सरकार ने कहा – “हजारों लोग बेघर हो जाएंगे”, कोर्ट ने कहा – “अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
जयपुर, 11 नवंबर 2025
Rajasthan Highcourt ने सांगानेर की 86 अवैध कॉलोनियों को हटाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आवासन मंडल (Housing Board) और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाकर पालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि “अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
पूर्व आदेंशो की पालना में जवाब पेश नहीं करने पर एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा की खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए सरकार को जवाब पेश करने का अंतिम मौका दिया।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी और डॉ. टी.एन. शर्मा ने दलील दी कि 20 अगस्त 2025 के हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक अतिक्रमण नहीं हटाए गए हैं और कई जगह निर्माण कार्य अब भी जारी हैं।
इस पर Rajasthan Highcourt ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि “सरकारी भूमि पर कब्जा और निर्माण कानूनन अपराध है, इसे तत्काल ध्वस्त किया जाए।”
4000 बीघा भूमि पर अतिक्रमण
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार कि ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा ने आज अदालत को बताया कि राजधानी जयपुर में बी टू बाईपास से इंडिया गेट तक करीब 5000 बीघा भूमि को अवाप्त किया गया था.
जिसमें 1000 बीघा भूमि पर विवाद है और कुल 4000 बीघा भूमि पर आबादी बस चुकी हैं.
सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि हजारो लोग बेघर हो जायेंगे.
सरकार के जवाब पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि अतिक्रमण की अनुमति नही दी जा सकती.
और ऐसा किया गया तो भविष्य में यह एक नया रास्ता बन जाएगा.
जिम्मेदार अधिकारियों की सूची सौंपें
Rajasthan Highcourt में सोमवार को सुनवाई के दौरान अवैध कॉलोनी के निवासियों की ओर से 8 प्रार्थना पत्र पेश किए गए.
Rajasthan Highcourt ने जेडीए और हाउसिंग बोर्ड को आदेश दिया कि वे 20 अगस्त 2025 के अतिक्रमण हटाने के आदेश की पालना करें।
Highcourt ने निर्देश दिया कि इन अवैध कॉलोनियों में अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार अधिकारी — जो वर्तमान पदों पर हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं — उन सभी के नामों की सूची कोर्ट में पेश की जाए।
Highcourt ने यह भी चेतावनी दी कि जो अधिकारी आदेश की पालना में लापरवाही बरत रहे हैं, उनके विरुद्ध फौजदारी कार्रवाई के लिए राज्यपाल को अनुरोध किया जाएगा।
8 प्रार्थना पत्र पेश, पक्षकार बनाने से इंकार
Highcourt में सांगानेर क्षेत्र की अवैध कॉलोनियों की ओर से कई समितियों ने पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र पेश किए। इनमें सन्नी विकास समिति और श्रीराम कॉलोनी के प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई हुई।
सन्नी नगर के प्रार्थना पत्र में न्यायालय ने कई अनियमितताएं पाईं और कड़ी टिप्पणी करते हुए हाउसिंग सोसाइटी के पदाधिकारियों के नाम पूछे। इस पर सन्नी नगर की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नाम नहीं बता सके।
Highcourt ने कहा कि आपकी समिति पांच वर्ष पहले बनी है और प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया।
इसके अलावा अन्य समितियों के प्रार्थना पत्र न्यायालय के रिकॉर्ड पर नहीं आए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता अजित शर्मा ने बताया कि उनका प्रार्थना पत्र भी पत्रावली में प्रस्तुत नहीं हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि किसी को पक्षकार नहीं बनाया जाएगा, लेकिन इंटरवीनर के रूप में सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
ये हैं मामला
पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की याचिका में आरोप लगाया गया था कि सांगानेर क्षेत्र की 86 कॉलोनियां हाउसिंग बोर्ड की भूमि पर बनी हैं, जिन्हें भूमाफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से नियमित किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2025 को आदेश दिया था कि आठ सप्ताह में सभी अवैध कब्जे हटाए जाएं और रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन राहत नहीं मिलने पर याचिका वापस लेनी पड़ी। इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई।
9 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई 9 दिसंबर 2025 को तय की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने आदेश दिया कि सरकार और विभाग 20 अगस्त के आदेश की पूर्ण पालना कर पालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।