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L&L Exclusive : 20 साल बाद मेरी भविष्यवाणी सच साबित हो रही है, “वकील मजाक में भी कहते हैं-डोम से दूर रहना” : रणजीत जोशी

Rajasthan High Court Building Safety Concerns: Bar Association President Calls for Independent Structural Audit
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने 2007 में दी थी चेतावनी, बोले-भवन की स्वतंत्र स्ट्रक्चरल जांच हो, असुरक्षित हो तो नई बिल्डिंग बने

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

लॉज एंड लीगल्स से विशेष बातचीत में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने कहा कि वर्ष 2006-07 में हाईकोर्ट को झालामंड स्थानांतरित करने का विरोध करते समय उन्होंने जिन सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को उठाया था, करीब 20 साल बाद वे सवाल फिर सामने खड़े हो गए हैं।

उन्होंने नए हाईकोर्ट भवन की स्वतंत्र संरचनात्मक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि विशेषज्ञ भवन को असुरक्षित पाते हैं तो केवल मरम्मत के भरोसे नहीं रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर नई इमारत बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।

अध्यक्ष रणजीत जोशी ने दावा किया है कि उन्होंने करीब दो दशक पहले ही झालामंड में हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग बनाए जाने का विरोध करते हुए इसकी साइट, बाढ़, एयरपोर्ट की नजदीकी और निर्माण सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई थीं।

लॉज एंड लीगल्स से हुई विशेष बातचीत में रणजीत जोशी का कहना है कि वर्ष 2025 में हाईकोर्ट रजिस्ट्री की ओर से निर्माण से जुड़े लोगों/कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज होने और भवन में लगातार सामने आ रही क्षतियों ने उन पुराने सवालों को और गंभीर बना दिया है।

हालांकि FIR में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं और उनकी पुष्टि जांच तथा अदालत की प्रक्रिया से होगी, लेकिन अध्यक्ष रणजीत जोशी के अनुसार यह घटनाक्रम भवन के निर्माण और सुरक्षा की स्वतंत्र जांच की जरूरत को स्पष्ट करता है।

“2007 में ही कहा था-यह जगह सुरक्षित नहीं”

रणजीत जोशी के अनुसार, वर्ष 2007 में एसोसिएशन ने नई हाईकोर्ट बिल्डिंग के प्रस्तावित स्थल के विरोध में करीब एक महीने तक आंदोलन और हड़ताल की थी।

उस दौरान राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर सहित प्रमुख समाचार पत्रों और राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय चैनलों में उन्होंने इंटरव्यू देकर कहा था कि इस स्थान पर हाईकोर्ट जैसी संवेदनशील न्यायिक संस्था का निर्माण सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।

उनका दावा है कि आंदोलन के दौरान लगातार सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए गए, लेकिन सरकार या हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से उन आशंकाओं का कोई प्रभावी सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया।

“आज 2007 के सवाल फिर सामने खड़े हैं”

रणजीत जोशी का कहना है कि उस समय उनके साथ एसोसिएशन के कई वरिष्ठ अधिवक्ता और नेता भी आंदोलन में सक्रिय रहे थे।

उन्होंने कहा कि उस वक्त उठाए गए सवाल किसी राजनीतिक विरोध के लिए नहीं बल्कि बार और बेंच की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए गए थे।

आज जब भवन में विभिन्न स्तरों पर क्षति, दरारें, टूटे हुए फर्श और डोम से संबंधित समस्याओं की बातें सामने आ रही हैं, तो पुराने सवाल फिर प्रासंगिक हो गए हैं।

“यह जगह कभी जोधपुर का डंपिंग क्षेत्र थी

रणजीत जोशी ने दावा किया कि जिस स्थान पर वर्तमान हाईकोर्ट परिसर बना है, वहां पहले जोधपुर का डंपिंग क्षेत्र था।

रणजीत जोशी के अनुसार उन्होंने स्वयं साइट का निरीक्षण किया था और उस समय वहां डंपिंग क्षेत्र से जुड़े संकेत मौजूद थे।

उनका दावा है कि पुराने समय में शहर के गंदे पानी और कचरे के जमाव से भी यह क्षेत्र प्रभावित रहा था।

उन्होंने यह भी कहा कि परिसर के आसपास के कुछ हिस्सों के संबंध में पुराने श्मशान स्थलों की जानकारी भी उस समय सामने रखी गई थी।

बाढ़ की आशंका-“ऐसी बाढ़ आई तो क्या होगा?

