विशिष्ट न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों पर नरमी दिखाना न्याय व्यवस्था के लिए हानिकारक होगा।
अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष की सजा और ₹50,000 जुर्माना लगाया।