जोधपुर, 8 दिसंबर
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने राज्य सरकार द्वारा एक ही कर्मचारी को बार-बार पदस्थापन आदेशों की “प्रतीक्षा में रखने” की कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए पंचायती राज विभाग के उपायुक्त एवं अतिरिक्त सचिव को 5 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि 1 दिसंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा मामले में स्टे देने के बावजूद याचिकाकर्ता को पुनः प्रतीक्षा में रखने का आदेश जारी कर दिया।
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश देते हुए कहा कि उनका आदेश सरकारी सेवा नियमों और कोर्ट के पहले के आदेश के खिलाफ है, जिस पर स्पष्टीकरण देना होगा।
बार-बार प्रतीक्षा में
याचिकाकर्ता मुकेश मोड़ेपटले की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता मुकेश को पूर्व में पदस्थापन आदेश जारी करने के बजाय प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया था।
मुकेश ने इस आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर कोर्ट ने 1 दिसंबर 2025 को एपीओ (APO) करने के आदेश पर स्टे दे दिया।
लेकिन इसके बावजूद, राज्य सरकार ने उसी तारीख 1 दिसंबर को ही याचिकाकर्ता को दोबारा एपीओ (Awaiting Posting Order) कर दिया।
जिस पर याचिकाकर्ता ने मजबूर होकर दोबारा याचिका दाखिल की।
कोर्ट आदेश की अवहेलना
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुणाल उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि विभाग ने आदेश जारी कर सरकारी नियमों और कोर्ट आदेश की खुली अवहेलना की है।
अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध की गई कार्रवाई राजकीय सेवा नियमों के नियम 25-ए का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद माना कि सरकार की कार्रवाई न सिर्फ नियम 25-ए के विपरीत है, बल्कि हाईकोर्ट द्वारा पारित पूर्व आदेशों की स्पष्ट उल्लंघना भी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर को जारी किए गए एपीओ आदेश पर भी स्टे लगाते हुए पंचायती राज विभाग के उपायुक्त एवं अतिरिक्त सचिव को 5 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।