नई दिल्ली, 16 नवम्बर 2025
देश के पूर्व CJI जस्टिस यू.यू. ललित ने रेप और महिला पर अत्याचार के झूठे मुकदमों को लेकर बड़ी बात कही है।
पूर्व CJI यू.यू. ललित ने कहा कि “न्याय के पक्ष में होना, महिलाओं के खिलाफ होना नहीं है।”
उन्होंने कहा कि झूठे मामलों और कानूनों के दुरुपयोग पर चर्चा अब समय की मांग है.
पूर्व CJI ने कहा कि कई बार वर्षों पुराने सहमति आधारित संबंधों को झूठे वादे के बहाने ‘रेप’ के रूप में दर्ज कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में बिना उचित जांच पुरुषों की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि “जैसे समाज में सीताएं हैं, वैसे शूर्पणखाएं भी हैं -इसलिए कानून को निष्पक्ष होना चाहिए।”
झूठे आरोप लगाने वालों पर हो कार्रवाई
पूर्व CJI यू.यू. ललित ने नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एकम न्याय फाउंडेशन की वार्षिक कॉन्फ्रेंस “एकम न्याय कॉन्फ्रेंस” को संबोधित करते हुए ये बातें कही.
“शेपिंग एन इक्वल एंड जस्ट भारत” विषय पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रस्ताव रखा कि अगर कोई आरोप झूठा साबित होता है, तो उसी मुकदमे में झूठे आरोप लगाने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाया जा सके।
पूर्व CJI जस्टिस ललित ने कहा कि हमारी न्याय प्रणाली को इस प्रकार संवेदनशील बनाया जाना चाहिए कि निर्दोष व्यक्ति को सजा न मिले और सच्चे पीड़ित को न्याय अवश्य मिले।
पूरा परिवार टूट जाता है..
बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस साधना जाधव ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि झूठे आरोपों से सिर्फ आरोपी पुरुष ही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार टूट जाता है.
जस्टिस जाधव ने समाज से अनुरोध किया कि “महिलाएं गलत आरोप नहीं लगातीं” जैसी धारणाओं को चुनौती दी जाए।
2000 पुरुषों को परामर्श..
पुरुषों के लिए कार्य कर रही एकम न्याय फाउंडेशन की संस्थापक दीपिका नारायण भारद्वाज ने बताया कि संस्था ने पिछले एक वर्ष में 2000 से अधिक पुरुषों को परामर्श दिया।
वहीं, पुरुषों पर झूठे आरोप लगाने वाले 37 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई और 24 मामलों में पीड़ित परिवारों की एफआईआर दर्ज करवाई गई.