जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में काम करने वाले एडवोकेट क्लर्क और वहां आने वाले लॉ इंटर्न को लेकर सख्त नियम तय कर दिए हैं।
हाईकोर्ट ने एडवोकेट क्लर्कों के रजिस्ट्रेशन और आईडी को जरूरी कर दिया है।
बिना रजिस्ट्रेशन या वैध अस्थायी आईडी के एडवोकेट क्लर्क के तौर पर काम करने पर कार्रवाई की जा सकती है, जरूरत पड़ने पर FIR भी दर्ज हो सकती है।
वहीं लॉ इंटर्न और कोर्ट की कार्यवाही देखने आने वाले छात्रों के लिए ड्रेस कोड और आईडी भी अनिवार्य की गई है।
जस्टिस रवि चिरानिया ने ये निर्देश एडवोकेट क्लर्कों के रजिस्ट्रेशन, कोर्ट परिसर में उनके प्रवेश और आचरण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिए।
मामला कोर्ट के सामने तब आया, जब एडवोकेट क्लर्कों के कोर्ट में बैठने और काम करने के तरीके को लेकर दो घटनाएं सामने आईं।
रिकॉर्ड के मुताबिक, एक व्यक्ति कोर्ट रूम में ईयरफोन लगाकर मोबाइल चला रहा था।
वहीं दूसरा एडवोकेट क्लर्क अपनी तय जगह के बजाय दूसरी जगह बैठा था और उसका व्यवहार भी कोर्ट की गरिमा के तहत नहीं पाया गया।
हाईकोर्ट ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए एडवोकेट क्लर्कों के रजिस्ट्रेशन, पहचान और कोर्ट परिसर में उनके आचरण को लेकर स्पष्ट नियम तय किए।
330 से ज्यादा एडवोकेट क्लर्क, रजिस्टर्ड सिर्फ 163
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि फिलहाल 330 से ज्यादा लोग एडवोकेट क्लर्क के तौर पर काम कर रहे हैं।
वहीं राजस्थान हाईकोर्ट नियम, 1952 के तहत इनमें से सिर्फ 163 एडवोकेट क्लर्क रजिस्टर्ड हैं।
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि आखिरी बार रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 2019 में हुई थी।
हाईकोर्ट ने माना कि एडवोकेट क्लर्क न्यायिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। उन्हें कोर्ट परिसर में काम के सिलसिले में कई ऐसी जगहों तक पहुंच मिलती है, जहां आम लोगों की सामान्य पहुंच नहीं होती।
ऐसे में कोर्ट ने उनकी पहचान और रजिस्ट्रेशन की स्पष्ट व्यवस्था को जरूरी माना।
10 दिन में रजिस्ट्रेशन के लिए करना होगा आवेदन
हाईकोर्ट ने फिलहाल काम कर रहे ऐसे एडवोकेट क्लर्कों को 10 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है, जो नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र हैं।
आवेदन जरूरी दस्तावेजों के साथ एडवोकेट क्लर्क एसोसिएशन के जरिए जमा किए जाएंगे।
इसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया रजिस्ट्रार न्यायिक और रजिस्ट्रार प्रशासन के स्तर पर आगे बढ़ेगी।
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को 45 दिन के अंदर पूरा करने का निर्देश दिया है।
इस दौरान पात्र आवेदकों को अस्थायी आईडी कार्ड दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद उन्हें स्थायी आईडी कार्ड जारी किया जाएगा।
पुलिस वेरिफिकेशन भी होगा जरूरी
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रेशन के साथ पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य किया है।
आवेदक को अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले, गिरफ्तारी या सजा से जुड़ी जानकारी देनी होगी।
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने भर से उसका आवेदन अपने आप खारिज नहीं होगा। हर मामले को अलग-अलग देखकर फैसला किया जाएगा।
कोर्ट ने यह व्यवस्था इसलिए रखी है ताकि कोर्ट परिसर में काम करने वाले लोगों की पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी प्रशासन के पास रहे।
बिना ID क्लर्क के तौर पर काम किया तो कार्रवाई
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि जो पात्र एडवोकेट क्लर्क 10 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन नहीं करेंगे, उन्हें तय समय के बाद कोर्ट परिसर में क्लर्क के तौर पर काम करने की अनुमति नहीं होगी।
वहीं बिना रजिस्ट्रेशन या वैध अस्थायी आईडी के एडवोकेट क्लर्क के तौर पर काम करते पाए जाने पर हिरासत में लेने और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मामले को देखते हुए FIR दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
रजिस्ट्रेशन के बाद जारी होने वाली स्थायी आईडी में QR Code भी होगा। इससे एडवोकेट क्लर्क की पहचान और जरूरी जानकारी आसानी से जांची जा सकेगी।
एक साल से कम पुराने क्लर्कों के लिए अलग नियम
जो लोग एक साल से कम समय से एडवोकेट क्लर्क के तौर पर काम कर रहे हैं और अभी रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र नहीं हैं, उनके लिए भी हाईकोर्ट ने अलग व्यवस्था तय की है।
ऐसे लोग किसी रजिस्टर्ड एडवोकेट क्लर्क के साथ ही काम कर सकेंगे।
साथ ही, जिस एडवोकेट के साथ वे जुड़े हैं, उनकी सीधी निगरानी में काम करना होगा। इसके लिए संबंधित एडवोकेट को जरूरी प्रमाणपत्र या शपथपत्र देना होगा।
यूनिफॉर्म, मोबाइल और बैठने की जगह भी तय
हाईकोर्ट ने एडवोकेट क्लर्कों के लिए तय यूनिफॉर्म पहनना जरूरी किया है।
वैध आईडी के बिना भी कोर्ट परिसर में काम करने की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट रूम में मोबाइल का गलत इस्तेमाल, ईयरफोन या ईयरबड लगाकर बैठना और एडवोकेट क्लर्कों के लिए तय जगह के अलावा कहीं और बैठना भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि कोर्ट की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना वहां मौजूद हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
लॉ इंटर्न के लिए भी ड्रेस कोड तय
हाईकोर्ट ने लॉ इंटर्न और कोर्ट की कार्यवाही देखने आने वाले लॉ स्टूडेंट्स के लिए भी ड्रेस और पहचान से जुड़े नियम तय किए हैं।
पुरुष इंटर्न और छात्रों को फॉर्मल ड्रेस के साथ टाई पहननी होगी।
महिला इंटर्न और छात्राएं फॉर्मल भारतीय परिधान के साथ ब्लैक कोट पहन सकती हैं। अगर शर्ट और ट्राउजर पहनती हैं तो टाई भी जरूरी होगी।
कोर्ट परिसर में आने के दौरान कॉलेज या यूनिवर्सिटी का आईडी कार्ड और हाईकोर्ट की ओर से जारी पास साथ रखना होगा।
संबंधित एडवोकेट और चैंबर की जिम्मेदारी होगी कि वे इंटर्न को कोर्ट के ड्रेस और आचरण से जुड़े नियमों की जानकारी दें।
28 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने इन निर्देशों को लागू करने के लिए तय समयसीमा भी दी है।
अगर आदेश लागू करने में किसी तरह की दिक्कत आती है या अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ती है तो संबंधित अधिकारी या एसोसिएशन कोर्ट के सामने आवेदन कर सकते हैं।
मामले को अब 28 अक्टूबर 2026 को अनुपालन के लिए फिर सूचीबद्ध किया गया है।
इन निर्देशों के बाद एडवोकेट क्लर्कों और लॉ इंटर्न के लिए कोर्ट परिसर में प्रवेश, पहचान, ड्रेस और आचरण से जुड़े नियम पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गए हैं।
