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आज जयपुर बनेगा वैश्विक न्याय कूटनीति का केंद्र : CJI करेंगे Commonwealth Peace Mediation Conference का आगाज

Jaipur Hosts Commonwealth Peace Mediation Conference 2026 Today | CJI Surya Kant to Inaugurate Global Judicial Summit

52 कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आज से शुरू, ‘Jaipur Peace Mediation Declaration’ के जरिए दुनिया को मिलेगा शांति आधारित न्याय का नया मॉडल

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर आज वैश्विक न्याय व्यवस्था के सबसे बड़े मंचों में से एक का साक्षी बनने जा रही है।

Commonwealth Peace Mediation and Rule of Law Conference (CPMC-2026) का आज भव्य आगाज होगा।

तीन दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, अटॉर्नी जनरल, मध्यस्थ (Mediators), विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटेंगे और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, त्वरित तथा मानवीय बनाने के उपायों पर मंथन करेंगे।

31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य Peace Mediation और Rule of Law को वैश्विक न्याय व्यवस्था का मजबूत आधार बनाना है।

यह पहला अवसर है जब भारत कॉमनवेल्थ देशों के बीच शांति आधारित मध्यस्थता (Peace Mediation) के वैश्विक एजेंडे का नेतृत्व करता नजर आएगा।

आज शाम होगा भव्य उद्घाटन

आज शाम 6 बजे होटल द ललित, जयपुर में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राजस्थान हाईकोर्ट के ACJ संजीव प्रकाश शर्मा, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्टीवन थिरु, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह सहित देश-विदेश की न्यायपालिका और विधि जगत की कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी।

यह सम्मेलन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA), सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन (CLA) और निवारण (Nivaaran) के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

भारत दुनिया के सामने रखेगा ‘Peace Mediation’ का नया मॉडल

सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल Mediation यानी विवादों के समाधान पर चर्चा नहीं होगी, बल्कि Peace Mediation की उस अवधारणा पर वैश्विक विमर्श होगा, जिसका उद्देश्य केवल मुकदमे समाप्त करना नहीं, बल्कि पक्षकारों के बीच वर्षों से चली आ रही कटुता, अविश्वास और टकराव को भी समाप्त कर स्थायी शांति स्थापित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्याय व्यवस्था में इस मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाता है तो वर्षों तक अदालतों में लंबित रहने वाले अनेक विवाद अपेक्षाकृत कम समय में सुलझाए जा सकते हैं और न्याय व्यवस्था अधिक मानवीय एवं प्रभावी बन सकती है।

आठ महत्वपूर्ण विषयों पर होगा वैश्विक मंथन

तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान आठ प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।

इनमें पर्यावरण न्याय, पारिवारिक मध्यस्थता, आपराधिक न्याय में पुनर्स्थापनात्मक दृष्टिकोण, वाणिज्यिक विवाद समाधान, कार्यस्थल विवाद, इंफ्रास्ट्रक्चर एवं सार्वजनिक परियोजनाओं से जुड़े विवाद, सामुदायिक न्याय तथा वैश्विक शांति के लिए Peace Mediation जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

इन सत्रों में यह भी चर्चा होगी कि आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और बदलते वैश्विक परिवेश के बीच न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी कैसे बनाया जाए।

Jaipur Peace Mediation Declaration’ रचेगी इतिहास

सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण 2 अगस्त को आएगा, जब विभिन्न कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि “Jaipur Peace Mediation Declaration 2026” को औपचारिक रूप से अपनाएंगे।

इस घोषणा-पत्र का उद्देश्य कॉमनवेल्थ देशों में Peace Mediation, Conflict Resolution, Rule of Law और न्याय तक त्वरित एवं प्रभावी पहुंच के लिए साझा सिद्धांत तैयार करना है। माना जा रहा है कि यह घोषणा-पत्र भविष्य में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग और मध्यस्थता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज बन सकता है।

भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर

यह सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं, बल्कि भारत की न्यायिक सोच, मध्यस्थता मॉडल और Judicial Diplomacy को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक ऐतिहासिक अवसर है।

राजस्थान ने पिछले वर्षों में मध्यस्थता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए हजारों मामलों का सफल समाधान कराया है। इसी अनुभव के आधार पर जयपुर को इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी मिली है।

यदि इस सम्मेलन से निकलने वाले सुझावों और Jaipur Peace Mediation Declaration को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में न केवल कॉमनवेल्थ देशों की न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, बल्कि भारत वैश्विक Peace Mediation आंदोलन का अग्रणी नेतृत्वकर्ता बनकर भी उभर सकता है।

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