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पूर्व मंत्री महेश जोशी को बड़ा झटका, JJM घोटाले में राजस्थान हाईकोर्ट ने खाजिर की जमानत याचिका

जयपुर, 26 अगस्त।

प्रदेश के पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा हैं. राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने महेश जोशी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया हैं.

900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के मामले में महेश जोशी ने मई माह में जमानत याचिका दायर कि थी.

याचिका पर सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 8 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

मंगलवार को न्यायालय समय शुरू होने के साथ ही जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने जमानत पर फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया.

जमानत खारिज करने के कारणों को विस्तृत आदेश में लिखा गया हैं.

24 अप्रैल से जेल में

पूर्व मंत्री महेश जोशी को इसी वर्ष 24 अप्रैल को ED ने लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था.

अप्रैल में ही महेश जोशी को पत्नी के निधन पर दो बार अंतरिम जमानत दी गयी थी.

बाद में रेगुलर जमानत याचिका को ईडी मामलों की विशेष जिला अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर कि गयी.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

900 करोड़ से अधिक के जेजेएम घोटाले में पहले ईडी ने महेश जोशी को केवल पूछताछ कर ​छोड दिया था.

जबकि मामले के सहआरोपियों को ईडी ने गिरफतार कर जेल भेज दिया था.

सहआरेापियों ने बाद में सुप्रीम कोर्ट में दायर कि जमानत याचिका में इस बात का हवाला दिया कि मामले में जिस मंत्री को लाभ पहुंचाने की बात कही गयी उसे आरोपी ही नहीं बनाया गया हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दो जमानत याचिकाओं पर इस बात को रेखाकिंत भी किया. वही राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इसी तथ्य का उल्लेख करते हुए अन्य सहआरोपी को जमानत दे दी.

ईडी के पास सबूत नहीं

जमानत याचिका पेश कर महेश जोशी कि आरे से हाईकोर्ट में दलील दी गयी थी कि एसीबी में दर्ज मूल केस में महेश जोशी का नाम नहीं है और नोटिस देने एक साल बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया.

जोशी के अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि ईडी के पास कोई सबूत नहीं है कि उसने किसी तरह के पैसे का लेनदेन किया हैं.

ईडी का विरोध

जमानत का विरोध करते हुए ईडी की ओर से अधिवक्ता अक्षय भारद्वाज ने कहा था- प्रकरण में एसीबी की ओर से दर्ज अन्य एफआईआर में महेश जोशी की भूमिका को बताया गया है.

जमानत याचिका पर ईडी की ओर से अधिवक्ता अक्षय भारद्वाज ने कड़ा विरोध कराया. ईडी कि ओर से कोर्ट में मुख्य रूप से 5 दलीलें पेश कि गयी.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि केवल सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी जा सकती.

यह तर्क देना कि अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, स्वयं में महेश जोशी को को जमानत देने का आधार नहीं हो सकता.

ईडी ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत जमानत के लिए कड़े प्रावधान निर्धारित किए गए हैं, क्योंकि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है। याचिकाकर्ता की भूमिका केवल बिचौलिए संजय बड़ाया की अवैध रूप से सहायता करने और ठेकेदारों को 2.1 करोड़ रुपये की रिश्वत के बदले टेंडर दिलवाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसने दो कंपनियों द्वारा जमा कराए गए जाली IRCON प्रमाण पत्रों को अनुमोदित करने के निर्देश भी दिए.

इसलिए महेश जोशी की भूमिका अन्य सह-आरोपियों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर थी.

स्वतंत्र अपराध है मनी लॉन्ड्रिंग:

ईडी कि आरे से कहा गया कि एफआईआर संख्या 245/2024 (जो एसीबी द्वारा दर्ज की गई) में महेश जोशी को आरोपी के रूप में नामित किया गया है, और मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध स्वतंत्र और पृथक अपराध है, जो किसी अन्य अपराध से जुड़कर नहीं देखा जा सकता.

50 लाख की धनराशि अपराध से प्राप्त आय

ईडी ने कह कि M/s सुमंगलम LLP के बैंक खाते में प्राप्त 50 लाख रुपये जिसमें याचिकाकर्ता के पुत्र रोहित जोशी निदेशक हैं, अपराध से अर्जित धन है.

ईडी ने कहा कि यह राशि एक ऋण की राशि नहीं थी क्योंकि जिन व्यक्तियों/फर्मों से यह कथित ऋण लिया गया, वे न तो महेश जोशी को जानते थे और न ही उनके पुत्र रोहित जोशी को.

वास्तव में, यह JJM घोटाले में प्राप्त रिश्वत की राशि थी, जिसे संजय बड़ाया की मदद से विभिन्न फर्मों/व्यक्तियों के माध्यम से घुमाकर ट्रांसफर किया गया.

गिरफ्तारी का कारण केवल सहयोग न करना नहीं

ईडी ने कहा कि महेश जोशी की गिरफ्तारी का कारण मात्र जाँच में सहयोग न करना नहीं था, बल्कि वह PHED मंत्री के रूप में पूरे JJM घोटाले को अंजाम देने में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। इसी घोटाले से अपराध की आय उत्पन्न हुई, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया.

ईडी ने कहा कि उनके विरुद्ध मामला केवल सह-आरोपियों के बयानों पर आधारित नहीं है, बल्कि ईडी के पास याचिकाकर्ता को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त सामग्री और दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं.

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