वर्ष 2007 में विरोध का एक प्रमुख आधार बाढ़ की आशंका भी था।

अध्यक्ष ने जोधपुर में पूर्व में आई भीषण बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भविष्य में उसी तरह की बाढ़ आती है तो इतने बड़े न्यायिक परिसर की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

उनका दावा है कि प्रस्तावित स्थल की ऊंचाई और आसपास के प्राकृतिक जल प्रवाह को लेकर भी उस समय सवाल उठाए गए थे।

एयरपोर्ट की नजदीकी पर भी जताई थी चिंता

पूर्व अध्यक्ष ने हाईकोर्ट की एयरपोर्ट से नजदीकी को लेकर भी सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए थे।

उनका कहना था कि विमान दुर्घटना की स्थिति में हाईकोर्ट परिसर में बड़ी जनहानि का खतरा हो सकता है।

उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व हुई एक विमान घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पायलट ने हाईकोर्ट के आसपास खाली स्थान पर विमान उतारकर संभावित हादसे को टाल दिया था।

हालांकि इस घटना और उससे जुड़े सुरक्षा निष्कर्षों की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से ही की जा सकती है।

“युद्ध हुआ तो यह भी संवेदनशील लक्ष्य हो सकता है”

रणजीत जोशी ने वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का भी हवाला देते हुए दावा किया कि उस समय जोधपुर पर बमबारी हुई थी और इस क्षेत्र के आसपास भी बम पाए गए थे।

जोशी का तर्क था कि भविष्य में युद्ध की स्थिति में हाईकोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सरकारी इमारत रणनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकती है।

एयरपोर्ट की नजदीकी के कारण विमान संचालन से होने वाले शोर को भी उन्होंने न्यायिक कार्यवाही में संभावित व्यवधान का मुद्दा बताया था।

उद्घाटन और फिर सामने आने लगीं समस्याएं

नई हाईकोर्ट बिल्डिंग का शिलान्यास 20 अप्रैल 2007 को हुआ था, जिसका उद्घाटन 2019 में किया गया।

जोशी के अनुसार, उद्घाटन के समय भी मौसम खराब हुआ और तेज बारिश के कारण परिसर में अस्थायी व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचा।

इसके बाद उनके अनुसार भवन में अलग-अलग समय पर फर्श की टाइल्स टूटने, प्लास्टर क्षतिग्रस्त होने और अन्य निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आने लगीं।

“बारिश में डोम के अंदर आने लगा था पानी”

रणजीत जोशी ने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दलवीर भंडारी के दौरे के दौरान भारी बारिश हुई थी।

उनके अनुसार, इसी दौरान उन्होंने भवन के डोम क्षेत्र में पानी तेजी से अंदर आते हुए देखा और तत्काल इसकी जानकारी संबंधित लोगों को दी।

उनका दावा है कि बाद के वर्षों में भी भवन में कई जगहों पर फर्श टूटने और अन्य क्षतियों की शिकायतें सामने आती रहीं।

“बिल्डिंग में दरार आई तो हाईकोर्ट को पत्र लिखा”

जोशी के अनुसार, हाईकोर्ट परिसर के एक हिस्से में ऊपर से नीचे तक बड़ी दरार दिखाई देने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट प्रशासन को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी थी।

उन्होंने दावा किया कि भवन में अलग-अलग स्थानों पर फर्श, प्लास्टर और अन्य हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति लगातार दिखाई देती रही है।

हालिया बारिश के बाद डोम के पिलर्स के आसपास समस्या सामने आने और संबंधित क्षेत्र को प्रतिबंधित किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

2024 की FIR ने बढ़ाई चिंता

रणजीत जोशी के बयान का सबसे अहम हिस्सा 2024 में दर्ज FIR है।

उनके अनुसार, हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने निर्माण से जुड़ी कंपनी और संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

उनका दावा है कि FIR में निर्माण की गुणवत्ता और भवन में सामने आई समस्याओं से संबंधित आरोप हैं।

उन्होंने कहा कि यह FIR 2007 में उठाई गई निर्माण और सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है।

लेकिन कानूनी तौर पर FIR को दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। अंतिम सत्य जांच और न्यायालय के निर्णय से ही सामने आएगा।

“वकील मजाक में भी कहते हैं-डोम से दूर रहना”

भवन के डोम को लेकर रणजीत जोशी कहते हैं कि हाईकोर्ट आने वाले अधिवक्ताओं के बीच अब यह बात सुनने को मिलती है—

“डोम से दूर रहना भाई… कहीं गिर न जाए।”

उनके अनुसार, जो बात कभी मजाक में कही जाती थी, वह अब वास्तविक सुरक्षा चिंता में बदलती दिखाई दे रही है।

उन्होंने दावा किया कि डोम के आसपास के हिस्से को प्रतिबंधित कर दिया गया है और आवाजाही सीमित की गई है।

इमरजेंसी गेट खोला गया-क्या यह सुरक्षा चिंता का संकेत?

