कोर्ट में बचाव पक्ष का दावा- समान तथ्यों पर पहले से दर्ज है एफआईआर, समझौते के दबाव में दर्ज कराई गई दूसरी रिपोर्ट; अदालत ने एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
जयपुर। राजधानी जयपुर के चर्चित हाईप्रोफाइल ब्लैकमेलिंग और कथित हनीट्रैप मामले में शुक्रवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब गिरफ्तार आरोपी युवती ने अदालत में खुद को पीड़िता बताते हुए जमानत की गुहार लगाई।
मामले की सुनवाई महानगर प्रथम न्यायालय में हुई, जहां दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए। अदालत ने फिलहाल युवती को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए जमानत याचिका पर सुनवाई शनिवार तक के लिए टाल दी है।
सुनवाई के दौरान आरोपी युवती की ओर से अधिवक्ता लोकेश शर्मा ने अदालत में कई महत्वपूर्ण तथ्य रखे।
मिलीभगत कर एक ही मामले में दूसरी एफआईआर!
बचाव पक्ष ने दावा किया कि जिस मामले में युवती को गिरफ्तार किया गया है, उसी विवाद और समान तथ्यों के आधार पर पहले भी महेश नगर थाने में एक एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें युवती को अदालत से जमानत मिल चुकी है।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पहले से मामला लंबित होने के बावजूद दबाव बनाने और समझौते के लिए पुलिस से मिलीभगत कर दूसरी एफआईआर दर्ज कराई गई।
युवती ने दर्ज करायी थी कारोबारी के खिलाफ भी शिकायत
बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि युवती ने पूर्व में कारोबारी विमल डागा के खिलाफ गुरुग्राम और बेंगलुरु में भी शिकायतें दर्ज कराई थीं।
अधिवक्ता लोकेश शर्मा ने अदालत में कहा कि वर्तमान एफआईआर उसी पुराने विवाद का हिस्सा है और इसका उद्देश्य युवती पर दबाव बनाना है। अधिवक्ता के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में युवती स्वयं पीड़िता है, न कि आरोपी।
कारोबीरी की दूसरी एफआईआर में गंभीर आरोप
दूसरी ओर, महेश नगर थाने में दर्ज एफआईआर में परिवादी एवं कारोबारी विमल डागा ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार, उसकी पूर्व इंटर्न रही युवती, उसके सहयोगी धीरज कुमार और अन्य लोगों ने मिलकर उसे लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया तथा झूठे मुकदमों में फंसाने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर करोड़ों रुपये की मांग की।
एफआईआर में यह भी आरोप है कि आरोपी पक्ष ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग कर अश्लील वीडियो और फोटो वायरल करने की धमकियां दीं। परिवादी का दावा है कि इन कथित धमकियों के चलते उससे करीब 90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं, जबकि 50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग लगातार की जा रही थी।
बचाव पक्ष का विरोध
हालांकि, युवती ने जमानत याचिका में इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताया है।
बचाव पक्ष का कहना है कि परिवादी ने स्वयं शादीशुदा होने के बावजूद युवती को विवाह का झांसा दिया था और वर्तमान मामला उसी विवाद की परिणति है।
जमानत आवेदन में यह भी कहा गया है कि युवती का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तथा उसके खिलाफ वर्तमान मामले के अलावा कोई अन्य आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है।
साथ ही अदालत को भरोसा दिलाया गया कि जमानत मिलने पर वह जांच में पूरा सहयोग करेगी और किसी भी गवाह या साक्ष्य को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगी।
कल होगा फैसला
अब इस हाईप्रोफाइल मामले में शनिवार को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अदालत के आगामी फैसले से यह तय होगा कि आरोपी युवती को राहत मिलती है या उसे अभी और समय तक हिरासत में रहना पड़ेगा।
