जोधपुर, 26 सितम्बर 2025
जोधपुर की सीबीआई अदालत ने 10 साल पुराने बहुचर्चित आयकर विभाग में रिश्वत मामले में तत्कालीन आयकर आयुक्त पीके शर्मा और आयकर अधिकारी शैलेन्द्र भंडारी को दोषी माना हैं.
सीबीआई अदालत के विशेष जज भूपेन्द्र सनाढ्य ने दोनो दोषियों को 4—4 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई हैं.
इस मामले में ज्वेलर चंद्रप्रकाश कट्टा को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया गया है.
वर्ष 2015 के इस मामले में दोनो अधिकारियों पर अदालत ने 110000 का अर्थदण्ड भी लगाया हैं.
ये हैं मामला
वर्ष 2015 में आयकर अधिकारी शैलेन्द्र भंडारी ने परिवादी किशोर जैन से उनके आयकर एसेसमेंट में सहायता देने के बदले 25 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी.
रिश्वत की यह राशि बाद 15 लाख रुपये तय हुई.
परिवादी ने इस मामले में सीबीआई में शिकायत दर्ज कराने पर सीबीआई ने जांच के बाद 1 अप्रैल 2015 को जोधपुर के स्वास्थ्य गेट चौराहा पर स्थित अनंत राम कट्टा ज्वेलर्स की दुकान पर कार्रवाई की.
भंडारी को रिश्वत राशि के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया.
पूछताछ में भंडारी ने स्वीकार किया कि यह राशि मुख्य आयकर आयुक्त पीके शर्मा के लिए ली गई थी.
दूसरे केस में फैसला 9 अक्टूबर को
सीबीआई ने इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का भी मामला दर्ज किया था.
सीबीआई ने आरोप लगाया कि दोनो अधिकारियों ने आय से 35 फीसदी से अधिक संपत्ति जमा की थी.
इस मामले पर भी अदालत में ट्रायल पूर्ण हो चुकी हैं और आगामी 9 अक्टूबर को सीबीआई अदालत फैसला सुनाएगी.