जोशी ने हाईकोर्ट परिसर में इमरजेंसी गेट खोले जाने का भी उल्लेख किया।

उनका कहना है कि यदि प्रशासन को आपात स्थिति में वैकल्पिक निकास की व्यवस्था करनी पड़ी है तो इसे भी भवन की सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

हालांकि इमरजेंसी गेट खोले जाने का वास्तविक कारण और प्रशासनिक निर्णय हाईकोर्ट प्रशासन ही स्पष्ट कर सकता है।

“डोम में हादसा हुआ तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं”

रणजीत जोशी का कहना है कि डोम के आसपास कोर्ट रूम, चैंबर और अन्य महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में यदि किसी संरचनात्मक हिस्से में गंभीर हादसा होता है तो उसका प्रभाव व्यापक हो सकता है।

उनका कहना है कि हाईकोर्ट में रोजाना बड़ी संख्या में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग आते हैं। इसलिए किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

“सिर्फ रिपेयर नहीं, जरूरत हो तो नई बिल्डिंग”

पूर्व अध्यक्ष ने हाईकोर्ट प्रशासन से स्वतंत्र Structural Safety Audit कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि विशेषज्ञ जांच में यदि भवन सुरक्षित पाया जाता है तो आवश्यक मरम्मत कराई जाए, लेकिन यदि संरचनात्मक रूप से गंभीर खतरा सामने आता है तो केवल पैबंद लगाकर काम नहीं चलाया जा सकता।

उन्होंने कहा—

“हाईकोर्ट प्रशासन को इस भवन की स्वतंत्र और विशेषज्ञों से जांच करानी चाहिए। अगर बिल्डिंग असुरक्षित है तो हजारों अधिवक्ताओं और माननीय न्यायाधीशों की जान को जोखिम में डालकर इसे चलाना उचित नहीं है। जरूरत पड़े तो इस बिल्डिंग को हटाकर सुरक्षित स्थान पर नई बिल्डिंग बनाई जाए।”

1937 की पुरानी इमारत से तुलना

अध्यक्ष रणजीत जोशी ने मौजूदा हेरिटेज हाईकोर्ट बिल्डिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि पुरानी इमारत करीब 1935 से 1937 के बीच तैयार हुई थी और आज भी अपनी मजबूती तथा वास्तुशिल्प के लिए जानी जाती है।

उनका सवाल है कि दशकों पुरानी इमारत यदि आज भी खड़ी है, तो अपेक्षाकृत नई इमारत में इतने कम समय में निर्माण संबंधी समस्याएं क्यों सामने आ रही हैं?

सबसे बड़ा सवाल: 2007 की चेतावनी, 2024 की FIR और आज की स्थिति-जवाब कौन देगा?

एक तरफ वर्ष 2007 में उठाई गई सुरक्षा संबंधी आपत्तियां हैं, दूसरी तरफ भवन में समय-समय पर सामने आने वाली क्षतियों के दावे और वर्ष 2025 की FIR है।

अब जरूरत आरोपों और दावों से आगे बढ़कर तथ्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच की है।

रणजीत जोशी कहते हैं कि सवाल सीधे हैं-

क्या नई हाईकोर्ट बिल्डिंग का स्वतंत्र स्ट्रक्चरल ऑडिट हुआ है?

2024 की FIR में लगाए गए आरोपों की जांच कहां तक पहुंची?

डोम और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की वर्तमान स्थिति क्या है?

क्या भवन बार और बेंच के लिए पूरी तरह सुरक्षित है?

और सबसे महत्वपूर्ण—

अगर बिल्डिंग सुरक्षित है तो स्वतंत्र ऑडिट से डर कैसा?

और अगर खतरा है, तो हजारों लोगों की सुरक्षा से समझौता क्यों?

2007 में यह चेतावनी थी।
2024 में FIR हुई।
अब 2026 में जरूरत है-सच सामने लाने की।

न्याय का मंदिर सिर्फ भव्य नहीं होना चाहिए, वह न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और हर उस व्यक्ति के लिए सुरक्षित भी होना चाहिए जो वहां न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचता है।

रणजीत जोशी वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, जिन्होंने सर्वप्रथम 2006-07 में हाईकोर्ट को झालामंड शिफ्ट करने का विरोध किया था और लंबे समय तक इसके खिलाफ आंदोलन चलाया था।

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